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Chrome Incognito Mode में सर्च करने पर कुछ भी सीक्रेट नहीं रहता, मुकदमे के बाद गूगल ने चुपचाप बदला नियम

Google Chrome: अगर आपको लगता है कि गूगल क्रोम के इन्कॉगनिटो मोड में कुछ भी सर्च करके आपका ब्राउज़िंग या सर्च डेटा सीक्रेट रहता है, तो आप गलत है. एक मुकदमे के बाद गूगल ने अपनी पॉलिसी में बदलाव किए हैं.

Google Chrome: गूगल क्रोम का इस्तेमाल करने वाले यूजर्स अक्सर किसी भी सीक्रेट चीज को सर्च करने के लिए इन्कॉगनिटो मोड का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि गूगल पिछले कई सालों से इस बात का दावा करते आई है कि क्रोम के इन्कॉनिटो मोड में सर्च करने वाले ब्राउज़िंग डेटा का रिकॉर्ड गूगल के पास नहीं होता, इसलिए वह पूरी तरह से गुप्त रहता है. हालांकि, अब गूगल ने एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद चुपचाप अपनी इन्कॉगनिटो मोड की पॉलिसी में बदलाव कर दिया है.

इन्कॉगनिटो मोड की सच्चाई

द वर्ज की रिपोर्ट के मुताबिक अब गूगल के नए क्रोम वर्ज़न 122.0.6251.0 में इन्कॉगनिटो मोड खोलने या यूज करने पर यूजर्स को एक नई चेतावनी दिखेगी. इस चेतावनी में लिखा होगा कि, आप निजी या गुप्त ब्राउज़िंग कर सकते हैं, और इस डिवाइस को यूज करने वाले अन्य व्यक्ति को आपकी एक्टिविटी नहीं दिखाई देगी. इस चेतावनी में लिखा हुआ है कि गूगल आपकी ब्राउज़िंग हिस्ट्री को सेव नहीं करता है. कूकिंस और साइट डाटा सेव नहीं करता है, और किसी फॉर्म में भरने वाली इंफोर्मेशन भी सेव नहीं करता है. लेकिन जिस वेबसाइट पर आप जाते हैं, आपके एप्लॉयर या स्कूल और आपके इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर को आपकी एक्टिविटी दिख सकती है.

गूगल की इस नई चेतावनी और बदले हुई पॉलिसी ने इस बात को साफ कर दिया है कि आप क्रोम के इन्कॉगनिटो मोड में जो कुछ भी सर्च कर रहे हैं, वो पूरी तरह से गुप्त नहीं है. वो सिर्फ उस इंसान के लिए गुप्त है, जो आपके डिवाइस का इस्तेमाल करता है. उसके अलावा आपके स्कूल से लेकर ऑफिस तक के लोग भी आपकी सीक्रेट एक्टिविटी को देख सकते हैं.

गूगल ने क्यों बदली पॉलिसी

दरअसल, गूगल कंपनी के खिलाफ साल 2020 में एक यूजर्स ने मुकदमा दर्ज किया था. यूजर्स ने गूगल पर आरोप लगाया था कि गूगल यूजर्स के रियल टाइम डेटा को ट्रैक करता है, उसे जमा रखता है, और उसकी पहचान भी करता है. हालांकि, शुरू में गूगल डंके की चोट पर इस बात का दावा कर रहा था कि क्रोम का इन्कॉगनिटो मोड पूरी तरह से सुरक्षित है और यूजर्स के किसी डेटा को ट्रैक या कलेक्ट नहीं किया है, लेकिन बाद में गूगल अपनी गलती स्वीकार की और माना कि कौन-कौन इन्कॉगनिटो मोड की एक्टिविटीज़ पर नज़र रख सकता है. इस केस को सेटल करने के बाद गूगल ने अपनी पॉलिसी में चुपचाप बदलाव किया है. गूगल अगले महीने तक इन्कॉगनिटो मोड में नई चेतावनी को जारी कर सकता है. इस चेतावनी को स्वीकार करने के बाद ही यूजर्स क्रोम के इन्कॉगनिटो मोड का इस्तेमाल कर पाएंगे.

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