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अंदर से कैसा दिखता है अमेरिकी राष्ट्रपति का विमान, क्यों कहा जाता है इसे 'एयरफोर्स-1'?

एयरफोर्स-1 को लेकर पब्लिक डोमेन में बहुत ही बातें कही जाती हैं, जिसमें उसकी सुरक्षा से लेकर विमान की उड़ान क्षमता शामिल है. हालांकि, बहुत ही कम लोगों को एयरफोर्स-1 के इंटीरियर के बारे में जानकारी है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले दिनों तीन दिवसीय खाड़ी देशों की यात्रा पर गए थे. इस दौरान उन्होंने सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों का दौरा किया. इस यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति का खास विमान 'एयरफोर्स-1' काफी चर्चा में रहा. यह वह विमान है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति विदेश यात्रा करते हैं और इसे दुनिया के सबसे सुरक्षित विमानों में से एक माना जाता है. अगर सुविधाओं की बात करें तो अमेरिकी राष्ट्रपति के 'एयरफोर्स-1' को हवा में उड़ने वाला पांच सितारा होटल कहा जा सकता है. 

आमतौर पर एयरफोर्स-1 को लेकर पब्लिक डोमेन में बहुत ही बातें कही जाती हैं, जिसमें उसकी सुरक्षा से लेकर विमान की उड़ान क्षमता शामिल है. हालांकि, बहुत ही कम लोग हैं जिन्हें एयरफोर्स-1 के इंटीरियर के बारे में जानकारी है. दरअसल, एयरफोर्स-1 के प्रेसीडेंशियल स्यूट तक पहुंच बहुत ही सीमित है. ऐसे में चलिए आज हम आपको एयरफोर्स-1 के अंदर की सैर कराते हैं और जानते है कि आखिर इसे एयरफोर्स-1 ही क्यों कहा जाता है? 

क्या है 'एयरफोर्स-1'

अमेरिकी राष्ट्रपति जिस विमान में यात्रा करते हैं वह बोइंग 747-200B श्रृंखला के विमान हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति के पास ऐसे दो विमान हैं, जो दुनिया के किसी भी हिस्से की यात्रा करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं. अब आते हैं 'एयरफोर्स-1' पर. असल में 'एयरफोर्स-1' अमेरिकी राष्ट्रपति के विमान का नाम नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी राष्ट्रपति के विमान का रेडियो कॉल साइन है. राष्ट्रपति के विमान को पहचानने के लिए इस कॉल साइन का प्रयोग किया जाता है. यानी अमेरिकी राष्ट्रपति जिस भी विमान में सवार होते हैं उसे 'एयरफोर्स-1' कहा जाता है. उदाहरण के लिए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति लिंडर बी जॉनसन 1960 के दशक में ऑस्टिन से टेक्सास अपने फार्म के लिए छोटे प्रोपेलर विमान से यात्रा करते थे, तब उसे भी 'एयरफोर्स-1' कहा जाता था. जहां तक बोइंग 747-200B विमान की बात है तो यह 1990 से उपयोग में लाया जा रहा है. 

अंदर से कैसा है 'एयरफोर्स-1'

अमेरिकी राष्ट्रपति का विमान 'एयरफोर्स-1' हवा में उड़ने वाला एक पांच सितारा होटल है, जिसमें दुनिया की हर सुविधा उपलब्ध है. विमान के अंदर जाने के दो गेट हैं. पहला गेट अमेरिकी राष्ट्रपति और सीक्रेट सर्विस के लिए आरक्षित है और इसकी पहुंच बहुत ही सीमित है. विमान के दूसरे हिस्से में प्रेस सेक्शन हैं, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ कुछ पत्रकार यात्रा करते हैं. हालांकि, इस हिस्से के लिए एंट्रेंस बिल्कुल अलग है. एयरफोर्स वन के अंदर एक कांफ्रेंस और डायनिंग रूम भी है. इसके अंदर अमेरिकी राष्ट्रपति के दफ्तर की हर सुविधा मौजूद है. यानी राष्ट्रपति विमान से भी अपने सभी कामकाज निपटा सकते हैं. विमान में मेडिकल फैसिलिटी है, जिसमें इमरजेंसी सिचुएशन से निपटने वाली हर सुविधा मौजूद है. इसके सबसे आगे के हिस्से में प्रेसिडेंशियल स्यूट और ऑफिस है. विमान के अंदर ही एक जिम भी है. इस विमान में 26 क्रू मेंबर्स के अलावा 70 लोग सवार हो सकते हैं. 

यह भी पढ़ें: अगर बिना इजाजत पाकिस्तान के एयरस्पेस में घुस जाता इंडिगो विमान तो क्या होता? जान लीजिए नियम

प्रांजुल श्रीवास्तव एबीपी न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. फिलहाल फीचर डेस्क पर काम कर रहे प्रांजुल को पत्रकारिता में 9 साल तजुर्बा है. खबरों के साइड एंगल से लेकर पॉलिटिकल खबरें और एक्सप्लेनर पर उनकी पकड़ बेहतरीन है. लखनऊ के बाबा साहब भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता का 'क, ख, ग़' सीखने के बाद उन्होंने कई शहरों में रहकर रिपोर्टिंग की बारीकियों को समझा और अब मीडिया के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं. प्रांजुल का मानना है कि पाठक को बासी खबरों और बासी न्यूज एंगल से एलर्जी होती है, इसलिए जब तक उसे ताजातरीन खबरें और रोचक एंगल की खुराक न मिले, वह संतुष्ट नहीं होता. इसलिए हर खबर में नवाचार बेहद जरूरी है.

प्रांजुल श्रीवास्तव काम में परफेक्शन पर भरोसा रखते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता सिर्फ सूचनाओं को पहुंचाने का काम नहीं है, यह भी जरूरी है कि पाठक तक सही और सटीक खबर पहुंचे. इसलिए वह अपने हर टास्क को जिम्मेदारी के साथ शुरू और खत्म करते हैं. 

अलग अलग संस्थानों में काम कर चुके प्रांजुल को खाली समय में किताबें पढ़ने, कविताएं लिखने, घूमने और कुकिंग का भी शौक है. जब वह दफ्तर में नहीं होते तो वह किसी खूबसूरत लोकेशन पर किताबों और चाय के प्याले के साथ आपसे टकरा सकते हैं.

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