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Nomination: कितनी होती है नामांकन के वक्त जमा की जाने वाली जमानत राशि और कब हो जाती है जब्त?

पीएम नरेंद्र मोदी ने आज वाराणसी लोकसभा सीट से नामांकन दाखिल किया है. क्या आप जानते हैं कि नामांकन के वक्त उम्मीदवारों को जमानत राशि कितना जमा करना पड़ता है और ये कब वापस होती है.

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज यानी 14 मई को वाराणसी लोकसभा सीट से तीसरी बार नामांकन दाखिल किया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी समेत देशभर में लोकसभा चुनाव लड़ने वाले बाकी सभी उम्मीदवार नामांकन के वक्त जमानत राशि कितना जमा करते हैं. वहीं किस स्थिति में ये जमानत राशि उम्मीदवारों को वापस नहीं मिलती है. जानिए जमानत राशि को लेकर क्या है नियम.

जमानत राशि

बता दें कि भारत के सभी चुनावों के लिए नामांकन के वक्त जमानत राशि जमा की जाती है. देश में गांव के प्रधान से लेकर राष्ट्रपति चुनाव तक सभी उम्मीदवारों को नामांकन करना होता है. वहीं नामांकन के वक्त अगर उम्मीदवार जमानत राशि नहीं जमा करेगा, तो उस उम्मीदवार का नामांकन नहीं होगा. हालांकि चुनाव खत्म होने के बाद ये जमानत राशि उम्मीदवार को वापस कर दी जाती है. इसके लिए कुछ नियम हैं जैसे उम्मीदवार कुल वैध मतों का 1/6 से अधिक वोट प्राप्त करता है. उम्मीदवार जीत जाता है, भले ही उसे 1/6 से कम वोट मिले हैं. यदि उम्मीदवार का नामांकन रद्द कर दिया जाता है या वह नामांकन वापस लेता है. इसके अलावा वोटिंग शुरू होने से पहले उम्मीदवार की मृत्यु हो जाती है. 

कितनी होती है जमानत राशि

देश के सभी चुनावों के लिए जमानत राशि अलग-अलग होती है. लोकसभा चुनाव के लिए जमानत राशि 25000 रुपये है. ये फीस सामान्य वर्ग के लिए है. वहीं अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए ₹12,500 फीस है. विधानसभा चुनाव के लिए सामान्य वर्ग की जमानत राशि ₹10,000 और एससी और एसटी के लिए 5000 रुपये है. 

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव

बता दें कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव में भी उम्मीदवारों को नामांकन के वक्त जमानत राशि जमा करनी होती है. सभी वर्ग के लिए ये फीस 15000 रुपये है.

जमानत जब्त

चुनाव के बाद वोटिंग के समय आपने अक्सर सुना होगा कि इस उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जमानत कब जब्त होती है और इसके लिए क्या नियम हैं. चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक यदि कोई उम्मीदवार कुल वैध मतों का 1/6 वां हिस्सा भी हासिल नहीं कर पाता है, तो उसकी जमानत जब्त हो जाती है. उदाहरण के लिए यदि किसी सीट पर 1 लाख वोट डाले गए हैं और 16,666 वोट से कम प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों की संख्या 5 है, तो उनकी जमानत जब्त कर ली जाएगी. जमानत जब्त होने के बाद उनके द्वारा जमा जमानत राशि उन्हें वापस नहीं की जाती है. 

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गिरिजांश गोपालन को मीडिया इंडस्ट्री में चार साल से ज्यादा का अनुभव है. फिलहाल वह डिजिटल में सक्रिय हैं, लेकिन इनके पास प्रिंट मीडिया में भी काम करने का तजुर्बा है. दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद गिरिजांश ने नवभारत टाइम्स अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. उन्हें घूमना बेहद पसंद है. पहाड़ों पर चढ़ना, कैंपिंग-हाइकिंग करना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना उनकी हॉबी में शुमार है। यही कारण है कि वह तीन साल से पहाड़ों में ज्यादा वक्त बिता रहे हैं. अपने अनुभव और दुनियाभर की खूबसूरत जगहों को अपने लेखन-फोटो के जरिए सोशल मीडिया के रास्ते लोगों तक पहुंचाते हैं.
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