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Joshimath Land Subsidence: दिल्ली में हाईलेवल बैठक, PM मोदी का भरोसा और कमेटी की रिपोर्ट... जोशीमठ संकट से जुड़ी 10 बड़ी बातें

Joshimath News: अधिकारियों ने कहा कि जोशीमठ में कुल 4,500 इमारतें हैं और इनमें से 610 में बड़ी दरारें आ गई हैं. जिससे वे रहने लायक नहीं रह गई हैं. प्रभावित इमारतों की संख्या बढ़ सकती है.

Joshimath Land Subsidence Update: उत्तराखंड के जोशीमठ में जमीन धंसने और कई घरों में दरारें पड़ने की घटनाओं को लेकर रविवार (8 जनवरी) को काफी हलचल रही. इस संकट को लेकर बैठकें हुईं और कई अधिकारियों ने जमीनी स्थिति का जायजा लेने के लिए इलाके का दौरा किया. पीएम मोदी (PM Modi) ने भी उत्तराखंड के सीएम से बात कर मदद का आश्वासन दिया. जानिए मामले से जुड़ी बड़ी बातें. 

1. जोशीमठ संकट को लेकर रविवार को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक हुई. इस बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार की एजेंसियां और विशेषज्ञ जोशीमठ में स्थिति से निपटने के लिए लघु, मध्यम और दीर्घकालीन अवधि की योजनाएं तैयार करने में उत्तराखंड सरकार की मदद कर रहे हैं. 

2. राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की एक टीम और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की चार टीम पहले ही जोशीमठ पहुंच चुकी हैं, जहां जमीन धंसने और सैकड़ों घरों में दरारें आने से लोग दहशत में हैं. अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है. सीमा प्रबंधन सचिव और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सदस्य सोमवार (9 जनवरी) को उत्तराखंड का दौरा करेंगे और स्थिति का जायजा लेंगे.

3. प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा की ओर से आयोजित बैठक के दौरान उत्तराखंड के मुख्य सचिव ने पीएमओ को जानकारी दी. समीक्षा बैठक में कैबिनेट सचिव, केंद्र सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्यों ने हिस्सा लिया. जोशीमठ के जिला अधिकारियों के अलावा उत्तराखंड के वरिष्ठ अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समीक्षा बैठक में भाग लिया.

4. अधिकारियों ने कहा कि सात संस्थानों के विशेषज्ञों की टीम हालात का अध्ययन कर रिपोर्ट सौंपेगी. इनमें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन इंस्टिट्यूट, भारतीय भूगर्भ सर्वे संस्थान, आईआईटी रुड़की, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलोजी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी और सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ शामिल होंगे.  

5. पीएम मोदी ने रविवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बात की. इस बारे में सीएम धामी ने ट्वीट कर कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोशीमठ के संदर्भ में फोन के माध्यम से वार्ता कर प्रभावित नगरवासियों की सुरक्षा व पुनर्वास हेतु उठाए गए कदमों एवं समस्या के समाधान हेतु तात्कालिक तथा दीर्घकालिक कार्य योजना की प्रगति के विषय में जानकारी ली. प्रधानमंत्री जी व्यक्तिगत रूप से जोशीमठ की स्थिति और क्षेत्र में सरकार की ओर से चल रहे सुरक्षात्मक कार्यों पर नजर बनाए हुए हैं. साथ ही उन्होंने जोशीमठ को बचाने के लिए हर संभव सहायता का आश्वासन दिया.

6. जोशीमठ पर उत्तराखंड सरकार की ओर से बनाई गई 8 सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट आई है. रिपोर्ट में कहा गया कि प्रभावित लोगों को तत्काल विस्थापित किया जाए और छतिग्रस्त इमारतों को गिराकर उसका मलबा मौके से हटवाया जाए. जेपी कॉलोनी से मारवाड़ी ब्रिज तक सैंपल इकट्ठे किये गए क्योंकि यहीं तक पानी का फ्लो था. इसकी वजह से जमीन के अंदर खाली जगह बनी, जिसकी वजह से धंसाव हो रहा है. इससे कुछ जगह क्रैक हुआ है. जमीन कुछ जगह समतल नहीं रह गई है, जिसकी वजह से दीवारों और भवनों की नींव कमजोर हो गई है. इसकी वजह से भवनों और मैदानों में दरारें देखी जा रही हैं.

7. स्थानीय लोगों ने भू-धंसाव को लेकर आरोप लगाया कि एनटीपीसी (NTPC) की सुंरग में जिस तरह ब्लास्ट किए जाते हैं, वो जमीन धंसने का एक बड़ा कारण हो सकते हैं. इन दावों की सच्चाई जानने के लिए सबसे पहले एबीपी न्यूज़ की टीम इस टनल के अंदर पहुंची. 12 किलोमीटर लंबी ये निर्माणाधीन सुरंग सेलग नाम की जगह से शुरू होती है जो तपोवन तक जाएगी. अभी तक सिर्फ 8 किलोमीटर तक काम हो पाया है. इन आरोपों पर एनटीपीसी ने जवाब देते हुए कहा है कि ये सुरंग टनल बोरिंग मशीन के जरिये बनाई गई है. यहां कोई भी ब्लास्ट नहीं किया गया. फिलहाल इस टनल का निर्माण कार्य पूरी तरह से रोक दिया गया है. 

8. उत्तराखंड के मुख्य सचिव सुखबीर सिंह संधू ने जमीनी स्थिति का जायजा लेने के लिए रविवार को जोशीमठ के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया. राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अशोक कुमार और मुख्यमंत्री की सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम के साथ संधू ने जमीन धंसने से बुरी तरह प्रभावित मनोहर बाग, सिंगधार और मारवाड़ी इलाकों का निरीक्षण किया. उन्होंने इन इलाकों के लोगों से अस्थायी राहत केंद्रों में स्थानांतरित होने की अपील भी की.

9. उत्तराखंड सरकार ने हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी) और देहरादून स्थित भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आईआईआरएस) से सेटेलाइट तस्वीरों के माध्यम से जोशीमठ क्षेत्र का अध्ययन करने और फोटो के साथ विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का अनुरोध किया है. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण को पुनर्वास के लिए जोशीमठ में कोटि फार्म, पादप संस्थान एवं बागवानी विभाग की जमीन और पीपलकोटि के सेमालडाला क्षेत्र की उपयुक्तता का परीक्षण करने को भी कहा गया है. जोशीमठ के प्रभावित क्षेत्रों के दौरे से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के लौटकर आने के बाद ये अनुरोध किये गये हैं.

10. जोशीमठ (Joshimath) के क्षतिग्रस्त घरों में रह रहे 60 से अधिक परिवारों को अस्थायी राहत केंद्रों में पहुंचाया गया है. गढ़वाल के आयुक्त सुशील कुमार ने कहा कि स्थानीय प्रशासन ने हिमालयी शहर में चार-पांच स्थानों पर राहत केंद्र स्थापित किए हैं और कम से कम 90 और परिवारों को निकाला जाना है. चमोली के जिलाधिकारी हिमांशु खुराना नुकसान का आंकलन करने के लिए प्रभावित क्षेत्र में घर-घर गए और दरार वाले मकानों में रह रहे लोगों से राहत केंद्रों में जाने की अपील की. खुराना ने कहा कि राज्य सरकार उन लोगों को छह महीने तक 4,000 रुपये प्रति माह का भुगतान करेगी जो किराए के आवास में जाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि लोग क्षतिग्रस्त घरों में रहकर अपनी जान जोखिम में न डालें. 

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