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Doomsday Clock में क्या बदल सकता है तबाही का समय, कौन चेंज करता है इसका टाइम? 

1947 में जब डूम्सडे क्लॉक बनाई गई थी. जब इस घड़ी को बनाया गया, तो उसका टाइम 11:53 मिनट पर सेट किया गया था. यानी 12 बजे से 7 मिनट पहले. इसके बाद से अब तक कई बार इसके समय को बढ़ाया गया है.

Doomsday Clock: पृथ्वी पर करोड़ों साल पहले डायनासोर रहा करते थे. एक दिन प्रलय आई और सब खत्म हो गया. इसके बाद इंसान अस्तित्व में आए. कहा जाता है कि एक दिन इंसान भी खत्म हो जाएंगे, यानी प्रलय आएगी और फिर होगा पुनर्निर्माण.

यह प्रलय कब और कैसे आएगी, इसको लेकर बाबा वेंगा से लेकर कई वैज्ञानिकों के अलग-अलग दावे और भविष्यवाणियां हैं. हालांकि, बढ़ते जलवायु परिवर्तन, परमाणु युद्ध के खतरे और कई देशों के बीच बढ़ रहे तनाव से यह तो यह है कि प्राकृतिक प्रलय से पहले मानवनिर्मित विनाश होकर रहेगा. यह विनाश कब और कैसे होगा, इसको लेकर एक घड़ी बनाई गई है, जिसे 'Doomsday Clock' कहा जाता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस घड़ी में जब कभी भी 12 बजेंगे तो वही दिन कयामत का होगा. 

कयामत का वक्त बताने वाली घड़ी

सबसे पहले तो यह स्पष्ट कर लें कि 'Doomsday Clock' एक सांकेतिक घड़ी है, जिसमें बताया गया समय दुनिया की मौजूदा स्थिति को बताता है. इसे इस तरह से समझ सकते हैं कि जब भी इंसानी प्रयोगों के कारण धरती पर खतरा बढ़ता है और विनाशकारी स्थितियां उत्पन्न होती हैं, इस घड़ी का समय बढ़ा दिया जाता है. जैसे-जैसे घड़ी की सुई 12 बजे के नजदीक पहुंचेगी, पृथ्वी पर खतरा बढ़ता जाएगा. जब घड़ी में 12 बजेगा, तो वही दिन कयामत वाला होगा. 

कब-कब बढ़ाया गया समय

महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन, रॉबर्ट ओपनहाइमर जैसे वैज्ञानिकों ने मिलकर एक संस्था बनाई थी, जिसका नाम है 'बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट'. इस संस्था ने 1947 में डूम्सडे क्लॉक बनाई थी. जब इस घड़ी को बनाया गया, तो उसका टाइम 11:53 मिनट पर सेट किया गया था. यानी 12 बजे से 7 मिनट पहले. 1949 में जब सोवियत संघ ने न्यूक्लियर टेस्ट किया, तो इस घड़ी के टाइम को आगे बढ़ाकर 11:57 पर कर दिया गया. इसके बाद 1952 में अमेरिका ने न्यूक्लियर टेस्ट किया, जिसके बाद 1953 में सोवियत संघ ने हाइड्रोजन बना लिया गया. इसके बाद घड़ी का टाइम 2 मिनट और बढ़ा दिया गया. यानी जब भी इंसान कोई ऐसा प्रयोग करता जिससे पृथ्वी को खतरा होता है उस समय घड़ी का समय आगे बढ़ा दिया जाता है. घड़ी के समय को बदलने का काम 'बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट' संस्था ही करती है. 

तबाही के समय में बचे हैं बस इतने सेकेंड

डूम्सडे क्लॉक में समय धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है. इस घड़ी में 12 बजने में बस 89 सेकेंड्स का समय बचा है. यानी दुनिया तबाही के बहुत करीब है. 12 बजते ही तबाही का दिन आ जाएगा. हालांकि, इसके समय को कम भी किया जा सकता है.  जिस तरह घड़ी का समय बढ़ाया जाता है, ठीक वैसे ही हालात सुधरने पर घड़ी का टाइम पीछे भी किया जा सकता है.  

यह भी पढ़ें: बाबा वेंगा के बाद इस दिग्गज वैज्ञानिक ने भी की थी दुनिया के खत्म होने की भविष्यवाणी, कहां लिखी थी तबाही की बात?

 

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