कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने मंदिर में की पूजा, जानें इसे लेकर क्या कहता है इस्लाम
Omar Abdullah Worshipped In Mata Mandir: उमर अब्दुल्ला ने की मंदिर में पूजा. क्या एक मुस्लिम होने के बाद भी उमर अब्दुल्ला मंदिर में पूजा कर सकते हैं. इसे लेकर इस्लाम क्या कहता है. चलिए बताते हैं

Omar Abdullah Worshipped In Mata Mandir: जम्मू कश्मीर में पहलगाम आतंकी हमले के बाद अब स्थिति सामान्य होती नजर आ रही है. जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी इसमें बढ़ चढ़कर योगदान दे रहे हैं. हाल ही में उमर अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर में माता खीर भवानी मंदिर पूजा अर्चना करके भी आए हैं. आपको बता दें माता खीर भवानी मंदिर में हर साल मेरा लगता है.
इस साल 3 जून से यह मेला आयोजित होगा. इस मंदिर को कश्मीरी हिंदुओं की कुलदेवी का मंदिर भी कहा जाता है. लेकिन उमर अब्दुल्ला के यहां पूजा करने के बाद कई लोगों के मन में यह सवाल आ रहा है. क्या एक मुस्लिम होने के बाद भी उमर अब्दुल्ला मंदिर में पूजा कर सकते हैं? इसे लेकर इस्लाम में क्या कहा गया है. चलिए आपको बताते हैं पूरी जानकारी.
मंदिर में पूजा करने को लेकर क्या कहता है इस्लाम?
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर में माता के मंदिर में पूजा अर्चना की है. सोशल मीडिया पर कई लोग उनकी इस काम की सराहना कर रहे हैं. तो कई लोग उन्हें टारगेट भी करने उतर आए हैं. उमर अब्दुल्ला एक मुस्लिम है और मंदिर में उनका पूजा करना इस्लाम धर्म के मुताबिक सही है या गलत लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है.
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आपको बता दें इस्लाम एकेश्वरवादी धर्म है. यानी इस्लाम के अनुयाई सिर्फ अल्लाह की इबादत कर सकते हैं. वह दूसरे किसी भी धर्म की पूजा में शामिल नहीं हो सकते. खास तौर पर मूर्ति पूजा इस्लाम में से शिर्क यानी सबसे बड़ा पाप माना गया है.
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कोई ऐसा करे तो क्या होगा?
आपको बता दें कुरान और हदीस के मुताबिक किसी दूसरे धर्म की इबादत में हिस्सा लेना इस्लामी सिद्धांतों के खिलाफ है. इस्लामी विद्वानों की आम राय के मुताबिक किसी भी दूसरे धर्म का सम्मान किया जा सकता है. लेकिन उनकी पूजा में भाग लेना इस्लाम धर्म के खिलाफ है. अगर कोई मुस्लिम ऐसा करता है तो उसके खिलाफ इस्लामी नियमों के तहत फतवा जारी किया जा सकता है. हालांकि सामान्य तौर पर मुस्लिम नेताओं को अलग-अलग धर्म के धार्मिक स्थलों पर जाने की छूट होती है. लेकिन इस्लामी विद्वानों और मौलवियों के मुताबिक उन्हें पूजा में भाग नहीं लेना चाहिए.
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