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रात के अंधेरे में शराब पीना क्यों बना ग्लोबल ट्रेंड, क्या रात में ही चढ़ता है ज्यादा नशा?
शराब पीने का रात में ट्रेंड केवल एक आदत नहीं, बल्कि सामाजिक शर्म, कामकाजी संस्कृति और हमारी जैविक घड़ी का मिला-जुला परिणाम है. दिन के उजाले में इसे लत माना जाता है, जबकि शाम को स्ट्रेस रिलीज का जरिया.
क्या आपने गौर किया है कि शराब का जिक्र आते ही हमारे दिमाग में शाम की ढलती रोशनी और रात का अंधेरा क्यों उभरता है? क्यों दुनिया भर में दोपहर की धूप में शराब पीना एक अजीब सा सामाजिक अपराध जैसा लगता है? यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक गहरी सामाजिक और मनोवैज्ञानिक बुनावट है. रात के अंधेरे और शराब के बीच का यह रिश्ता महज एक ट्रेंड नहीं, बल्कि थकान, सामाजिक शर्म और हमारे मस्तिष्क की जैविक घड़ी का एक जटिल मेल है.
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भारतीय परिवेश में शराब पीने के लिए रात के समय को चुनने के पीछे सबसे बड़ा कारण सामाजिक शर्म है. हमारे पारिवारिक मूल्य ऐसे हैं कि दिन के उजाले में या परिवार के सामने शराब पीना आज भी एक वर्जित कार्य माना जाता है.
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काम का भारी बोझ और दिन भर की भागदौड़ के बाद, रात का समय थकान उतारने का जरिया बन जाता है. ब्रिटिश काल में कोलकाता में जब पहली बार व्यावसायिक शराब की दुकानें खुलीं, तब से लेकर आज तक, शराब का सेवन धीरे-धीरे एक शाम की रस्म में बदल गया, ताकि इसे एक जिम्मेदार और पेशेवर छवि के साथ जोड़ा जा सके.
Published at : 21 Apr 2026 09:51 AM (IST)
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मेघा प्रसादसीनियर एडिटर (पॉलिटिकल अफेयर्स)
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