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नोटबुक के पन्नों पर क्यों होता है खाली मार्जिन, जानिए कब क्यों की गई थी इसकी शुरुआत

कॉपियों में खाली मार्जिन छोड़ने की शुरुआत पुराने समय में चूहों और दीमकों से महत्वपूर्ण जानकारियों को बचाने के लिए हुई थी, क्योंकि वे हमेशा कागज को किनारों से ही कुतरना शुरू करते हैं.

कॉपियों में खाली मार्जिन छोड़ने की शुरुआत पुराने समय में चूहों और दीमकों से महत्वपूर्ण जानकारियों को बचाने के लिए हुई थी, क्योंकि वे हमेशा कागज को किनारों से ही कुतरना शुरू करते हैं.

बचपन के दिनों में स्कूल का कॉपियों में लिखते समय हम सबने एक बार पर गौर किया होगा कि पन्ने के बाएं हिस्से में हमेशा एक खाली जगह छोड़ी जाती है, जिसे हम मार्जिन कहते हैं. लाल या नीली सीधी लकीर खींचकर बनाई गई यह खाली जगह हमारे बड़े काम आती थी. ज्यादातर लोग यह सोचते हैं यह टीचर्स के नंबर देने, कॉपी को सुंदर दिखाने आदि के लिए बनाई जाती है. लेकिन इसकी वजह कुछ और है.

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नोटबुक में खाली मार्जिन लाइन देने की यह परंपरा कोई आधुनिक प्रयोग नहीं है, बल्कि यह सदियों पुरानी व्यवस्था है. इसको बनाने की असली वजह चूहे, दीमक और कीड़े-मकोड़े थे. पुराने वक्त में आज की तरह से दस्तावेजों को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने के लिए कंप्यूटर नहीं हुआ करते थे.
नोटबुक में खाली मार्जिन लाइन देने की यह परंपरा कोई आधुनिक प्रयोग नहीं है, बल्कि यह सदियों पुरानी व्यवस्था है. इसको बनाने की असली वजह चूहे, दीमक और कीड़े-मकोड़े थे. पुराने वक्त में आज की तरह से दस्तावेजों को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने के लिए कंप्यूटर नहीं हुआ करते थे.
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उन दिनों महत्वपूर्ण हस्तलिपियों और किताबों को संभालकर रखना एक सबसे बड़ी चुनौती हुआ करती थी. चूहों और दीमकों की आदत होती है वे जब किसी किताब या कागज पर हमला करते हैं तो उसे हमेशा बाहरी किनारों से ही चबाना शुरू करते हैं.
उन दिनों महत्वपूर्ण हस्तलिपियों और किताबों को संभालकर रखना एक सबसे बड़ी चुनौती हुआ करती थी. चूहों और दीमकों की आदत होती है वे जब किसी किताब या कागज पर हमला करते हैं तो उसे हमेशा बाहरी किनारों से ही चबाना शुरू करते हैं.
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अब आप खुद अंदाजा लगाइए कि यदि उस दौर के विद्वानों और लेखक कागज के बिल्कुल आखिरी छोर तक अपनी बात लिख देते, तो क्या होता?
अब आप खुद अंदाजा लगाइए कि यदि उस दौर के विद्वानों और लेखक कागज के बिल्कुल आखिरी छोर तक अपनी बात लिख देते, तो क्या होता?
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ऐसी स्थिति में चूहों द्वारा किनारों को थोड़ा भी कुतरने पर उसमें लिखी गई बेहद बेशकीमती और ऐतिहासिक जानकारियां हमेशा-हमेशा के लिए गायब हो जातीं.
ऐसी स्थिति में चूहों द्वारा किनारों को थोड़ा भी कुतरने पर उसमें लिखी गई बेहद बेशकीमती और ऐतिहासिक जानकारियां हमेशा-हमेशा के लिए गायब हो जातीं.
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इस भयानक नुकसान से बचने के लिए तत्कालीन विचारकों और कागज निर्माताओं ने एक नायाब तरकीब सोची. उन्होंने पन्नों के चारों तरफ एक निश्चित दूरी तक खाली जगह छोड़ना तय किया, ताकि अगर चूहे किनारों को खत्म भी कर दें तो भी बीच में लिखा हुआ मूल पाठ और डेटा पूरी तरह से सुरक्षित रहे.
इस भयानक नुकसान से बचने के लिए तत्कालीन विचारकों और कागज निर्माताओं ने एक नायाब तरकीब सोची. उन्होंने पन्नों के चारों तरफ एक निश्चित दूरी तक खाली जगह छोड़ना तय किया, ताकि अगर चूहे किनारों को खत्म भी कर दें तो भी बीच में लिखा हुआ मूल पाठ और डेटा पूरी तरह से सुरक्षित रहे.
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यह खाली मार्जिन पुराने समय में लिखित ज्ञान के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह से काम करता था. इस बेहतरीन आइडिया की वजह से सैकड़ों सालों का इतिहास और जरूरी दस्तावेज चूहों के हमले के बाद भी सुरक्षित हैं.
यह खाली मार्जिन पुराने समय में लिखित ज्ञान के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह से काम करता था. इस बेहतरीन आइडिया की वजह से सैकड़ों सालों का इतिहास और जरूरी दस्तावेज चूहों के हमले के बाद भी सुरक्षित हैं.
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भले ही आज के समय में हमारे पास कॉपियों को रखने के लिए बेहतरीन बैग और अलमारियां आ गई हैं, लेकिन पुराने दौर की यह सुरक्षा प्रणाली आज भी हमारे लेखन का जरूरी हिस्सा है.
भले ही आज के समय में हमारे पास कॉपियों को रखने के लिए बेहतरीन बैग और अलमारियां आ गई हैं, लेकिन पुराने दौर की यह सुरक्षा प्रणाली आज भी हमारे लेखन का जरूरी हिस्सा है.

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