Explained: जंतर-मंतर भूख हड़ताल का पूरा लेखा-जोखा! हर सवाल का जवाब, हर आंकड़ा, हर नाम और पीछे की कहानी...
Jantar Mantar Protest: सोनम वांगचुक का आंदोलन NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे को राष्ट्रीय बहस का विषय बनाने में कामयाब रहा. इसने विपक्षी दलों को एकजुट किया और युवाओं को सड़कों पर लाया.

28 जून 2026 को शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे देश के सबसे बड़े सवालों में से एक बन गया कि क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाएं अब भी भरोसे के काबिल हैं? NEET पेपर लीक के विवाद ने एक बार फिर इस सवाल को जन्म दिया और इसी सवाल को लेकर सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर उतर आए. 20 दिनों तक चले इस अनशन ने देश का ध्यान खींचा, सियासी दलों को एकजुट किया और सरकार को मजबूर किया कि वह इस मुद्दे पर गौर करे. आखिर जंतर-मंतर पर चल रही हड़ताल की ABCD क्या है...
1. आंदोलन की शुरुआत में कितने लोग भूख हड़ताल पर थे?
28 जून 2026 को सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. सोनम के साथ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के कई छात्र नेता भी अनशन पर बैठे. शुरुआती दिनों में वांगचुक के साथ तीन छात्र नेहा, मनीष और अमीन भी भूख हड़ताल पर थे. इसके अलावा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सैकड़ों समर्थक धरने पर मौजूद थे. हालांकि वे सभी भूख हड़ताल पर नहीं थे.
2. अब कितने हैं, कौन-कौन हैं और किस ग्रुप से हैं?
20 जुलाई 2026 को तीनों छात्रों नेहा, मनीष और अमीन ने 23 दिन की हड़ताल के बाद अपना अनशन तोड़ दिया. AISA के मुताबिक, इन तीनों छात्रों ने 12 प्रतिशत से ज्यादा शारीरिक वजन गंवा दिया था और उनके ब्लड शुगर का लेवल खतरनाक रूप से कम हो गया था.
सोनम वांगचुक को 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कर दिया. वे अब अस्पताल में हैं, लेकिन उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने कहा कि वे अभी भी भूख हड़ताल पर हैं. अस्पताल में मल्टीडिसिप्लिनरी टीम उनकी गरानी कर रही है.
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वांगचुक के अस्पताल ले जाए जाने के बाद अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया. वे जंतर-मंतर पर ही मौजूद हैं. CJP इस आंदोलन का मुख्य संगठन है, जिसके संस्थापक अभिजीत दीपके हैं. यह आंदोलन मई 2026 में NEET पेपर लीक के बाद ऑनलाइन शुरू हुआ था और अब तक 22 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स जुटा चुका है.
20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर सुबह से प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा लगने लगा. प्रशांत भूषण के मुताबिक, इस समय करीब 75 हजार प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर जुट चुके हैं. यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. लोग ट्रेन, मेट्रो, बसों और गाड़ियों से पहुंच रहे हैं.
3. कितनी महिलाएं और पुरुष हैं?
इस आंदोलन में महिलाओं और पुरुषों दोनों की भागीदारी रही:
- तीन भूख हड़ताली छात्रों में नेहा और मनीष, अमीन शामिल थे.
- AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा ने इस आंदोलन का नेतृत्व किया.
- CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बाद में अनशन शुरू किया.
- सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो आंदोलन की प्रवक्ता बनीं.
- प्रदर्शनकारियों में स्कूल की छात्राएं, महिला शिक्षिकाएं, महिला कार्यकर्ता, पुरुष छात्र, सेवानिवृत्त कर्मचारी, वकील, पूर्व-सैनिक और ऑटो-रिक्शा चालक सभी शामिल थे. एक 69 वर्षीय विजया रानी उत्तर प्रदेश से अपने बेटे के साथ प्रदर्शन देखने आईं. दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर अभा देव हबीब ने प्रदर्शन स्थल पर छात्रों को संबोधित किया.
- CJP ने आरोप लगाया कि सरकार महिला वॉलंटियर्स की निगरानी कर रही है.
4. कितने लोगों ने भूख हड़ताल खत्म करने की बात कही है?
कई राजनीतिक नेताओं और हस्तियों ने सोनम वांगचुक से अपना अनशन खत्म करने की अपील की. इनमें:
- अरविंद केजरीवाल (आम आदमी पार्टी)
- डिम्पल यादव (समाजवादी पार्टी)
- सोनिया गांधी (कांग्रेस)
- पवन खेड़ा (कांग्रेस)
- सुप्रिया सुले (NCP)
- प्रकाश राज (अभिनेता)
- CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी वांगचुक से अनशन खत्म करने की गुजारिश की
इन सभी नेताओं ने बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए उनसे अनशन खत्म करने की अपील की.
5. कितने दिनों से हड़ताल पर हैं?
सोनम वांगचुक ने ठीक 28 जून 2026 को अनशन शुरू कर दिया था. 18 जुलाई को उन्हें अस्पताल ले जाया गया, तब तक उनका अनशन 21 दिन का हो चुका था. 20 जुलाई तक उनका अनशन 23 दिन का हो चुका था. वे अब भी अस्पताल में अनशन पर हैं.
CJP विरोध प्रदर्शन 20 जून से शुरू हुआ, जो 20 जुलाई तक 31 दिन चल चुका था. अभिजीत दीपके का अनशन 18 जुलाई से शुरू हुआ था और 20 जुलाई तक 3 दिन पूरे.
6. किन-किन सियासी पार्टियों की हिमायत मिली है?
सोनम वांगचुक को लगभग सभी प्रमुख विपक्षी दलों ने समर्थन किया:
- कांग्रेस: सोनिया गांधी ने व्यक्तिगत रूप से समर्थन दिया, पवन खेड़ा ने वांगचुक से मुलाकात की. कांग्रेस ने सरकार से 'राजधर्म' निभाने की अपील की.
- आम आदमी पार्टी (AAP): अरविंद केजरीवाल ने जंतर-मंतर जाकर समर्थन दिया और सौरभ भारद्वाज भी पहुंचे. केजरीवाल ने वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाने की मांग भी उठाई.
- समाजवादी पार्टी (SP): डिम्पल यादव ने वांगचुक से मुलाकात की और अखिलेश यादव ने युवाओं के साथ एकजुटता जताई.
- TMC: ममता बनर्जी ने समर्थन दिया.
- NCP (शरद पवार): सुप्रिया सुले ने वांगचुक से मुलाकात करके समर्थन दिया.
- CPI(M): अमरा राम ने प्रदर्शन स्थल का दौरा किया.
- आजाद समाज पार्टी (कांशीराम): चंद्रशेखर आजाद भी पहुंचे.
7. किन-किन बड़े नेताओं ने जंतर-मंतर का दौरा किया?
- अरविंद केजरीवाल (AAP)- 16 जुलाई 2026
- डिम्पल यादव (SP)- 16 जुलाई 2026
- सौरभ भारद्वाज (AAP)- 16-18 जुलाई 2026
- पवन खेड़ा (कांग्रेस)- 17 जुलाई 2026
- सौरभ भारद्वाज (AAP)- 16-18 जुलाई 2026
- अमरा राम (CPI-M)- 20 जुलाई 2026
- चंद्रशेखर अजाद- 20 जुलाई 2026
- प्रकाश राज (अभिनेता)- 11 जुलाई और 20 जुलाई 2026
इसके अलावा, सोनिया गांधी ने व्यक्तिगत रूप से समर्थन दिया. राहुल गांधी ने खुद जंतर-मंतर का दौरा नहीं किया, लेकिन कांग्रेस ने पार्टी स्तर पर समर्थन दिया.
8. सोनम वांगचुक की क्या-क्या मांगें हैं?
आंदोलन की मांगों में समय के साथ बदलाव आया है. शुरुआती मांग (CJP और वांगचुक):
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
- NEET पेपर लीक की जांच
- आत्महत्या करने वाले 20 से ज्यादा छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपए का मुआवजा
बाद की मांग (20 जुलाई तक वांगचुक की तीन शर्तें):
- सरकार शिक्षा व्यवस्था में हुई 'विफलताओं' की जिम्मेदारी ले
- राजनीतिक नेता संसद में इस मुद्दे को उठाने का आश्वासन दें
- अगर वांगचुक संसद मार्च में शामिल नहीं हो पाते, तो बड़े नेता अस्पताल आकर पहली दो शर्तों का आश्वासन दें
गौरतलब है कि बाद की मांगों में 'इस्तीफा' शब्द नहीं है, बल्कि 'जवाबदेही' और 'आश्वासन' पर जोर है.
9. सरकार का क्या रुख है?
केंद्र सरकार ने इस आंदोलन के साथ बातचीत करने से इनकार कर दिया.
- 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया. पुलिस का कहना था कि यह 'आवश्यक चिकित्सा देखभाल' के लिए किया गया.
- दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार के इस कदम को 'अपने अधिकारों के भीतर' ठहराया. कोर्ट ने कहा कि जब वांगचुक ने खुद अस्पताल जाने से इनकार किया, तो सरकार उन्हें अस्पताल ले जा सकती है.
- प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं. इसे सरकार के न झुकने के तौर पर देखा गया.
- सरकार की ओर से कोई बातचीत की पेशकश नहीं हुई.
- NEET पेपर लीक मामले में जांच जारी है, लेकिन सरकार ने मंत्री के इस्तीफे या बड़े बदलाव की कोई बात नहीं कही है.
10. कुल मिलाकर असर कितना रहा?
यह आंदोलन बड़े पैमाने पर देखा जा रहा है, लेकिन यह कहना गलत होगा कि असर बहुत बड़ा हुआ. क्योंकि अब आंदोलन की मांगे ही बदल चुकी हैं...
- जनसमर्थन: 18वें दिन लगभग 1,000 समर्थक जंतर-मंतर पर जमा हुए. 20 जुलाई को सैकड़ों समर्थक संसद मार्च के लिए जुटे. 20 जुलाई को हजारों लोग संसद की ओर मार्च करने के लिए इकट्ठा हुए.
- डिजिटल मुहिम: CJP ने 22 मिलियन से ज्यादा इंस्टाग्राम फॉलोअर्स जुटाए. 2.5 लाख से ज्यादा लोगों ने याचिकाओं पर हस्ताक्षर किए. 6.3 लाख से ज्यादा X पोस्ट और 8.3 मिलियन से ज्यादा इंटरैक्शन हुए.
- सियासी एकजुटता: कांग्रेस, आप, सपा, TMC, NCP और CPI(M) जैसे प्रमुख विपक्षी दल एकजुट होकर सामने आए. हालांकि, कांग्रेस का CJP के साथ गठबंधन को लेकर संशय भी था.
- सरकार पर दबाव: NEET पेपर लीक मामला राष्ट्रीय मुद्दा बन गया. 20 जुलाई को संसद मार्च निकाला गया, हालांकि पुलिस ने लाठीचार्ज किया.
- मांग में बदलाव: आंदोलन 'इस्तीफा' से 'जवाबदेही और संसद में चर्चा' की ओर बढ़ा. इसे कुछ लोग 'समझौता' और कुछ 'रणनीतिक कदम' मान रहे हैं.





















