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Sonam Wangchuk Hunger Strike: अन्ना हजारे ने कैसे खत्म किया था अपना अनशन, उनकी किन मांगों को UPA सरकार ने माना था?

Sonam Wangchuk Hunger Strike: सोनम वांगचुक की 22 दिनों से चल रही भूख हड़ताल ने अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन की याद ताजा कर दी है. चलिए जानें कि तत्कालीन सरकार ने उनकी किन मांगों को माना था.

Sonam Wangchuk Hunger Strike: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का दिल्ली के जंतर-मंतर के बाद सफदरजंग अस्पताल में भी अनशन जारी है, जिससे देश भर में हलचल तेज हो गई है. आज से संसद का मानसून सत्र भी शुरू हो चुका है. सत्र शुरू होने से पहले ही सोनम वांगचुक ने कहा था कि अगर आज सरकार उनकी तीन शर्तें मान लेती है तो वे आज अपना अनशन तोड़ सकते हैं. वांगचुक के इस कदम ने देश को सास 2011 के उस एतिहासिक दौर की याद दिला दी है जब समाजसेवी अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ा जनसैलाब खड़ा कर दिया था. आइए जानें कि अन्ना ने अपना अनशन कैसे खत्म किया था और उनकी किन मांगों को सरकार ने मान लिया था. 

जन लोकपाल कानून का संकल्प

साल 2011 में दिल्ली का रामलीला मैदान देश में भ्रष्टाचार विरोधी क्रांति का केंद्र बन गया था. उस समय अन्ना हजारे लगातार 12 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे थे. उस वक्त उनको पूरे देश से मिला अपार समर्थन देखकर तत्कालीन यूपीए सरकार को संसद में अन्ना की मांगों के आगे झुकना पड़ा था. सरकार ने एक विशेष चर्चा के बाद सर्वसम्मति से सेंस ऑफ द हाउस प्रस्ताव पारित किया था. इसके तहत जन लोकपाल विधेयक के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करने को लेकर सहमति बनी, जिसने भारतीय राजनीति में पारदर्शी शासन व्यवस्था की नई नींव रखी.

अन्ना की किन मांगों को यूपीए सरकार ने किया था स्वीकृत?

यूपीए सरकार ने अन्ना हजारे की तीन सबसे मुख्य मांगों को आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया था. पहली शर्त थी कि सरकारी दफ्तरों में आम जनता की शिकायतों का समय पर समाधान करने के लिए सिटिजन चार्टर लागू हो. दूसरी मांग के तहत भ्रष्टाचार नियंत्रण संस्था यानी लोकपाल के दायरे में निचले स्तर के सरकारी कर्मचारियों (ग्रुप सी और डी) को भी शामिल करना तय हुआ. तीसरी बड़ी मांग यह थी कि केंद्र की तर्ज पर ही देश के सभी राज्यों में लोकायुक्तों का पारदर्शी गठन किया जाए.

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अन्ना हजारे ने कैसे की थी अनशन की समाप्ति?

संसद में प्रस्ताव पारित होने और सरकार द्वारा लिखित आश्वासन मिलने के बाद अन्ना हजारे ने अपना 12 दिनों का लंबा अनशन खत्म करने का फैसला किया था. रामलीला मैदान में हजारों समर्थकों की मौजूदगी में अन्ना ने दो छोटी बच्चियों के हाथों से नारियल पानी और शहद का घोल पीकर भूख हड़ताल खत्म की थी. अन्ना के इस कदम के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल बन गया था. यह एतिहासिक घटना इस बात का प्रमाण है कि जन आंदोलन के जरिए लोकतांत्रिक सरकार को जनता की न्यायसंगत मांगें मानने पर मजबूर किया जा सकता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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