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क्या पायलट भी मारते हैं हवाई जहाज के शीशे पर कपड़ा, जानिए कैसे साफ होता है प्लेन का कांच?

विमान के शीशे साफ करने के लिए ग्राउंड स्टाफ खास लिक्विड का उपयोग करता है. विमान में बेहद मजबूत वाइपर, हाइड्रोफोबिक कोटिंग और हीटिंग सिस्टम होता है, जो पायलट को हर मौसम में साफ रास्ता दिखाते हैं.

विमान के शीशे साफ करने के लिए ग्राउंड स्टाफ खास लिक्विड का उपयोग करता है. विमान में बेहद मजबूत वाइपर, हाइड्रोफोबिक कोटिंग और हीटिंग सिस्टम होता है, जो पायलट को हर मौसम में साफ रास्ता दिखाते हैं.

जब कोई विमान 900 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरता है, तो उसकी विंडशील्ड पर धूल, कीड़े और बारिश की बूंदों का जमना एक बड़ी चुनौती होती है. पायलट के लिए साफ दिखना सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. अक्सर लोग सोचते हैं कि क्या प्लेन में भी कार की तरह साधारण वाइपर होते हैं या पायलट को खुद खिड़की खोलकर सफाई करनी पड़ती है? असलियत यह है कि विमान के शीशे साफ करने के पीछे एक हाई-टेक इंजीनियरिंग और ग्राउंड स्टाफ की कड़ी मेहनत छिपी होती है.

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हवाई जहाज के शीशों की सफाई का असली काम रनवे पर ही शुरू हो जाता है. मेंटेनेंस टीम एक विशेष प्रक्रिया का पालन करती है. इसके लिए साधारण साबुन का नहीं, बल्कि 'नॉन-एब्रेसिव' (बिना खरोंच वाला) लिक्विड और माइक्रोफाइबर कपड़ों का उपयोग किया जाता है.
हवाई जहाज के शीशों की सफाई का असली काम रनवे पर ही शुरू हो जाता है. मेंटेनेंस टीम एक विशेष प्रक्रिया का पालन करती है. इसके लिए साधारण साबुन का नहीं, बल्कि 'नॉन-एब्रेसिव' (बिना खरोंच वाला) लिक्विड और माइक्रोफाइबर कपड़ों का उपयोग किया जाता है.
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टीम का मुख्य लक्ष्य शीशे से तेल के दाग, पक्षियों के अवशेष और धूल को हटाना होता है. यदि ये दाग रह जाएं, तो लैंडिंग के समय रनवे की लाइटें 'ग्लेयर' पैदा कर सकती हैं, जो पायलट को अंधा कर सकती हैं.
टीम का मुख्य लक्ष्य शीशे से तेल के दाग, पक्षियों के अवशेष और धूल को हटाना होता है. यदि ये दाग रह जाएं, तो लैंडिंग के समय रनवे की लाइटें 'ग्लेयर' पैदा कर सकती हैं, जो पायलट को अंधा कर सकती हैं.
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ज्यादातर कमर्शियल विमानों में वाइपर लगे होते हैं. इनका डिजाइन कार के वाइपर जैसा ही दिखता है, लेकिन ये कहीं ज्यादा मजबूत होते हैं. कार के वाइपर जहां प्लास्टिक या हल्की धातु के होते हैं, वहीं प्लेन के वाइपर क्रोमियम-स्टील और सख्त रबड़ से बने होते हैं.
ज्यादातर कमर्शियल विमानों में वाइपर लगे होते हैं. इनका डिजाइन कार के वाइपर जैसा ही दिखता है, लेकिन ये कहीं ज्यादा मजबूत होते हैं. कार के वाइपर जहां प्लास्टिक या हल्की धातु के होते हैं, वहीं प्लेन के वाइपर क्रोमियम-स्टील और सख्त रबड़ से बने होते हैं.
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विमान में आमतौर पर दो स्वतंत्र वाइपर सिस्टम होते हैं- पायलट और को-पायलट के लिए अलग-अलग. इन्हें कॉकपिट से अलग-अलग गति (Low/High) पर चलाया जा सकता है.
विमान में आमतौर पर दो स्वतंत्र वाइपर सिस्टम होते हैं- पायलट और को-पायलट के लिए अलग-अलग. इन्हें कॉकपिट से अलग-अलग गति (Low/High) पर चलाया जा सकता है.
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जब विमान अपनी क्रूजिंग स्पीड (तेज रफ्तार) पर होता है, तो हवा का दबाव इतना अधिक होता है कि वह खुद ही पानी और गंदगी को शीशे से हटा देता है. 30,000 फीट की ऊंचाई पर हवा का घर्षण किसी भी चीज को शीशे पर टिकने नहीं देता है. इसलिए, ऊंचाई पर पायलटों को वाइपर चलाने की जरूरत बहुत कम पड़ती है.
जब विमान अपनी क्रूजिंग स्पीड (तेज रफ्तार) पर होता है, तो हवा का दबाव इतना अधिक होता है कि वह खुद ही पानी और गंदगी को शीशे से हटा देता है. 30,000 फीट की ऊंचाई पर हवा का घर्षण किसी भी चीज को शीशे पर टिकने नहीं देता है. इसलिए, ऊंचाई पर पायलटों को वाइपर चलाने की जरूरत बहुत कम पड़ती है.
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वाइपर का मुख्य उपयोग तब होता है जब विमान धीमी गति पर हो, यानी टेक-ऑफ या लैंडिंग के दौरान जब भारी बारिश हो रही हो. आधुनिक विमानों (जैसे बोइंग 787) में वाइपर की जगह या उनके साथ 'हाइड्रोफोबिक कोटिंग' का इस्तेमाल होता है. यह एक अदृश्य रासायनिक परत होती है जो पानी को शीशे पर फैलने से रोकती है.
वाइपर का मुख्य उपयोग तब होता है जब विमान धीमी गति पर हो, यानी टेक-ऑफ या लैंडिंग के दौरान जब भारी बारिश हो रही हो. आधुनिक विमानों (जैसे बोइंग 787) में वाइपर की जगह या उनके साथ 'हाइड्रोफोबिक कोटिंग' का इस्तेमाल होता है. यह एक अदृश्य रासायनिक परत होती है जो पानी को शीशे पर फैलने से रोकती है.
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जैसे ही बारिश की बूंद इस पर गिरती है, वह मोती बनकर हवा के झोंके के साथ पीछे की ओर भाग जाती है. इसके अलावा, पुराने जहाजों में एक 'रेन रिपेलेंट' बटन होता है, जिसे दबाने पर शीशे पर एक खास केमिकल स्प्रे होता है जो पानी को तुरंत हटा देता है.
जैसे ही बारिश की बूंद इस पर गिरती है, वह मोती बनकर हवा के झोंके के साथ पीछे की ओर भाग जाती है. इसके अलावा, पुराने जहाजों में एक 'रेन रिपेलेंट' बटन होता है, जिसे दबाने पर शीशे पर एक खास केमिकल स्प्रे होता है जो पानी को तुरंत हटा देता है.

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