देश के किस राज्य में सबसे कम हैं मुस्लिम, जानें यहां कौन से धर्म के लोग सबसे ज्यादा?
भारत एक ऐसा देश है जहां धर्मों का मेल एक अनूठी पहचान बनाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के कुछ राज्यों में एक मुस्लिम समुदाय की आबादी बेहद कम है. आइए जानें कि वहां किस धर्म के लोग ज्यादा हैं.

- सिक्किम में मुस्लिम आबादी लगभग 1-2%, बौद्ध-हिंदू बहुल राज्य.
- मिजोरम (1.35%), अरुणाचल (1.95%) में मुस्लिम आबादी कम.
- नगालैंड (2.47%), मेघालय (4.40%) में ईसाई और जनजातीय प्रभाव.
- मणिपुर (8.40%), त्रिपुरा (8-9%), हिमाचल (2.18%) में भी कम आबादी.
भारत एक विविधताओं वाला देश है जहां हर धर्म और समुदाय का अपना स्थान है. जनगणना के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश के अलग-अलग राज्यों में समुदायों का अनुपात भिन्न-भिन्न मिलता है. कुछ राज्य अपनी धार्मिक जनसांख्यिकी के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं, जहां किसी विशेष समुदाय की उपस्थिति काफी कम है. अगर हम साल 2011 की जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों को आधार मानें, तो पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में मुस्लिम समुदाय की आबादी का प्रतिशत बेहद कम है. यह समझना दिलचस्प है कि आखिर इन राज्यों में जनसांख्यिकीय ढांचा कैसा है और वहां किन धर्मों के लोगों का बाहुल्य है.
सबसे कम मुस्लिम आबादी वाला राज्य
भारत का सिक्किम राज्य उन क्षेत्रों में गिना जाता है जहां मुस्लिम समुदाय की आबादी सबसे कम है. यहां के आंकड़ों के मुताबिक, मुस्लिम धर्म के लोगों की संख्या कुल जनसंख्या के लगभग 1 से 2 प्रतिशत के आसपास ही सिमटी हुई है. सिक्किम की संस्कृति और परंपराओं में बौद्ध धर्म का गहरा प्रभाव दिखता है. यहां की अधिकांश जनसंख्या बौद्ध और हिंदू धर्म का पालन करती है. प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर यह राज्य अपनी धार्मिक विविधता और शांतिप्रिय वातावरण के लिए जाना जाता है, जहां मुख्य धारा से अलग अन्य धर्मों की उपस्थिति बहुत ही सीमित है.
मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश का जनसांख्यिकीय स्वरूप
पूर्वोत्तर के ही दो अन्य राज्य मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश भी न्यूनतम मुस्लिम आबादी वाले राज्यों की सूची में आते हैं. मिजोरम में मुस्लिम आबादी लगभग 1.35 प्रतिशत है, जो भारत के अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है. यहां की एक बड़ी आबादी ईसाई धर्म के अनुयायियों की है, जो राज्य के सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करती है. इसी तरह, अरुणाचल प्रदेश में भी मुस्लिम समुदाय की संख्या बहुत सीमित है, जो कुल आबादी का लगभग 1.95 प्रतिशत है. यहां की ज्यादातर जनसंख्या अपनी पारंपरिक आदिवासी मान्यताओं और बौद्ध धर्म के सिद्धांतों को मानती है.
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नगालैंड और मेघालय
नगालैंड की स्थिति भी काफी हद तक अन्य पूर्वोत्तर राज्यों जैसी ही है, जहां मुस्लिम समुदाय की आबादी 2.47 प्रतिशत के आसपास दर्ज की गई है. यहां की आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा ईसाई धर्म को मानता है. वहीं, मेघालय का जिक्र करें तो यहां मुस्लिम आबादी का प्रतिशत थोड़ा अधिक है, जो 4.40 प्रतिशत तक पहुंचता है. मेघालय मुख्य रूप से खासी और गारो जनजातियों का घर है, जिनकी अपनी विशिष्ट परंपराएं और मान्यताएं हैं. यहां ईसाई धर्म के साथ-साथ इन जनजातीय समुदायों की जीवनशैली राज्य की पहचान को निर्धारित करती है.
मणिपुर, त्रिपुरा और हिमाचल प्रदेश की स्थिति
मणिपुर में मुस्लिम समुदाय की उपस्थिति करीब 8.40 प्रतिशत है, जो पूर्वोत्तर के बाकी राज्यों के मुकाबले अधिक है लेकिन राष्ट्रीय औसत से काफी कम है. त्रिपुरा में भी मुस्लिम आबादी कुल जनसंख्या के अनुपात में लगभग 8 से 9 प्रतिशत के बीच है. यदि हम पूर्वोत्तर से बाहर निकलकर उत्तर भारत की बात करें, तो हिमाचल प्रदेश में भी मुस्लिम आबादी काफी कम है. यहां के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में मुस्लिम समुदाय की आबादी केवल 2.18 प्रतिशत है. हिमाचल में मुख्य रूप से हिंदू धर्म के लोगों का बाहुल्य है, जो यहां की पहाड़ी संस्कृति को एक पहचान देते हैं.
जनगणना के आंकड़े और सामाजीकरण की भूमिका
यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ये सभी आंकड़े 2011 की जनगणना पर आधारित हैं. भारत के किसी भी राज्य का जनसांख्यिकीय स्वरूप वहां के भौगोलिक इतिहास, जनजातीय प्रवासन और स्थानीय संस्कृति द्वारा तय होता है. पूर्वोत्तर के राज्यों में आदिवासी परंपराओं, बौद्ध धर्म और ईसाई धर्म की प्रधानता ने एक ऐसी संस्कृति को जन्म दिया है, जो यहां की जनसांख्यिकी को विशिष्ट बनाती है. इन राज्यों में मुस्लिम आबादी का कम होना किसी विशेष सामाजिक कारण के बजाय ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विकास का परिणाम है.
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Source: IOCL
























