'सबूत बहस नहीं करते, वो फैसला करते हैं, सिर्फ 22 मिनट में...', ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह पर भारतीय सेना की पाकिस्तान को चेतावनी
पहलगाम में लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटे TRF ने धर्म पूछकर 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी थी. इसके जवाब में भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया था, जिसमें आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया गया था.

ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ से कुछ दिन पहले भारतीय सेना ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया, जिसमें बताया गया है कि कैसे ऑपरेशन सिंदूर ने महज 22 मिनट में आतंकवादियों के ठिकानों को तबाह कर दिया. सेना ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'दृढ़ संकल्प. स्पष्टता. मिशन पर पूरा ध्यान. न्याय मिला - त्वरित और सटीक. सबूत बहस नहीं करते- वे फैसला करते हैं.'
यह पोस्ट भारतीय सेना की निर्णायक सैन्य कार्रवाई- ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ से कुछ ही दिन पहले शेयर की गई है. इस पोस्ट में एक तस्वीर भी शामिल थी, जिसके कैप्शन में लिखा था, '22 मिनट का घटनाक्रम और फिर उनकी कमान ध्वस्त हो गई.'
Resolve. Clarity. Mission Focus.
— ADG PI - INDIAN ARMY (@adgpi) April 27, 2026
Justice Served- Swift and Precise.
Evidence doesn't argue - It settles.#SindoorAnniversary #JusticeEndures#NationFirst pic.twitter.com/bSBWEgAjJX
सेना ने इससे पहले रविवार को भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा था कि 'सटीक लक्ष्य भेदना. आतंकवाद पर निशाना. स्थायी परिणाम.'
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इस पोस्ट के साथ '9 आतंकी ठिकाने तबाह' और 'भारत नहीं भूलता' शीर्षक वाली एक तस्वीर भी थी, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर के तहत किए गए हमलों के दौरान एक कमांड सेंटर को दर्शाया गया था. बता दें कि पहलगाम का जख्म और न्याय की हुंकार यह पूरा घटनाक्रम 22 अप्रैल 2025 की उस काली तारीख से जुड़ा है, जब पहलगाम में लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटे 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' ने धर्म पूछकर 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी थी. इस घाव को भारत भूला नहीं है.
सेना ने चेतावनी देते हुए कहा था कि जब इंसानियत की हदें पार की जाती हैं तो जवाब निर्णायक होता है. इस हमले के जवाब में, भारतीय सशस्त्र बलों ने 6 और 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया. इसके तहत पाकिस्तान और गुलाम कश्मीर में स्थित लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद के नौ आतंकी कैंपों को मिट्टी में मिला दिया गया था.
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यह ऑपरेशन केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का प्रमाण था. सेना ने अपने पोस्ट में 'ऑपरेशन महादेव' का भी जिक्र किया, जिसके तहत 93 दिनों तक दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाकर पहलगाम हमले के मुख्य दोषियों को ठिकाने लगाया गया था.























