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देश में कैसे काम करती है ईडी, जानिए कब और कैसे हुई थी इसकी शुरुआत

ईडी की टीम लगातार कार्रवाई और छापेमारी को लेकर चर्चा में रहती है.लेकिन आज हम आपको बताएंगे कि ईडी की शुरूआत कब और कैसे हुई थी. इसके अलावा ईडी के पास छापेमारी और गिरफ्तारी को लेकर क्या -क्या अधिकार हैं.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक बार फिर से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने समन भेजा है. जानकारी के मुताबिक अरविंद केजरीवाल ने ईडी के समन को फिर से नजरअंदाज कर दिया है. जिसके बाद इसको लेकर पूरे देशभर में सियासत शुरू हो गई है. लेकिन आज हम आपको बताएंगे कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का काम क्या होता है और इसकी शुरूआत कैसे हुई थी.

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)

भारत में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शुरुआत 1 मई 1956 को हुई थी. तब वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक अफेयर्स में विदेशी मुद्रा अधिनियम, 1947 (एफईआरए) से जुड़े मामलों को देखने के लिए एक प्रवर्तन इकाई बनाई गई थी. जिसका मुख्यालय दिल्ली में और कलकत्ता एवं मुंबई में दो ब्रांच थी. उस वक्त ईडी के डायरेक्टर लीगल सर्विस के अफसर हुआ करते थे. लेकिन एक साल बाद साल 1957 में प्रवर्तन इकाई का नाम बदलकर डायरेक्टोरेट ऑफ एनफोर्समेंट या एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट रखा दिया गया था और चेन्नई में एक और ब्रांच खोली गई थी. इसके बाद फिर साल 1960 में ईडी का प्रशासनिक कंट्रोल डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक अफेयर्स से डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू को दे दिया गया था. फिलहाल दिल्ली स्थित मुख्यालय के अलावा ईडी का मुंबई, चेन्नई, चंडीगढ़, कोलकाता और दिल्ली में कुल 5 क्षेत्रीय कार्यालय हैं. वहीं इसके 0 जोनल ऑफिस और 11 सब जोनल ऑफिस हैं.

ईडी का मुख्य काम

ईडी मुख्य तौर पर आर्थिक अपराध, मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी मुद्रा कानून के उल्लंघन से जुड़े मामलों को देखती है. बता दें कि ईडी जिन कानूनों के तहत काम करती है उनमें- फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट,धन सोधन निवारण अधिनियम 2002, भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम 2018 और विदेशी मुद्रा का संरक्षण और तस्करी गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम, 1974 शामिल हैं.

ईडी की शक्तियां

प्रवर्तन निदेशालय के पास धन सोधन निवारण अधिनियम 2002 (पीएमएलए), फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (एफसीएमए) जैसे कानून के तहत आने वाले मामलों में छापा मारने से लेकर, गिरफ्तारी और संपत्ति जब्त करने का अधिकार है. वहीं इसके अलावा यदि किसी थाने में 1 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की हेराफेरी की एफआईआर दर्ज होती है, तो पुलिस ईडी को इसकी जानकारी देती है. इसके बाद ईडी इसकी जांच शुरू कर सकती है. इसके अलावा ईडी खुद भी किसी मामले का संज्ञान लेकर भी जांच शुरू कर सकती है. ईडी के पास बगैर पूछताछ के भी संपत्ति जब्त करने का अधिकार है.

 

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