जंग के समय क्या होता है स्पेस एजेंसी का काम, जानिए पाकिस्तान पर स्ट्राइक के समय कैसे काम कर रही थी इसरो
ISRO Role In Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर को भारत ने सफल तरीके से पूरा किया है. इस दौरान सेना के साथ-साथ इसरो की भी अहम भूमिका रही है. चलिए इसके बारे में जानें.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पूरी दुनिया भारतीय सेना का पराक्रम देख चुकी है. पाकिस्तान भले ही घुटनों पर आ गया है, लेकिन उसकी नापाक हरकतें किसी से छिपी नहीं हैं. पाकिस्तान को घुटनों पर लाने का जितना काम भारतीय सेना और हमारे ताकतवर हथियारों ने किया है, उतना ही बराबर का योगदान ISRO का भी है. जब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत पाकिस्तान पर एक के बाद के बाद एक मिसाइल लॉन्च कर रहा था उस वक्त इसरो देश के लिए तीसरे नेत्र का काम कर रहा था. इसरो ने पर्दे के पीछे से महत्वपूर्णं भूमिका निभाई है.
पाकिस्तान के खिलाफ तीसरे नेत्र का काम कर रहा था इसरो
पाकिस्तान के आतंकी संगठनों पर सटीक निशाना लगाने के लिए इसरो ने अहम भूमिका निभाई है. इसके ही सैटेलाइट नेटवर्क इनपुट के जरिए भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान के सैन्य राडार सिस्टम को नष्ट किया है. इसी के जरिए पड़ोसी मुल्क के ड्रोन और मिसाइलों को नष्ट किया गया है. पर्दे के पीछे महत्वपूर्णं भूमिका निभाते हुए इसरो के 10 सैटेलाइट पाकिस्तान पर बराबर नजर रखे हुए थे. पाकिस्तान पर स्ट्राइक के समय इसरो के सैटेलाइट नेटवर्क ने आतंकियों के अड्डों की सटीक पहचान, पाक सेना के ठिकाने, हथियारों और सेना के मूवमेंट्स पर नजर, राडार स्टेशनों की जानकारी दी.
पाकिस्तान की सटीक मूवमेंट्स की जानकारी दे रहा था इसरो
भारत के 10 सैटेलाइट सिस्टम्स के जरिए पाकिस्तान को जवाब दिया गया. इस दौरान खुफिया जानकारी देना और सीमा पर होने वाली हर गतिविधि पर नजर रखना शामिल था. इस दौरान जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात में ड्रोन और भारी तोपखानों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही थी. इसरो के सर्विलांस उपग्रह सेनाओं को सटीक इन्फॉर्मेशन दे रहे थे. कॉर्टोसेट से 0.6 मीटर से 0.35 मीटर तक हाई रिजॉल्यूशन इमेज दे सकते हैं. इसी के जरिए पाक के आतंकी ठिकानों, लॉन्च पैड्स की सटीक लोकेशन और मूवमेंट्स की तस्वीरें मिल पाईं.
इसरो और सेना के जरिए सफल हुआ मिशन
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इकट्ठा की गी खुफिया जानकारी और उपग्रह से की गई निगरानी के जरिए ही सुरक्षा बल लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम हो पाए. अंतरिक्ष से इसरो की निगरानी और सेना के साथ क्षमता और तारतम्यता के जरिए ही तनाव पर नियंत्रण बना रहा और रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा किया जा सका.
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