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प्लेटफॉर्म पर खड़ी पैसेंजर ट्रेन का इंजन क्यों चलता रहता है, क्या इससे ईंधन बर्बाद नहीं होता या कुछ और है वजह?
प्लेटफॉर्म पर खड़ी पैसेंजर ट्रेन का इंजन चालू रहना लापरवाही नहीं, बल्कि सुरक्षा और तकनीक की जरूरत है. इंजन बंद करने से ईंधन बचने के बजाय कुछ और परेशानियां बढ़ सकती है.
स्टेशन पर ट्रेन खड़ी हो, यात्री उतर चुके हों, प्लेटफॉर्म शांत रहे, लेकिन इंजन की आवाज लगातार गूंजती रहे तो यह सीन अक्सर लोगों को हैरान कर देता है और मन में सवाल उठता है कि जब ट्रेन चल ही नहीं रही, तो इंजन बंद क्यों नहीं कर दिया जाता? क्या रेलवे को ईंधन की परवाह नहीं या इसके पीछे कोई मजबूरी छुपी है? असल वजह सिर्फ खर्च नहीं, बल्कि सुरक्षा और तकनीक से गहराई से जुड़ी है.
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अक्सर लोग सोचते हैं कि ट्रेन का इंजन कार या बस की तरह है, जिसे जब चाहें बंद कर दिया जाए, लेकिन रेलवे का लोकोमोटिव एक बेहद जटिल मशीन होता है. इसे चालू रखना कई बार बंद करने से ज्यादा सुरक्षित और किफायती साबित होता है. खासकर डीजल इंजन वाली ट्रेनों में यह फैसला सोच-समझकर लिया जाता है.
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डीजल लोकोमोटिव को पूरी क्षमता में आने के लिए समय चाहिए. इंजन बंद होने के बाद उसे दोबारा स्टार्ट करने में करीब 15 से 20 मिनट लग सकते हैं. इस दौरान काफी मात्रा में डीजल खर्च होता है. कई मामलों में जितना ईंधन स्टार्टिंग में लगता है, उतने में इंजन घंटों तक हल्की गति से चल सकता है. इसलिए छोटे स्टॉप पर इंजन बंद करना ईंधन बचत नहीं, बल्कि नुकसान बन जाता है.
Published at : 24 Jan 2026 08:26 AM (IST)
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