एक्सप्लोरर

यूजीसी रेग्युलेशन 2026- मोदी का मंडल और मंदिर दोनों वोट बैंक खतरे में!

आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने ‘यूजीसी रेगुलेशन 2026’ पर रोक लगा दी. सर्वोच्च अदालत का कहना है कि नियम बहुत साफ नहीं हैं. जब तक नये और स्पष्ट नियम नहीं आ जाते फिलहाल 2012 वाला नियम ही लागू रहेगा.

हम जैसे ओल्ड स्कूल तो माननीय न्यायमूर्ति की नीयत पर सवाल उठाने का साहस नहीं कर सकते. मगर इस आदेश पर पिछड़ा-दलित क्वार्टर से आवाज आयी कि चीफ जस्टिस ब्राह्मण हैं और बेंच के दूसरे जस्टिस बागची बंगाली सवर्ण हैं. इस स्टे ने उस वर्ग की आशंका को सही साबित किया. इक्विटी कमेटी का मुखिया अगर सवर्ण होगा तो वो दलित पिछड़ों के हित में क्या फैसला देगा.

फिलहाल जब तक स्टे लागू है 2012 के नियम ही लागू होंगे. यानि तब तक ओबीसी इसके दायरे से बाहर होंगे और शिकायत ग़लत पाए जाने पर शिकायत करने वाले के खिलाफ कार्रवाई होगी. 2026 के रेग्युलेशन में यही दो चीजें एकदम नयी थीं. फिलहाल मामला तारीख़ पर तारीख़ के अदालती चक्र में चला गया है तो समझिए लटक ही गया है. अदालत ने स्टे लगाते हुए क्या-क्या कहा ये अब सबको पता है, सवाल तो इसके पीछे की सियासत का है.

जिन्हें लगता है कि यूजीसी रेग्युलेशन-2026 के प्रावधान सरकार की सहमति के बगैर और लापरवाही से लागू हो गए, वो मुगालते में हैं. मोदी सरकार अल्पसंख्यक सवर्णों के मुकाबले बहुसंख्यक ओबीसी–दलित-आदिवासी वोट को लेकर ज्यादा चिंतित है. सवर्णों को तो वो अपना स्थायी वोट बैंक मान कर चल रही थी – जो जाएं तो जाएं कहां की मनस्थिति में हैं.

एक सच ये भी है कि जैसे सवर्णों में ब्राह्मण है उसी तरह ओबीसी में यादव हैं. इन्हें यूपी-बिहार में नियो रिच और पॉलिटिकली पावरफुल माना जाता है. अगर 2026 के रेगुलेशन में ओबीसी को नहीं शुमार किया गया होता तो शायद ये विरोध इतना इंटेंस नहीं होता. दलित तो मॉरली आज भी इतना दबा हुआ है कि बहुत सारी जगहों पर वो आवाज़ नहीं निकालता मगर यादव ऐसा करते हैं. कुर्मियों के बारे में मशहूर है कि वो निहुरे-निहुरे (झुके-झुके) ही ऊंट चुरा लेने की कला में माहिर हैं. यादवों की तरह लाउड नहीं हैं.

बहरहाल इस रेगुलेशन को लेकर सोशल मीडिया से सड़क तक जिस तरह पीएम मोदी का विरोध हुआ- ऐसा पहले नहीं देखा गया. अब तक मोदी ही रैलियों में खुद को सबसे बड़ा ओबीसी बताते थे, मगर इस बार तो हद पार हो गयी जब उन्हें ही उनकी जाति बताई जाने लगी, उन्हें घांची तेली कहा जाने लगा.

यूपी के गोंडा में एक संगठन ने मोदी तेरी कब्र खुदेगी जैसे अमंगलकारी जेएनयू टाइप नारे लगाए. एक जगह तो बीच चौराहे पर मोदी और अमित शाह के पुतलों की जूते से पिटाई की तस्वीर भी सामने आयी.

मत भूलिए कि ये वही यूपी है जहां से वीपी सिंह के मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करने पर तीखा विरोध शुरु हुआ. पुलिस की गोली से पहली शहादत भी ब्राह्मण बहुल पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुई. मरने वाला छात्र भी त्रिपाठी ब्राह्मण ही था. दिल्ली में गोस्वामी ने तो आत्मदाह की कोशिश बहुत बाद में की. जिस शख्स के लिए राजा नहीं फक़ीर है का नारा लगा था, वो राजा ओबीसी आरक्षण का खलनायक बन गया था. राजा मांडा यानि वीपी सिंह को इसका कोई फायदा हुआ हो या न हुआ हो, यूपी और बिहार में इसने दो मंडलवादी धुरंधर पैदा किए – मुलायम सिंह यादव और लालू यादव. जबकि मंडल का ‘किक बैक’ मिला बीजेपी को.

आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या की पहली रथयात्रा मंडल के काउंटर में ही निकाली थी. भले ही 1986 के पालनपुर, हिमाचल के अधिवेशन में हिंदुत्व और राममंदिर बीजेपी के एजेंडे पर आ चुके थे, मगर जो मुहिम बाद में शुरु होनी थी उसे मंडल के चलते ‘प्री-पोन’ करना पड़ा. दरअसल मोदी से पहले बीजेपी कभी भी खुलकर जाति की राजनीति नहीं करती थी. आज भी हिंदुत्व का ध्रुवीकरण ही बीजेपी को फायदा पहुंचाता है, और जातियों की गोलबंदी उसे हरा देती है. क्योंकि आखिर-आखिर वो सवर्णों की पार्टी ही मानी जाती है. लिहाज़ा मंडल विरोध में सामाजिक धरातल पर जो हो रहा था बीजेपी वो देख रही थी. ओबीसी को 26 फीसदी आरक्षण का हिंसक और आत्मघाती विरोध कर रहे सवर्णों की वजह से जो काउंटर पोलराइजेशन हो रहा था, बीजेपी उसे देख कर चिंता में थी.

मंडल की आग तो ठंढी हो गयी मगर ओबीसी आज भी पूरी तरह बीजेपी के हाथ नहीं आया. यादव तो खैर पूरी तरह लालू- मुलायम के हो गए. दोनों राज्यों में मुस्लिम-यादव का एमवाई समीकरण बना. यादवों के बाद दूसरे नंबर के ओबीसी कुर्मी भी उनके साथ ही गए, लेकिन 2014 आते-आते चाणक्य अमित शाह ने कुर्मियों को यादवों से अलगाने में कामयाबी हासिल की - खासतौर पर यूपी में. मगर बिहार में नीतीश को साधने में उन्हें वक्त लगा.

एक सवाल ये भी है कि क्या सरकार ने खुद ही मंडल और कमंडल दोनों के वोटों को खतरे में डाल दिया है.

क्योंकि ये भी एक संयोग है कि जब मंडलवाद का भूत मंडरा रहा होता है, मंदिरवादी राजनीति का साया भी उसी वक्त गहराने लगता है. काशी में ऐतिहासिक मणिकर्णिका घाट पर तोड़-फोड़ पर बहस चल ही रही थी, माघ मेले में पालकी से स्नान के लिए जा रहे शंकराचार्य को लाठी के दम पर रोकने का विरोध हो रहा था. उसी वक्त यूजीसी रेग्युलेशन का जिन्न बाहर आ गया. मणिकर्णिका और शंकराचार्य के मसले पर तो सरकार की ओर से बोलने वाले बहुतेरे थे. जब संकट मोचन के महंत विश्वंभर नाथ मिश्र ने डबडबायी आंखों से घाट पर आकर कहा कि मणिकर्णिका गंगा से पहले का तीर्थ है, तो सरकार समर्थक पंडितों ने लेख लिख डाले कि मणिकर्णिका का ऐसा कोई महत्व ही नहीं. वो भी एक और श्मशानघाट है.

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को तो फर्जी ठहराने वाले ब्राह्मणों की कतार लग गयी जो उन्हें बीजेपी विरोधी और अखिलेश – कांग्रेस समर्थक बताने में तमाम हदें पार कर रहे थे.

मगर, यूजीसी रेगुलेशन 2026 का मसला सीधे सवर्ण छात्रों के भविष्य से जुड़ रहा था तो वहां किसी तरह की दो फाड़ नहीं हुई. सरकार के सूचना तंत्र ने जब हालात की गंभीरता बयान की तो होश फाख्ता हो गए. हालात बिगड़ने से बचाने के लिए बेताल फिर लौट कर उसी डाल पर आया.

राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र जैसे ब्राह्मण नेता खोज कर बाहर निकाले गए जिन्होंने रेग्युलेशन के खिलाफ़ बयान दिया. दबदबे वाले ठाकुर बृज भूषण शरण सिंह ने भी विरोध में बयान दिया. जबकि उनके बेटे करण भूषण रेग्युलेशन वाली संसदीय समिति में थे. हालांकि कोशिश संसदीय समिति के अद्धयक्ष कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के सिर ठीकरा फोड़ने की भी हुई. मगर दिग्गी ने साफ कर दिया कि नियम बनाने में संसदीय समिति का कोई रोल था ही नहीं, हमने सिर्फ सिफारिशें दी थीं. रेग्युलेशन का प्रारुप तो यूजीसी की कमेटी ने ही बनाया.

विरोध की सुगबुगाहट पार्टी के भीतर भी थी, अब सरकार खुद तो पीछे हट नहीं सकती थी और अदालत ही एक रास्ता था जो अख्तियार किया गया. मगर एक बात 100 फीसदी सच है कि इस रेग्युलेशन ने सवर्णों का संशय बढ़ाया है, ओबीसी तो पहले ही इसे लेकर आश्वस्त नहीं था. लिहाजा इसका असर आगे क्या होता है देखने वाली बात होगी.

पुनश्च: इस बीच एक मजेदार चीज देखने को मिली. किसी सवर्ण ने सोशल मीडिया पर लिखा ब्राह्मण, ठाकुर और पठान यूजीसी बिल के विरोध में एक साथ. इस पर किसी मुसलमान की त्वरित टिप्पणी आयी - अभी हम कागज़ खोजने में लगे हैं आप अपना देख लो. किसी शख्स ने दोनों को मिला कर मजाहिया मीम बना दिया.

डिस्क्लेमर:- यह लेखक के निजी विचार हैं. 

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h

टॉप हेडलाइंस

ईरानी डेलीगेशन को मारना चाहता है इजरायल? NYT की रिपोर्ट पर आई तेल अबीब की प्रतिक्रिया
ईरानी डेलीगेशन को मारना चाहता है इजरायल? NYT की रिपोर्ट पर आई तेल अबीब की प्रतिक्रिया
यूपी में चुनावी बिगुल फूंकेंगे चिराग पासवान, विपक्ष के इस खास नैरेटिव को बनाएंगे निशाना
यूपी में चुनावी बिगुल फूंकेंगे चिराग पासवान, विपक्ष के इस खास नैरेटिव को बनाएंगे निशाना
Jodhpur Airport: PM नरेंद्र मोदी ने जोधपुर एयरपोर्ट को दी बड़ी सौगात, 480 करोड़  के नए टर्मिनल का किया उद्घाटन
PM मोदी ने जोधपुर एयरपोर्ट को दी बड़ी सौगात, 480 करोड़ के नए टर्मिनल का किया उद्घाटन
Satluj Review: Diljit Dosanjh की ये फिल्म आपका दिल चीर देगी, पंजाब का दर्द आपको अंदर तक परेशान करेगा
Satluj Review: Diljit Dosanjh की ये फिल्म आपका दिल चीर देगी, पंजाब का दर्द आपको अंदर तक परेशान करेगा

वीडियोज

2025 New Yezdi Scrambler Review | पहले से कितनी बेहतर हुई? #scrambler #yezdi #autolive
Renault Duster vs Volkswagen Taigun -Which One Is More Fun to Drive? #duster  #taigun #autolive
Ketan Murder Case : मंगेतर Siya Goyal का सबसे बड़ा झूठ पकड़ा गया || Chetan Chaudhary | ABP Report
Bollywood News: 5 जुलाई को गौरी स्प्रैट संग शादी करेंगे आमिर खान, खास होगी नई शुरुआत (03.07.26)
Chitra Tripathi : चढ़ावा चोरी में राम मंदिर ट्रस्ट पर 'जीरो ट्रस्ट'! | Champat Rai | SIT

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
ईरानी डेलीगेशन को मारना चाहता है इजरायल? NYT की रिपोर्ट पर आई तेल अबीब की प्रतिक्रिया
ईरानी डेलीगेशन को मारना चाहता है इजरायल? NYT की रिपोर्ट पर आई तेल अबीब की प्रतिक्रिया
यूपी में चुनावी बिगुल फूंकेंगे चिराग पासवान, विपक्ष के इस खास नैरेटिव को बनाएंगे निशाना
यूपी में चुनावी बिगुल फूंकेंगे चिराग पासवान, विपक्ष के इस खास नैरेटिव को बनाएंगे निशाना
Jodhpur Airport: PM नरेंद्र मोदी ने जोधपुर एयरपोर्ट को दी बड़ी सौगात, 480 करोड़  के नए टर्मिनल का किया उद्घाटन
PM मोदी ने जोधपुर एयरपोर्ट को दी बड़ी सौगात, 480 करोड़ के नए टर्मिनल का किया उद्घाटन
Satluj Review: Diljit Dosanjh की ये फिल्म आपका दिल चीर देगी, पंजाब का दर्द आपको अंदर तक परेशान करेगा
Satluj Review: Diljit Dosanjh की ये फिल्म आपका दिल चीर देगी, पंजाब का दर्द आपको अंदर तक परेशान करेगा
वैभव सूर्यवंशी के ‘New Chapter’ स्टोरी से मची हलचल, डेब्यू का इशारा या नया सरप्राइज?
वैभव सूर्यवंशी के ‘New Chapter’ स्टोरी से मची हलचल, डेब्यू का इशारा या नया सरप्राइज?
बलूचिस्तान में सुसाइड अटैक, ग्वादर में मार गिराए पाकिस्तान पैरामिलिट्री के 30 जवान, BLA का बड़ा दावा
बलूचिस्तान में सुसाइड अटैक, ग्वादर में मार गिराए PAK पैरामिलिट्री के 30 जवान, BLA का बड़ा दावा
यूपी में अब 3 रुपये प्रति यूनिट में मिलेगी बिजली, इन लोगों को योगी सरकार देगी सब्सिडी
यूपी में अब 3 रुपये प्रति यूनिट में मिलेगी बिजली, इन लोगों को योगी सरकार देगी सब्सिडी
क्या Solar Power Bank सिर्फ दिखावा है? खरीदने से पहले जान लें ये चौंकाने वाला सच
क्या Solar Power Bank सिर्फ दिखावा है? खरीदने से पहले जान लें ये चौंकाने वाला सच
Embed widget