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इंसानियत को तबाह कर सकते हैं ये सबसे खतरनाक हथियार, जंग में इनके इस्तेमाल पर है पाबंदी

Prohibited Weapons In War: युद्ध केवल गोलियों और मिसाइलों का खेल नहीं है, बल्कि कुछ ऐसे हथियार भी हैं जो पूरी इंसानियत को मिटाने की ताकत रखते हैं. आइए उन खतरनाक हथियारों के बारे में जानें.

Prohibited Weapons In War: युद्ध केवल गोलियों और मिसाइलों का खेल नहीं है, बल्कि कुछ ऐसे हथियार भी हैं जो पूरी इंसानियत को मिटाने की ताकत रखते हैं. आइए उन खतरनाक हथियारों के बारे में जानें.

जंग की विभीषिका सिर्फ धमाकों तक सीमित नहीं होती, असली खौफ उन हथियारों में छिपा है जो दिखाई नहीं देते लेकिन पीढ़ियों को अपाहिज बना देते हैं. बंदूक और टैंकों से परे, कुछ ऐसे प्रतिबंधित हथियार हैं, जिनका इस्तेमाल युद्ध के मैदान को नरक में बदल सकता है. ये हथियार न केवल शरीर को छलनी करते हैं, बल्कि हवा, पानी और मिट्टी में जहर घोलकर जीवन का नामोनिशान मिटा देते हैं. आइए जानते हैं उन सबसे खतरनाक हथियारों के बारे में, जिनके इस्तेमाल पर दुनिया भर में सख्त पाबंदी है.

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जब भी युद्ध की बात आती है, तो हमारे दिमाग में टैंक और लड़ाकू विमानों की तस्वीर उभरती है. लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा भयावह है. युद्ध में इस्तेमाल होने वाले कुछ हथियार इतने घातक होते हैं कि वे सिर्फ सैनिकों को ही नहीं, बल्कि आने वाली नस्लों को भी तबाह कर देते हैं.
जब भी युद्ध की बात आती है, तो हमारे दिमाग में टैंक और लड़ाकू विमानों की तस्वीर उभरती है. लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा भयावह है. युद्ध में इस्तेमाल होने वाले कुछ हथियार इतने घातक होते हैं कि वे सिर्फ सैनिकों को ही नहीं, बल्कि आने वाली नस्लों को भी तबाह कर देते हैं.
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ये हथियार अचानक हमला करने के बजाय धीरे-धीरे तड़पाकर मारने की क्षमता रखते हैं. यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय संधियों के तहत इनके इस्तेमाल को अपराध माना गया है. जैविक हथियार दुनिया के सबसे कातिल हथियारों में गिने जाते हैं, क्योंकि ये आंखों से दिखाई नहीं देते. इनमें खतरनाक वायरस और बैक्टीरिया जैसे सूक्ष्मजीवों का इस्तेमाल किया जाता है.
ये हथियार अचानक हमला करने के बजाय धीरे-धीरे तड़पाकर मारने की क्षमता रखते हैं. यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय संधियों के तहत इनके इस्तेमाल को अपराध माना गया है. जैविक हथियार दुनिया के सबसे कातिल हथियारों में गिने जाते हैं, क्योंकि ये आंखों से दिखाई नहीं देते. इनमें खतरनाक वायरस और बैक्टीरिया जैसे सूक्ष्मजीवों का इस्तेमाल किया जाता है.
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एंथ्रेक्स, प्लेग और बोटुलिज्म जैसी जानलेवा बीमारियां फैलाने के लिए इन हथियारों को डिजाइन किया जाता है. एक छोटी सी मात्रा भी हवा या पानी के जरिए लाखों लोगों को संक्रमित कर सकती है. इनकी मारक क्षमता इतनी अधिक है कि ये पूरी की पूरी आबादी को बिना किसी धमाके के खत्म कर सकते हैं.
एंथ्रेक्स, प्लेग और बोटुलिज्म जैसी जानलेवा बीमारियां फैलाने के लिए इन हथियारों को डिजाइन किया जाता है. एक छोटी सी मात्रा भी हवा या पानी के जरिए लाखों लोगों को संक्रमित कर सकती है. इनकी मारक क्षमता इतनी अधिक है कि ये पूरी की पूरी आबादी को बिना किसी धमाके के खत्म कर सकते हैं.
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केमिकल वेपंस या रासायनिक हथियार जहरीले रसायनों का मिश्रण होते हैं. इन्हें गैस या धुएं के रूप में छोड़ा जाता है, जो सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करते ही मौत का तांडव शुरू कर देते हैं. इन गैसों के संपर्क में आते ही आंखों में तेज जलन, दम घुटना और त्वचा पर भयानक छाले पड़ना शुरू हो जाते हैं. कुछ रसायन तो इतने प्रभावी होते हैं कि वे सीधे नर्वस सिस्टम पर हमला कर इंसान को मिनटों में मौत की नींद सुला देते हैं.
केमिकल वेपंस या रासायनिक हथियार जहरीले रसायनों का मिश्रण होते हैं. इन्हें गैस या धुएं के रूप में छोड़ा जाता है, जो सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करते ही मौत का तांडव शुरू कर देते हैं. इन गैसों के संपर्क में आते ही आंखों में तेज जलन, दम घुटना और त्वचा पर भयानक छाले पड़ना शुरू हो जाते हैं. कुछ रसायन तो इतने प्रभावी होते हैं कि वे सीधे नर्वस सिस्टम पर हमला कर इंसान को मिनटों में मौत की नींद सुला देते हैं.
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लैंडमाइन एक ऐसा हथियार है जिसे धोखेबाज मौत कहा जा सकता है. ये जमीन के अंदर दबे छोटे बम होते हैं, जो किसी के पैर रखने या गाड़ी गुजरने का इंतजार करते हैं. इनका सबसे बुरा पहलू यह है कि युद्ध खत्म होने के बरसों बाद भी ये जमीन में सक्रिय रहते हैं और निर्दोष ग्रामीणों या बच्चों को अपना शिकार बनाते रहते हैं. यही वजह है कि मानवीय आधार पर लैंडमाइन्स के बिछाने पर दुनिया के ज्यादातर देशों ने रोक लगा दी है.
लैंडमाइन एक ऐसा हथियार है जिसे धोखेबाज मौत कहा जा सकता है. ये जमीन के अंदर दबे छोटे बम होते हैं, जो किसी के पैर रखने या गाड़ी गुजरने का इंतजार करते हैं. इनका सबसे बुरा पहलू यह है कि युद्ध खत्म होने के बरसों बाद भी ये जमीन में सक्रिय रहते हैं और निर्दोष ग्रामीणों या बच्चों को अपना शिकार बनाते रहते हैं. यही वजह है कि मानवीय आधार पर लैंडमाइन्स के बिछाने पर दुनिया के ज्यादातर देशों ने रोक लगा दी है.
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क्लस्टर बम असल में एक बड़ा कंटेनर होता है जिसके भीतर सैकड़ों छोटे-छोटे बम भरे होते हैं. जब इसे आसमान से गिराया जाता है, तो यह हवा में ही फटकर छोटे बमों को एक बड़े इलाके में बिखेर देता है. इनमें से कई छोटे बम तुरंत नहीं फटते और जमीन पर मिन्नी माइन्स की तरह पड़े रहते हैं. ये बाद में आम नागरिकों के लिए मौत का जाल बन जाते हैं. इसकी व्यापक तबाही को देखते हुए इसे प्रतिबंधित हथियारों की श्रेणी में रखा गया है.
क्लस्टर बम असल में एक बड़ा कंटेनर होता है जिसके भीतर सैकड़ों छोटे-छोटे बम भरे होते हैं. जब इसे आसमान से गिराया जाता है, तो यह हवा में ही फटकर छोटे बमों को एक बड़े इलाके में बिखेर देता है. इनमें से कई छोटे बम तुरंत नहीं फटते और जमीन पर मिन्नी माइन्स की तरह पड़े रहते हैं. ये बाद में आम नागरिकों के लिए मौत का जाल बन जाते हैं. इसकी व्यापक तबाही को देखते हुए इसे प्रतिबंधित हथियारों की श्रेणी में रखा गया है.
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सफेद फास्फोरस एक ऐसा रासायनिक पदार्थ है जो हवा के संपर्क में आते ही खुद-ब-खुद जलने लगता है. इसकी आग इतनी तेज और जिद्दी होती है कि इसे बुझाना लगभग नामुमकिन होता है. अगर यह इंसान की त्वचा पर गिर जाए, तो यह हड्डियों तक को जला डालता है. इसके अलावा 'डर्टी बम' भी एक बड़ा खतरा हैं. ये साधारण धमाके के साथ रेडियोएक्टिव धूल फैलाते हैं, जिससे कैंसर जैसी लाइलाज बीमारियां और जन्मजात विकलांगता का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
सफेद फास्फोरस एक ऐसा रासायनिक पदार्थ है जो हवा के संपर्क में आते ही खुद-ब-खुद जलने लगता है. इसकी आग इतनी तेज और जिद्दी होती है कि इसे बुझाना लगभग नामुमकिन होता है. अगर यह इंसान की त्वचा पर गिर जाए, तो यह हड्डियों तक को जला डालता है. इसके अलावा 'डर्टी बम' भी एक बड़ा खतरा हैं. ये साधारण धमाके के साथ रेडियोएक्टिव धूल फैलाते हैं, जिससे कैंसर जैसी लाइलाज बीमारियां और जन्मजात विकलांगता का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
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वैक्यूम बम को 'थर्मोबैरिक हथियार' भी कहा जाता है और यह किसी भी साधारण बम से कहीं ज्यादा खतरनाक है. यह धमाके से पहले हवा में एक खास ईंधन का बादल छोड़ता है और फिर उसमें विस्फोट करता है. यह धमाका आसपास की सारी ऑक्सीजन सोख लेता है और एक जबरदस्त दबाव पैदा करता है. इससे इंसानों के आंतरिक अंग फट जाते हैं और सांस लेना असंभव हो जाता है. यह हथियार बंद बंकरों और गुफाओं में छिपे लोगों के लिए काल साबित होता है.
वैक्यूम बम को 'थर्मोबैरिक हथियार' भी कहा जाता है और यह किसी भी साधारण बम से कहीं ज्यादा खतरनाक है. यह धमाके से पहले हवा में एक खास ईंधन का बादल छोड़ता है और फिर उसमें विस्फोट करता है. यह धमाका आसपास की सारी ऑक्सीजन सोख लेता है और एक जबरदस्त दबाव पैदा करता है. इससे इंसानों के आंतरिक अंग फट जाते हैं और सांस लेना असंभव हो जाता है. यह हथियार बंद बंकरों और गुफाओं में छिपे लोगों के लिए काल साबित होता है.

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