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प्रशांत किशोर के चेले ने बचाया चंद्रबाबू नायडू का सियासी करियर! अरविंद केजरीवाल के साथ भी कर चुके हैं काम
आंध्र प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ हुए थे. चंद्रबाबू नायडू ने इससे पहले अपील की थी कि लोग या तो उन्हें सत्ता में लाएं या वह पॉलिटिक्स से संन्यास ले लें.
जाने-माने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के एक चेले (शिष्य) ने आंध्र प्रदेश के दिग्गज नेता, पूर्व सीएम और चंद्रबाबू नायडू तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) चीफ एन. चंद्रबाबू नायडू का सियासी करियर बचाया है.
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आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू के दल को 175 में से 135 सीटें मिली हैं, जबकि 2019 के चुनावों में टीडीपी महज 23 सीटों पर सिमट गई थी. राज्य में पार्टी के कमबैक के लिए सीनियर नेता की सराहना की जा रही है.
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हालांकि, आंध्र प्रदेश में असल किंगमेकर कोई और है. असल बात यह है कि इलेक्शन स्ट्रैटेजिस्ट रॉबिन शर्मा ने इस बार के चुनावी समर में टीडीपी के नाटकीय बदलाव की पटकथा लिखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
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रॉबिन शर्मा के नेतृत्व वाली शो टाइम कंसल्टेंसी (एसटीसी) ने जब आंध्र प्रदेश में टीडीपी की गिरती साख को फिर पटरी पर लाने का काम संभाला था तो उनके आलोचकों ने इसका बुरी तरह से मजाक उड़ाया था.
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वैसे, चुनावी परिणामों ने न सिर्फ आलोचकों के मुंह बंद कर दिए बल्कि वाईएस जगन मोहन रेड्डी खेमे को भी बड़ा झटका दिया. जगन के खेमे की रणनीति प्रशांत किशोर के एक और शिष्य ऋषि राज सिंह ने बनाई थी.
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रॉबिन शर्मा के नेतृत्व वाली एसटीसी ने टीडीपी के लिए जनता के साथ 'नए जुड़ाव' विकसित करने के लिए कई अभियान चलाए. अहम अभियानों में इधेम खरमा मन राष्ट्रिकी, सुपर सिक्स और युवा गलाम नामक यात्रा रही.
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हालिया चुनावी जीत रॉबिन शर्मा की एसटीसी की ओर से हासिल की गई पहली विजय नहीं है, जो प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली आई-पीएसी से अलग होने के बाद बनी है.
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रॉबिन शर्मा की टीम ने पंजाब चुनाव (2022) में AAP के साथ काम किया और 'अभिनव अभियान' चलाया. नतीजतन राज्य में नौसिखिया पार्टी को ऐतिहासिक जीत मिली, जबकि दिग्गजों को धूल चाटनी पड़ी थी.
Published at : 19 Jun 2024 11:33 AM (IST)
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