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Highway Vs Expressway: हाईवे और एक्सप्रेसवे में क्या होता है अंतर, कैसे तय होता है इनका पैमाना?

Highway Vs Expressway: लंबी दूरी की यात्रा के वक्त अक्सर हाईवे और एक्सप्रेसवे जैसे शब्द सुनने को मिलते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दोनों में क्या फर्क होता है? आइए जानते है इसके बारे में

Highway Vs Expressway: लंबी दूरी की यात्रा के वक्त अक्सर हाईवे और एक्सप्रेसवे जैसे शब्द सुनने को मिलते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दोनों में क्या फर्क होता है? आइए जानते है इसके बारे में

जब भी हम लंबी दूरी की यात्रा पर निकलते हैं, तो रास्ते में “हाईवे” और “एक्सप्रेसवे” जैसे शब्द बार-बार सुनने को मिलते हैं. अक्सर लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन सच यह है कि इन दोनों सड़कों के बीच बड़ा अंतर होता है, इनके नियम और बनावट दोनों ही अलग-अलग होती है. ऐसे में अगर आपसे पूछा जाए कि आखिर हाईवे और एक्सप्रेसवे में फर्क क्या है, तो शायद आप भी सोच में पड़ जाएं. वही इनका सही अंतर और नियमों की जानकारी न हो, तो सफर के दौरान कई बार दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ये दोनों कैसे अलग हैं और इनका पैमाना कैसे तय होता है.

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सबसे पहले बात करते हैं नेशनल हाईवे की. नेशनल हाईवे वे सड़कें होती हैं जो देश के अलग-अलग राज्यों, शहरों और महत्वपूर्ण जगहों को आपस में जोड़ती हैं. इनका मुख्य काम लंबी दूरी की यात्रा और व्यापार को आसान बनाना होता है. इन सड़कों पर कई जगह से छोटी सड़कें जुड़ती हैं, चौराहे होते हैं और ट्रैफिक का आना जाना बना रहता है. इसलिए यहां गाड़ी की गति थोड़ी सीमित रहती है और आमतौर पर 100 किमी प्रति घंटा के आसपास स्पीड तय की जाती है.
सबसे पहले बात करते हैं नेशनल हाईवे की. नेशनल हाईवे वे सड़कें होती हैं जो देश के अलग-अलग राज्यों, शहरों और महत्वपूर्ण जगहों को आपस में जोड़ती हैं. इनका मुख्य काम लंबी दूरी की यात्रा और व्यापार को आसान बनाना होता है. इन सड़कों पर कई जगह से छोटी सड़कें जुड़ती हैं, चौराहे होते हैं और ट्रैफिक का आना जाना बना रहता है. इसलिए यहां गाड़ी की गति थोड़ी सीमित रहती है और आमतौर पर 100 किमी प्रति घंटा के आसपास स्पीड तय की जाती है.
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दूसरी तरफ एक्सप्रेसवे को हाईवे का एडवांस और बेहतर रूप माना जाता है. ये पूरी तरह से कंट्रोल्ड एक्सेस सड़कें होती हैं, यानी इनमें हर जगह से एंट्री और एग्जिट नहीं होता. गाड़ी केवल तय इंटरचेंज या रैंप से ही अंदर या बाहर जा सकती है. इसी वजह से यहां ट्रैफिक बिना रुकावट के चलता है और यात्रा ज्यादा तेज और सुरक्षित होती है. एक्सप्रेसवे को खासतौर पर हाई स्पीड के लिए डिजाइन किया जाता है और यहां गति सीमा लगभग 120 किमी प्रति घंटा तक हो सकती है.
दूसरी तरफ एक्सप्रेसवे को हाईवे का एडवांस और बेहतर रूप माना जाता है. ये पूरी तरह से कंट्रोल्ड एक्सेस सड़कें होती हैं, यानी इनमें हर जगह से एंट्री और एग्जिट नहीं होता. गाड़ी केवल तय इंटरचेंज या रैंप से ही अंदर या बाहर जा सकती है. इसी वजह से यहां ट्रैफिक बिना रुकावट के चलता है और यात्रा ज्यादा तेज और सुरक्षित होती है. एक्सप्रेसवे को खासतौर पर हाई स्पीड के लिए डिजाइन किया जाता है और यहां गति सीमा लगभग 120 किमी प्रति घंटा तक हो सकती है.
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टोल टैक्स के मामले में भी दोनों में कुछ अंतर देखने को मिलता है. हाईवे और एक्सप्रेसवे दोनों पर टोल लिया जाता है, लेकिन यह दूरी, सड़क की चौड़ाई और सुविधाओं पर निर्भर करता है. भारत में आम तौर पर टोल एक निश्चित दूरी के हिसाब से तय किया जाता है और हर टोल प्लाजा पर अलग अलग शुल्क हो सकता है.
टोल टैक्स के मामले में भी दोनों में कुछ अंतर देखने को मिलता है. हाईवे और एक्सप्रेसवे दोनों पर टोल लिया जाता है, लेकिन यह दूरी, सड़क की चौड़ाई और सुविधाओं पर निर्भर करता है. भारत में आम तौर पर टोल एक निश्चित दूरी के हिसाब से तय किया जाता है और हर टोल प्लाजा पर अलग अलग शुल्क हो सकता है.
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अगर बात करें हाईवे और एक्सप्रेसवे के नियम की तो, वे  काफी हद तक अलग होते हैं, क्योंकि दोनों सड़कों का डिजाइन और इस्तेमाल अलग तरीके से किया जाता है. सबसे बड़ा फर्क एंट्री और एग्जिट के नियम में होता है. हाईवे पर आप कई जगह से सड़क पर चढ़ या उतर सकते हैं, जैसे गांव के रास्ते, कट या चौराहे. लेकिन एक्सप्रेसवे पर ऐसा नहीं होता. वहां सिर्फ तय किए गए इंटरचेंज या एग्जिट पॉइंट से ही गाड़ी अंदर या बाहर जा सकती है. साथ ही वाहनों के नियम भी अलग होते हैं. हाईवे पर लगभग हर तरह के वाहन चल सकते हैं, जैसे बाइक, ट्रैक्टर, ऑटो आदि. लेकिन एक्सप्रेसवे पर कई बार धीमी गति वाले वाहन, जैसे साइकिल, ट्रैक्टर या कुछ दोपहिया वाहन, जाने की अनुमति नहीं होती.
अगर बात करें हाईवे और एक्सप्रेसवे के नियम की तो, वे काफी हद तक अलग होते हैं, क्योंकि दोनों सड़कों का डिजाइन और इस्तेमाल अलग तरीके से किया जाता है. सबसे बड़ा फर्क एंट्री और एग्जिट के नियम में होता है. हाईवे पर आप कई जगह से सड़क पर चढ़ या उतर सकते हैं, जैसे गांव के रास्ते, कट या चौराहे. लेकिन एक्सप्रेसवे पर ऐसा नहीं होता. वहां सिर्फ तय किए गए इंटरचेंज या एग्जिट पॉइंट से ही गाड़ी अंदर या बाहर जा सकती है. साथ ही वाहनों के नियम भी अलग होते हैं. हाईवे पर लगभग हर तरह के वाहन चल सकते हैं, जैसे बाइक, ट्रैक्टर, ऑटो आदि. लेकिन एक्सप्रेसवे पर कई बार धीमी गति वाले वाहन, जैसे साइकिल, ट्रैक्टर या कुछ दोपहिया वाहन, जाने की अनुमति नहीं होती.
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सुरक्षा और यात्रा अनुभव की बात करें तो एक्सप्रेसवे ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि यहां अचानक से कोई वाहन या पैदल यात्री नहीं आता. वहीं हाईवे पर गांव, शहर और लोकल ट्रैफिक के कारण जोखिम थोड़ा बढ़ जाता है. यही कारण है कि एक्सप्रेसवे पर सफर तेज, स्मूथ और कम समय में पूरा हो जाता है, जबकि हाईवे पर थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है.
सुरक्षा और यात्रा अनुभव की बात करें तो एक्सप्रेसवे ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि यहां अचानक से कोई वाहन या पैदल यात्री नहीं आता. वहीं हाईवे पर गांव, शहर और लोकल ट्रैफिक के कारण जोखिम थोड़ा बढ़ जाता है. यही कारण है कि एक्सप्रेसवे पर सफर तेज, स्मूथ और कम समय में पूरा हो जाता है, जबकि हाईवे पर थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है.

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