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आसमान से नीचे क्यों नहीं गिरते लाखों टन भारी बादल, गुरुत्वाकर्षण का नियम यहां क्यों नहीं करता काम?
लाखों टन भारी बादल अपनी बनावट में आसपास की सूखी हवा से हल्के होते हैं, इसलिए वे आसमान में तैरते रहते हैं. जब भी उनकी बूंदें ज्यादा भारी हो जाती हैं, तब ग्रेविटी के कारण वे बारिश बनकर बरस जाते हैं.
जब कभी भी हम आसमान की ओर देखते हैं तो सफेद काले बादलों के तैरते हुए झुंड बहुत खूबसूरत नजर आते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि लाखों टन वजनदार होने के बाद भी ये बादल जमीन पर नीचे की तरफ क्यों नहीं गिरते हैं. न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण का नियम, जो कि दुनिया की हर चीज को नीचे खींचता है, वह यहां पर फेल होता क्यों नजर आता है? चलिए जानें.
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प्रशांत अग्रवालप्रेसिडेंट, नारायण सेवा संस्थान
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