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Shortest War In History: ये है दुनिया का सबसे छोटा युद्ध, महज इतने मिनट बाद खत्म हो गई थी वॉर

Shortest War In History: दुनिया में जहां सबसे लंबे युद्ध हैं, तो वहीं एक युद्ध सबसे छोटा भी है. यह युद्ध सिर्फ 38 मिनट में ही खत्म हो गया था. लेकिन यह किसके बीच लड़ा गया था.

Shortest War In History: दुनिया में जहां सबसे लंबे युद्ध हैं, तो वहीं एक युद्ध सबसे छोटा भी है. यह युद्ध सिर्फ 38 मिनट में ही खत्म हो गया था. लेकिन यह किसके बीच लड़ा गया था.

Shortest War In History: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की बात पिछले काफी दिनों से चल रही है. पाकिस्तानी धमकी दे रहे हैं कि उनके पास परमाणु हथियार हैं, तो वहीं भारत भी दुश्मन देश के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है. दुनिया में युद्ध तो कई देशों के बीच होते रहे हैं, ऐसे में आज हम यह जानेंगे कि दुनिया का सबसे छोटा युद्ध कब और किसके बीच लड़ा गया था.

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इतिहास के पन्ने पलटकर देखा जाए तो दुनिया में कई ऐसे युद्ध हुए हैं जो कि सालों-साल चले हैं. इनकी तबाही भयंकर रही है और ये युद्ध अपनी रणनीति के लिए जाने जाते हैं.
इतिहास के पन्ने पलटकर देखा जाए तो दुनिया में कई ऐसे युद्ध हुए हैं जो कि सालों-साल चले हैं. इनकी तबाही भयंकर रही है और ये युद्ध अपनी रणनीति के लिए जाने जाते हैं.
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प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध तकरीबन चार से छह सालों तक चले थे, लेकिन इतिहास क पन्नों में एक युद्ध ऐसा भी दर्ज है जो कि सिर्फ 38 मिनट में ही खत्म हो गया था. आखिर वह किन देशों के बीच था.
प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध तकरीबन चार से छह सालों तक चले थे, लेकिन इतिहास क पन्नों में एक युद्ध ऐसा भी दर्ज है जो कि सिर्फ 38 मिनट में ही खत्म हो गया था. आखिर वह किन देशों के बीच था.
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27 अगस्त 1896 को ब्रिटेन और जांजीबार (अब तंजानिया का हिस्सा) के बीच लड़ा गया था. यह युद्ध राजनीतिक विवाद को लेकर हुआ था. इस दौरान ब्रिटेन की सेना ने बिना किसी खास मेहनत के इस युद्ध को सिर्फ 38 मिनट में खत्म कर दिया था.
27 अगस्त 1896 को ब्रिटेन और जांजीबार (अब तंजानिया का हिस्सा) के बीच लड़ा गया था. यह युद्ध राजनीतिक विवाद को लेकर हुआ था. इस दौरान ब्रिटेन की सेना ने बिना किसी खास मेहनत के इस युद्ध को सिर्फ 38 मिनट में खत्म कर दिया था.
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1893 में ब्रिटिश ने जांजीबार की देखरेख के लिए सैयद हमद बिन थुवैनी को नियुक्त किया था. वह शांतिपूर्णं तरीके से शासन चला रहे थे. लेकिन फिर 25 अगस्त 1896 को उनका निधन हो गया. हमद की मौत के बाद उनके भतीजे खालिद बिन बर्गश ने खुद को जांजीबार का सुल्तान घोषित कर दिया.
1893 में ब्रिटिश ने जांजीबार की देखरेख के लिए सैयद हमद बिन थुवैनी को नियुक्त किया था. वह शांतिपूर्णं तरीके से शासन चला रहे थे. लेकिन फिर 25 अगस्त 1896 को उनका निधन हो गया. हमद की मौत के बाद उनके भतीजे खालिद बिन बर्गश ने खुद को जांजीबार का सुल्तान घोषित कर दिया.
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जांजीबार पर तब भी ब्रिटेन का अधिरकार था. तो ब्रिटेन को यह पसंद नहीं आया कि बर्गश वहां का सुल्तान बने. ब्रिटेन ने खालिद को सुल्तान के पद से हटाए जाने का आदेश दिया, क्योंकि ब्रिटेन चाहता था कि उनके उत्तराधिकारी के रूप में हमद के चचेरे भाई हमुद बिन मोहम्मद को बैठाया जाए.
जांजीबार पर तब भी ब्रिटेन का अधिरकार था. तो ब्रिटेन को यह पसंद नहीं आया कि बर्गश वहां का सुल्तान बने. ब्रिटेन ने खालिद को सुल्तान के पद से हटाए जाने का आदेश दिया, क्योंकि ब्रिटेन चाहता था कि उनके उत्तराधिकारी के रूप में हमद के चचेरे भाई हमुद बिन मोहम्मद को बैठाया जाए.
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बर्गश ने आदेश को अनसुना करते हुए अपने महल के चारों ओर करीब 3000 सैनिकों को तैनात कर दिया. जब ब्रिटेन को यह बात पता चली तो उसने खालिद से पद छोड़ने के लिए कहा, लेकिन खालिद ने ध्यान नहीं दिया.
बर्गश ने आदेश को अनसुना करते हुए अपने महल के चारों ओर करीब 3000 सैनिकों को तैनात कर दिया. जब ब्रिटेन को यह बात पता चली तो उसने खालिद से पद छोड़ने के लिए कहा, लेकिन खालिद ने ध्यान नहीं दिया.
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ब्रिटेन ने खालिद को चेतावनी भी दी. फिर 27 अगस्त को ब्रिटिश ने जांजीबार पर हमला कर दिया. जब युद्ध शुरू हुआ तो खालिद की सेना ने सिर्फ 38 मिनट में ही हार मान ली. इस हमले में खालिद के 500 लोग घालय हुए थे.
ब्रिटेन ने खालिद को चेतावनी भी दी. फिर 27 अगस्त को ब्रिटिश ने जांजीबार पर हमला कर दिया. जब युद्ध शुरू हुआ तो खालिद की सेना ने सिर्फ 38 मिनट में ही हार मान ली. इस हमले में खालिद के 500 लोग घालय हुए थे.

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