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क्या पाकिस्तान में भी गरीबों को सब्सिडी पर मिलता है सिलेंडर, जानें कितनी छूट देती है सरकार?

पाकिस्तान में केवल 20 फीसदी आबादी को मिलने वाली पाइपलाइन गैस पर ही कुछ निम्न वर्ग को लाइफलाइन छूट मिलती है. आइए जानें कि सरकार गरीबों को कितने पर्सेंट सब्सिडी उपलब्ध कराती है.

पाकिस्तान में केवल 20 फीसदी आबादी को मिलने वाली पाइपलाइन गैस पर ही कुछ निम्न वर्ग को लाइफलाइन छूट मिलती है. आइए जानें कि सरकार गरीबों को कितने पर्सेंट सब्सिडी उपलब्ध कराती है.

आर्थिक तंगी और आसमान छूती महंगाई से जूझ रहे पड़ोसी देश पाकिस्तान में आम जनता के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना भी दूभर हो गया है. भारत में जहां उज्ज्वला जैसी योजनाओं के जरिए गरीबों को सब्सिडी पर रसोई गैस सिलेंडर दिए जाते हैं, वहीं पाकिस्तान में स्थिति बिल्कुल इसके उलट है. वहां के गरीब परिवारों को रसोई गैस के लिए अपनी जेब से भारी-भरकम कीमत चुकानी पड़ती है. आइए जानते हैं कि पाकिस्तान में एक एलपीजी सिलेंडर की असली कीमत क्या है और वहां की सरकार गरीबों को इस पर कितनी राहत देती है.

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पाकिस्तान में इस समय एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर (11.8 किलोग्राम) की कीमत आम आदमी के बजट से पूरी तरह बाहर हो चुकी है. बाजार में एक सामान्य घरेलू सिलेंडर फिलहाल 4,000 से लेकर 5,150 पाकिस्तानी रुपये के बीच बिक रहा है.
पाकिस्तान में इस समय एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर (11.8 किलोग्राम) की कीमत आम आदमी के बजट से पूरी तरह बाहर हो चुकी है. बाजार में एक सामान्य घरेलू सिलेंडर फिलहाल 4,000 से लेकर 5,150 पाकिस्तानी रुपये के बीच बिक रहा है.
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स्थिति तब और ज्यादा बदतर हो जाती है जब देश में गैस की किल्लत बढ़ जाती है. सर्दियों के मौसम में या मांग बढ़ने पर खुले बाजारों में इसी एक घरेलू सिलेंडर की कीमत बढ़कर 8,000 पाकिस्तानी रुपये तक भी पहुंच जाती है, जिससे गरीबों के चूल्हे ठंडे होने की नौबत आ जाती है.
स्थिति तब और ज्यादा बदतर हो जाती है जब देश में गैस की किल्लत बढ़ जाती है. सर्दियों के मौसम में या मांग बढ़ने पर खुले बाजारों में इसी एक घरेलू सिलेंडर की कीमत बढ़कर 8,000 पाकिस्तानी रुपये तक भी पहुंच जाती है, जिससे गरीबों के चूल्हे ठंडे होने की नौबत आ जाती है.
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पाकिस्तान में तेल और गैस नियामक प्राधिकरण (OGRA) द्वारा घरेलू सिलेंडर की आधिकारिक कीमत लगभग 3,500 से 3,600 पाकिस्तानी रुपये तय की गई है, लेकिन यह सरकारी रेट सिर्फ कागजों तक ही सीमित दिखाई देता है.
पाकिस्तान में तेल और गैस नियामक प्राधिकरण (OGRA) द्वारा घरेलू सिलेंडर की आधिकारिक कीमत लगभग 3,500 से 3,600 पाकिस्तानी रुपये तय की गई है, लेकिन यह सरकारी रेट सिर्फ कागजों तक ही सीमित दिखाई देता है.
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जब बात खुदरा बाजार की आती है, तो गैस एजेंसियों और दुकानदारों की मनमानी के कारण जनता को 4,000 से 5,150 पाकिस्तानी रुपये तक ढीले करने पड़ते हैं. वहीं, अगर कमर्शियल सिलेंडर (45.4 किलोग्राम) की बात करें, तो इसकी कीमत 13,600 से लेकर 17,000 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच चुकी है.
जब बात खुदरा बाजार की आती है, तो गैस एजेंसियों और दुकानदारों की मनमानी के कारण जनता को 4,000 से 5,150 पाकिस्तानी रुपये तक ढीले करने पड़ते हैं. वहीं, अगर कमर्शियल सिलेंडर (45.4 किलोग्राम) की बात करें, तो इसकी कीमत 13,600 से लेकर 17,000 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच चुकी है.
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पाकिस्तान में गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए एलपीजी सिलेंडर पर किसी भी तरह की कोई स्थायी या राष्ट्रव्यापी सीधी सब्सिडी योजना मौजूद नहीं है. भारत की तरह वहां के गरीबों के खातों में सिलेंडर खरीदने के लिए कोई नकद छूट या रिफंड नहीं भेजा जाता है.
पाकिस्तान में गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए एलपीजी सिलेंडर पर किसी भी तरह की कोई स्थायी या राष्ट्रव्यापी सीधी सब्सिडी योजना मौजूद नहीं है. भारत की तरह वहां के गरीबों के खातों में सिलेंडर खरीदने के लिए कोई नकद छूट या रिफंड नहीं भेजा जाता है.
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें जैसे ही बदलती हैं, पाकिस्तान सरकार तुरंत उसका पूरा बोझ देश की गरीब जनता की जेब पर डाल देती है. इसके चलते वहां एलपीजी सिलेंडर खरीदना अब एक लग्जरी बन चुका है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें जैसे ही बदलती हैं, पाकिस्तान सरकार तुरंत उसका पूरा बोझ देश की गरीब जनता की जेब पर डाल देती है. इसके चलते वहां एलपीजी सिलेंडर खरीदना अब एक लग्जरी बन चुका है.
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पाकिस्तान सरकार घरेलू गैस पर कुछ राहत जरूर देती है, लेकिन इसका फायदा देश की बहुत ही कम आबादी को मिल पाता है. वहां जो लोग पाइप वाली प्राकृतिक गैस (सुई गैस) का इस्तेमाल करते हैं, उनमें से बेहद कम आय वाले परिवारों को 'लाइफलाइन उपभोक्ता' की श्रेणी में रखकर सस्ती दरों पर गैस दी जाती है.
पाकिस्तान सरकार घरेलू गैस पर कुछ राहत जरूर देती है, लेकिन इसका फायदा देश की बहुत ही कम आबादी को मिल पाता है. वहां जो लोग पाइप वाली प्राकृतिक गैस (सुई गैस) का इस्तेमाल करते हैं, उनमें से बेहद कम आय वाले परिवारों को 'लाइफलाइन उपभोक्ता' की श्रेणी में रखकर सस्ती दरों पर गैस दी जाती है.
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मगर इस व्यवस्था की सबसे बड़ी नाकामी यह है कि पाइपलाइन नेटवर्क पूरे पाकिस्तान की महज 20 फीसदी आबादी तक ही सीमित है. बाकी बचे 80 प्रतिशत लोगों को महंगे एलपीजी सिलेंडर पर ही निर्भर रहना पड़ता है. पाकिस्तान सरकार समय-समय पर देश के बिगड़े हालातों को देखकर राहत पैकेजों की घोषणा तो करती है, लेकिन उन पैकेजों का ध्यान कभी भी रसोई गैस पर नहीं होता.
मगर इस व्यवस्था की सबसे बड़ी नाकामी यह है कि पाइपलाइन नेटवर्क पूरे पाकिस्तान की महज 20 फीसदी आबादी तक ही सीमित है. बाकी बचे 80 प्रतिशत लोगों को महंगे एलपीजी सिलेंडर पर ही निर्भर रहना पड़ता है. पाकिस्तान सरकार समय-समय पर देश के बिगड़े हालातों को देखकर राहत पैकेजों की घोषणा तो करती है, लेकिन उन पैकेजों का ध्यान कभी भी रसोई गैस पर नहीं होता.
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कुल मिलाकर देखें तो पाकिस्तान में एलपीजी सिलेंडर पर सरकार की तरफ से मिलने वाली राहत न के बराबर है. देश की बहुसंख्यक आबादी जो कस्बों, गांवों और सुदूर इलाकों में रहती है, वह पूरी तरह से कालाबाजारी और खुले बाजार के महंगे दामों पर एलपीजी खरीदने को मजबूर है.
कुल मिलाकर देखें तो पाकिस्तान में एलपीजी सिलेंडर पर सरकार की तरफ से मिलने वाली राहत न के बराबर है. देश की बहुसंख्यक आबादी जो कस्बों, गांवों और सुदूर इलाकों में रहती है, वह पूरी तरह से कालाबाजारी और खुले बाजार के महंगे दामों पर एलपीजी खरीदने को मजबूर है.

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