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जब भारत आजाद हुआ तब दुनिया में कितने देश थे, तब से कितने बढ़ गए?

World Countries 1947: 15 अगस्त 2026 को भारत 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा. इसी बीच आइए जानते हैं कि 1947 से अब तक दुनिया में कितने देशों की बढ़ोतरी हुई है.

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  • 1947 में 74 देश, उपनिवेशवाद ने वैश्विक मानचित्र बदला।
  • द्वितीय विश्व युद्ध बाद उपनिवेशवाद समाप्त, सोवियत संघ का विघटन।
  • यूगोस्लाविया, चेकोस्लोवाकिया विभाजन; इक्कीसवीं सदी में भी नए देश।

World Countries 1947: 15 अगस्त 2026 को भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है. आपको बता दें कि इस बार स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर वन्दे मातरम् गाया जाएगा. जब 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ था तब दुनिया का नक्शा आज से काफी अलग था. एशिया और अफ्रीका के बड़े हिस्से यूरोपीय औपनिवेशिक शासन के अधीन थे. इसी के साथ कई इलाके आजादी की तरफ बढ़ रहे थे. अगले 8 दशकों में उपनिवेशवाद के खत्म होने, बड़े संघों के टूटने और आजादी के आंदोलनों ने दुनिया का नक्शा बदल दिया. 1947 में लगभग 74 आजाद देश थे और आज दुनिया में आमतौर पर 195 देश माने जाते हैं. 

1947 में लगभग 74 आजाद देश थे 

1947 में संप्रभु देशों की सही संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि संप्रभुता को कैसे परिभाषित किया जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि कई इलाके औपनिवेशिक शासन, स्व-शासन और पूरी आजादी के बीच के बदलाव के दौर में थे. एक आम ऐतिहासिक अनुमान के मुताबिक आजाद देशों की संख्या लगभग 74 थी.

संयुक्त राष्ट्र एक और उपयोगी पैमाना देता है. इसकी स्थापना 1945 में 51 सदस्यों के साथ हुई थी और 1947 के अंत तक इसके सदस्यों की संख्या 57 हो चुकी थी. इस वजह से उस समय वैश्विक राजनीतिक व्यवस्था आज की तुलना में काफी छोटी थी. उस समय अफ्रीका का ज्यादातर हिस्सा यूरोपीय औपनिवेशिक कंट्रोल में था. मिस्र, इथियोपिया, लाइबेरिया और दक्षिण अफ्रीका सहित अफ्रीका के कुछ ही इलाके आजाद थे.


जब भारत आजाद हुआ तब दुनिया में कितने देश थे, तब से कितने बढ़ गए?

उपनिवेशवाद के खत्म होने से दुनिया का नक्शा बदल गया 

देशों की संख्या में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोपीय औपनिवेशिक साम्राज्यों का पतन था. यूरोपीय शक्तियां आर्थिक और सैन्य रूप से कमजोर हो चुकी थीं और एशिया और अफ्रीका में आजादी के आंदोलन तेजी से मजबूत हो रहे थे. 

1947 में भारत की आजादी के बाद उसी साल पाकिस्तान और 1948 में म्यांमार आजाद हुए. इंडोनेशिया को 1949 में आजादी मिली और अगले दशकों में एशिया के कई दूसरे इलाकों को संप्रभुता मिली.

अफ्रीका में और भी बड़ा बदलाव आया. 1960 को अफ्रीका का वर्ष कहा जाता है. 17 अफ्रीकी देशों को आजादी मिली थी जिस वजह से महाद्वीप पर यूरोपीय औपनिवेशिक शासन का अंत और रफ्तार से पास आया. यह प्रक्रिया 1960 और 1970 के दशक में भी जारी रही. इसमें कैरिबियन और प्रशांत क्षेत्र के देश आजाद हुए.

सोवियत संघ के टूटने से 15 देश बने 

एक और बड़ा बदलाव 1991 में आया. उस दौर में सोवियत संघ का विघटन हुआ. सोवियत संघ के पूर्व 15 गणराज्य स्वतंत्र देश बन गए जिससे यूरोप और एशिया का राजनीतिक नक्शा पूरी तरह से बदल गया. इन देशों में रूस, यूक्रेन, बेलारूस, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, जॉर्जिया,आर्मेनिया, अजरबैजान, मोल्दोवा, लिथुआनिया, लातविया, एस्टोनिया, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान शामिल थे. इस वजह से सोवियत संघ का विघटन आधुनिक समय में स्वतंत्र देश की संख्या में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार सबसे बड़ी घटना में से एक था. 

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युगोस्लाविया और चेकोस्लोवाकिया भी खत्म हो गए 

1990 के दशक में पूर्वी यूरोप में और भी बदलाव हुए. राजनीतिक तनाव और युद्धों के बीच यूगोस्लाविया टूट गया. इससे कई स्वतंत्र देश बने. आज पूर्व युगोस्लाविया वाले इलाके में स्लोवेनिया, क्रोएशिया, बोस्निया और हर्जेगोविना, सर्बिया, मोंटेनेग्रो, उत्तरी मैसेडोनिया और कोसोवो शामिल हैं. हालांकि कोसोवो को अभी तक पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं दी गई है. 

चेकोस्लोवाकिया ने बिल्कुल अलग रास्ता अपनाया. इसे वेलवेट डिवोर्स के नाम से जाना जाता है. इसके तहत 1993 में यह शांतिपूर्वक चेक गणराज्य और स्लोवाकिया में बंट गया. 


जब भारत आजाद हुआ तब दुनिया में कितने देश थे, तब से कितने बढ़ गए?

2000 के बाद कई नए देश बने 

नए देश बनने की प्रक्रिया 21वीं सदी में भी जारी रही है. पुर्तगाली औपनिवेशिक शासन, इंडोनेशियाई कब्जे और संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में हुए बदलाव के लंबे संघर्ष के बाद 20 मई 2002 को तिमोर लेस्ते आजाद हुआ. जनमत संग्रह के बाद 3 जून 2006 को मोंटेनेग्रो ने स्वतंत्रता की घोषणा की. इसके बाद सर्बिया और मोंटेनेग्रो संघ के विघटन के बाद सर्बिया एक आजाद देश बन गया. प्रशांत क्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका से जुड़े संयुक्त राष्ट्रीशिप समझौते के तहत प्रकाशित होने के बाद एक अक्टूबर 1994 को पलाऊ पूरी तरह से आजाद हो गया.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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