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आरोप से बेदाग बरी होने तक: कैसे अडानी शेयर्स और मार्केट कैप ने की वापसी?

अमेरिका से गौतम अडानी को बड़ी कानूनी राहत मिली है. 2024 से चल रहे केस में 2026 में क्या फैसला लिया गया है और कैसे अडानी शेयर्स और मार्केट कैप ने वापसी की है, यहां से समझिए.

गौतम अडानी और अडानी ग्रुप के लिए अमेरिकी कोर्ट से आया फैसला बड़ी राहत की बात है. अमेरिकी न्याय विभाग की मांग पर EDNY की कोर्ट ने आपराधिक केस को हमेशा के लिए खारिज कर दिया है. इसका मतलब है कि इन्हीं आपराधिक आरोपों के आधार पर ये केस अब दोबारा दाखिल नहीं किया जा सकता है.

इस फैसले के बाद अडानी ग्रुप के लिए सबसे बड़ी राहत सिर्फ कानूनी राहत नहीं है. बल्कि राहत की खबर तो ये भी है कि पिछले कुछ सालों में अडानी ग्रुप के शेयर और मार्केट कैप ने भी बड़ी रिकवरी की है. 

आरोप लगने के बाद क्या- क्या हुआ?
नवंबर 2024 में अमेरिकी अधिकारियों की कार्रवाई के बाद अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था. अमेरिकी अभियोजन पक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी थी और बाजार भी किसी भी कानूनी विवाद को लेकर तुरंत रिएक्शन देता है. 

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अडानी ग्रुप के शेयरों में भी इसका असर दिखा और ग्रुप के कुल मार्केट कैप में काफी बड़ी गिरावट आ गई थी. निवेशकों के लिए सवाल सिर्फ कानूनी आरोपों का नहीं था, बल्कि ये भी था कि इससे ग्रुप की फंडिंग, विदेशी निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर क्या असर पड़ेगा.

कैसे बदली तस्वीर?
अमेरिका में कानूनी प्रक्रिया चलती रही लेकिन अडानी ग्रुप का बिजनेस नहीं रुका. ग्रुप की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक इस कानूनी प्रक्रिा के दौरान ही इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी, पोर्ट, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कारोबार में निवेश और प्रोजेक्ट्स पर जमकर काम किया गया.

ग्रुप ने बताया कि FY25 और FY26 के दूसरे हिस्से में उसने 2.08 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया यानी ग्रुप ने अपना बिजनेस प्लान को रोका नहीं. यही मेहनत और लगातार बिजनेस में ग्रोथ धीरे-धीरे निवेशकों के भरोसे को वापस लेकर आया.

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मार्केट कैप से ऊपर
अडानी ग्रुप के मुताबिक FY23 से FY26 के बीच उसका कुल एसेट बेस 4.12 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है. सिर्फ अमेरिकी केस खत्म होने से ये रिकवरी नहीं हुई है. कंपनियों के ऑपरेशनल काम, नए प्रोजेक्ट्स, कमाई में सुधार और निवेशकों के बढ़ते भरोसे ने भी इसमें काफी अहम भूमिका निभाई है. बाजार ने धीरे-धीरे ये देखना शुरू किया कि कानूनी विवाद के बावजूद ग्रुप का बिजनेस नहीं रुक रहा है.

कैसे हुआ शेयर रिकवर?
अडानी ग्रुप के शेयरों की रिकवरी को कुछ बड़े फैक्टर्स से समझा जा सकता है. ग्रुप ने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम किया, इसके साथ ही नवी मुंबई इंटनेशनल एयरपोर्ट, गुवाहाटी एयरपोर्ट का टर्मिनल 2, कोलंबो वेस्ट इंटरनेशनल टर्मिनल और गंगा एक्सप्रेस वे जैसे प्रोजेक्ट्स पर भी लगातार काम किया.

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अदानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) एक वित्त वर्ष में 500 मिलियन मीट्रिक टन से ज्यादा कार्गो संभालने वाली भारत की पहली पोर्ट कंपनी बनी. अदानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड की ऑपरेशनल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता 20 GW के पार पहुंच गई. FY26 में अडानी ग्रुप का सालाना कैपिटल एक्सपेंडिचर 1,52,967 करोड़ रुपये रहा. किसी भी भारतीय कॉरपोरेट की ओर से एक वित्त वर्ष में किया गया सबसे बड़ा कैपेक्स था. 

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