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चांद पर जाना आसान या मंगल पर, दोनों मिशनों में कितना अंतर?

Moon vs Mars: मंगल पर जाने और चांद पर जाने में काफी ज्यादा फर्क है. आइए जानते हैं कि यह दोनों मिशन एक दूसरे से कैसे अलग हैं.

Moon vs Mars: मंगल पर जाने और चांद पर जाने में काफी ज्यादा फर्क है. आइए जानते हैं कि यह दोनों मिशन एक दूसरे से कैसे अलग हैं.

Moon vs Mars: चांद और मंगल दोनों ही स्पेस एक्सप्लोरेशन के लिए अहम जगह हो सकती हैं. लेकिन आपको बता दें कि वहां पहुंचना एक जैसा मुश्किल नहीं है. चांद पृथ्वी से सिर्फ 3,80,000 किलोमीटर दूर है. इस वजह से स्पेसक्राफ्ट वहां लगभग तीन दिनों में पहुंच सकता है. लेकिन मंगल पृथ्वी से करोड़ों किलोमीटर दूर हो सकता है और वहां पहुंचने में लगभग 6 से 9 महीने लगते हैं. यह अंतर तब और बढ़ जाता है जब लॉन्च विंडो, लैंडिंग, कम्युनिकेशन में देरी, रेडिएशन का असर और पृथ्वी पर वापस आने की संभावना जैसी बातों पर ध्यान दिया जाता है. आइए जानते हैं कि मंगल मिशन और चांद मिशन में क्या फर्क है.

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चांद लगभग 3,80,000 किलोमीटर दूर है और मंगल अपनी स्थिति के हिसाब से पृथ्वी से 50 मिलियन से 400 मिलियन किलोमीटर दूर हो सकता है.
चांद लगभग 3,80,000 किलोमीटर दूर है और मंगल अपनी स्थिति के हिसाब से पृथ्वी से 50 मिलियन से 400 मिलियन किलोमीटर दूर हो सकता है.
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एक स्पेसक्राफ्ट चांद तक लगभग तीन दिन में पहुंच सकता है लेकिन मंगल तक एक तरफ की यात्रा में आमतौर पर 6 से 9 महीने लगते हैं.
एक स्पेसक्राफ्ट चांद तक लगभग तीन दिन में पहुंच सकता है लेकिन मंगल तक एक तरफ की यात्रा में आमतौर पर 6 से 9 महीने लगते हैं.
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चांद के लिए मिशन अक्सर लॉन्च किए जा सकते हैं लेकिन मंगल मिशन सही ऑर्बिटल एलाइनमेंट पर निर्भर करते हैं. यह लगभग हर 26 महीने में एक बार होता है.
चांद के लिए मिशन अक्सर लॉन्च किए जा सकते हैं लेकिन मंगल मिशन सही ऑर्बिटल एलाइनमेंट पर निर्भर करते हैं. यह लगभग हर 26 महीने में एक बार होता है.
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चांद पर लगभग कोई एटमॉस्फेयर नहीं है. इस वजह से स्पेसक्राफ्ट रॉकेट पावर्ड डिसेंट पर निर्भर रह सकते हैं. मंगल पर पतला एटमॉस्फेयर, तेज हवा और धूल भरी आंधियां होती हैं. इसमें लैंडिंग काफी मुश्किल हो जाती है.
चांद पर लगभग कोई एटमॉस्फेयर नहीं है. इस वजह से स्पेसक्राफ्ट रॉकेट पावर्ड डिसेंट पर निर्भर रह सकते हैं. मंगल पर पतला एटमॉस्फेयर, तेज हवा और धूल भरी आंधियां होती हैं. इसमें लैंडिंग काफी मुश्किल हो जाती है.
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चांद के पास मौजूद एस्ट्रोनॉट कुछ ही दिनों में पृथ्वी पर वापस आ सकते हैं. मंगल पर गई टीम ऑर्बिटल मैकेनिक्स और काफी ज्यादा दूरी की वजह से बस मुड़कर घर वापस नहीं आ सकती.
चांद के पास मौजूद एस्ट्रोनॉट कुछ ही दिनों में पृथ्वी पर वापस आ सकते हैं. मंगल पर गई टीम ऑर्बिटल मैकेनिक्स और काफी ज्यादा दूरी की वजह से बस मुड़कर घर वापस नहीं आ सकती.
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पृथ्वी और चांद के बीच सिग्नल लगभग 1.3 सेकंड में पहुंचते हैं. मंगल के साथ कम्युनिकेशन में एक तरफ लगभग 3 से 22 मिनट की देरी हो सकती है. इससे रियल टाइम कंट्रोल नामुमकिन हो जाता है.
पृथ्वी और चांद के बीच सिग्नल लगभग 1.3 सेकंड में पहुंचते हैं. मंगल के साथ कम्युनिकेशन में एक तरफ लगभग 3 से 22 मिनट की देरी हो सकती है. इससे रियल टाइम कंट्रोल नामुमकिन हो जाता है.
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चांद मिशन में डीप स्पेस में कम समय बिताना पड़ता है. मंगल की यात्रा में एस्ट्रोनॉट कई महीनों तक कॉस्मिक और सोलर रेडिएशन के संपर्क में रहते हैं. इससे लंबे समय में सेहत से जुड़े जोखिम बढ़ जाते हैं.
चांद मिशन में डीप स्पेस में कम समय बिताना पड़ता है. मंगल की यात्रा में एस्ट्रोनॉट कई महीनों तक कॉस्मिक और सोलर रेडिएशन के संपर्क में रहते हैं. इससे लंबे समय में सेहत से जुड़े जोखिम बढ़ जाते हैं.
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मंगल मिशन के लिए एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट सिस्टम, ज्यादा फ्यूल क्षमता, ‌ रेडिएशन से सुरक्षा, भरोसेमंद लैंडिंग टेक्नोलॉजी और लंबे समय तक एस्ट्रोनॉट को सपोर्ट करने में सक्षम सिस्टम की जरूरत होती है.
मंगल मिशन के लिए एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट सिस्टम, ज्यादा फ्यूल क्षमता, ‌ रेडिएशन से सुरक्षा, भरोसेमंद लैंडिंग टेक्नोलॉजी और लंबे समय तक एस्ट्रोनॉट को सपोर्ट करने में सक्षम सिस्टम की जरूरत होती है.

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