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कैसे होते हैं म्यूल खाते, जिनका साइबर ठगी से कनेक्शन? कैसे होती है इनकी पहचान
साइबर ठग मनी ट्रांसफर के लिए म्यूल खातों का इस्तेमाल करते हैं ताकि असली अपराधी का पता न लग सके. सरकार अब AI तकनीक की मदद से इन खातों की पहचान करने की दिशा में काम कर रही है.
डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन बैंकिंग जैसी सुविधाओं से हमारी जिंदगी आसान बन गई है, लेकिन इसी के साथ साइबर ठगी का खतरा भी तेजी से बढ़ता जा रहा है. आजकल साइबर ठग सीधे तौर पर अपने नाम पर आपके अकाउंट से पैसे नहीं लेते हैं बल्कि दूसरों के अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे अकाउंट को म्यूल खाता कहा जाता है. यह वह बैंक अकाउंट होते हैं जो धोखे या लालच के जरिए इस्तेमाल में लिए जाते हैं ताकि जांच एजेंसी असली अपराधी तक न पहुंच पाएं.
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दरअसल म्यूल खाते वह बैंक अकाउंट होते हैं जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी धोखाधड़ी से हासिल पैसों को ट्रांसफर करने के लिए करते हैं. यह अकाउंट आम लोगों के ही होते हैं, लेकिन ठग लालच देकर या धोखे से इनका इस्तेमाल करते हैं जिससे वह पैसे साइबर ठग तक पहुंचने से पहले कई स्टेप से गुजर जाते हैं और साइबर ठग इस धोखाधड़ी से खुद को आसानी से बचा लेते हैं.
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म्यूल खाते का इस्तेमाल करने के लिए अपराधी सबसे पहले ठगे गए पैसों को म्यूल खाते में ट्रांसफर करते हैं. वहां से वह रकम को और आगे कई अकाउंट में भेज देते हैं. यह पूरी प्रक्रिया एक चैन की तरह काम करती है जिससे पैसे का ट्रैक रिकॉर्ड मिटाना आसान हो जाता है. साथ ही जांच एजेंसी को असली अपराधी तक पहुंचने में काफी मुश्किल हो जाती है.
Published at : 28 Jun 2025 08:36 PM (IST)
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