PM मोदी के सबसे भरोसेमंद, पाकिस्तान में छिदे कान से पहचाने गए, जानें कौन हैं भारतीय जेम्स बॉन्ड अजीत डोभाल?
Indian James Bond: 81 साल के NSA अजीत डोभाल वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में भारत की मेजबानी कर रहे हैं. डोभाल की जिंदगी किसी फिल्म से कम नहीं रही. डोभाल को भारत का जेम्स बॉन्ड भी कहा जाता है, लेकिन क्यों?

अजीत कुमार डोभाल का जन्म 20 जनवरी 1945 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में हुआ था. 81 साल के डोभाल को भारतीय जेम्स बॉन्ड भी कहा जाता है क्योंकि उनकी जासूसी और सुरक्षा की जिंदगी फिल्मी कहानियों से कम नहीं है. वे 2014 से भारत भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार(NSA) हैं और अब तीसरा कार्यकाल चला रहे हैं, जो भारत के इतिहास में सबसे लंबा है.
हिंदू-मुस्लिम दंगे रुकवाकर बने हीरो
अजीत डोभाल के पिता आर्मी में अफसर थे और मां यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हेमवंती नंदन बहुगुणा की चचेरी बहन थीं. मिलिट्री स्कूल से पढ़ाई और आगरा यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स की डिग्री लेने के बाद डोभाल 1968 में केरल कैडर से IPS बन गए. डोभाल की पहली नियुक्ति कोट्टायम में हुई, फिर 1971 में थालास्सेरी में ASP बने और फिर हीरो बन गए.
दरअसल, जब डोभाल ने थालास्सेरी में चार्ज संभाला था तो हिंदू-मुस्लिम दंगे भड़के हुए थे. उन्होंने सबसे पहले इंटेलिजेंस जुटाई और लोगों को गुस्से की वजह समझाई. दंगों के दौरान लोगों का सामान लूट लिया गया था. डोभाल लुटेरों को पकड़कर लाए और लोगों को सामान वापस मिला. डोभाल ने एक हफ्ते में ही स्थिति सामान्य कर दी थी. केरल के पूर्व DGP एलेक्जेंडर जैकब ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, 'डोभाल ने दंगे कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाई थी.'
अजीत डोभाल से जुड़ी खास बातें क्या हैं?
- 1972 में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में शामिल हो गए. इसी साल उनकी शादी अरुणी डोभाल से हुई थी.
- पूरे करियर में सिर्फ 7 साल पुलिस की वर्दी पहनी, बाकी समय खुफिया जासूसी में गुजारा.
- 2004-2005 में IB डायरेक्टर रहे. 2005 में रिटायरमेंट के बाद विवेकानंद इंडरनेशनल फाउंडेशन (RSS से जुड़ा थिंकटैंक) के अध्यक्ष बने.
- 31 मई 2014 में भारत के NSA बने. 2019 में कैबिनेट मंत्री रैंक मिली. 2024 में तीसरी बार 5 साल का कार्यकाल शुरू किया.
- भारत के इकलौते पुलिस अधिकारी हैं जिनें कीर्ति चक्र (शांतिकाल में गैलेंट्री अवॉर्ड)मिला. वह सबसे कम उम्र में यह अवॉर्ड पाने वाले अधिकारी हैं.
- 1988 में कीर्ति चक्र मिला, जो आमतौर पर सिर्फ सैन्य अधिकारियों को ही मिलता है.
अजित डोभाल को 'भारत का जेम्स बॉन्ड' क्यों कहा जाता है?
अजीत डोभाल की जिंदगी जासूसी, बहादुरी और राष्ट्र सेवा की मिसाल है. वे आज भी भारत की सुरक्षा के सबसे मजबूत स्तंभ हैं. डोभाल ने कई मुश्किल ऑपरेशंस को अंजाम दिया है. 1981 से 1987 तक डोभाल इस्लामाबाद में भारतीय हाई कमीशन में तैनात रहे. दावा किया जाता है कि उनका असली काम पाकिस्तान से खुफिया जानकारी जुटाकर भारत भेजना था. इसके अलावा वह लाहौर में भी रहे.
डोभाल खुद बता चुके हैं कि लाहौर में मुसलमान वेशभूषा में रहते थे. एक दिन मस्जिद से बाहर निकलते हुए लंबी दाढ़ी वाले एक व्यक्ति ने रोक कर पूछ लिया, 'क्या तुम हिंदू हो?' डोभाल ने कहा- नहीं. फिर वह आदमी डोभाल को अपने घर ले गया और बोला कि तुम्हारे कान छिदे हुए हैं. तुम हिंदू ही हो. मैं भी हिंदू हूं, लेकिन मेरे परिवार को मार दिया गया इसलिए मुझे वेशभूषा बदलकर रहना पड़ रहा है. उस आदमी ने डोभाल को सलाह दी कि वह कान की सर्जरी करवा लें.
अजीत डोभाल...
- 1980 के दशक में 7 साल पाकिस्तान में अंडरकवर रहे. लाहौर में पाकिस्तानी मुस्लिम बनकर RAW के लिए जासूसी की.
- 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार (स्वर्ण मंदिर) में रिक्शा चालक बनकर अंदर गए, आतंकियों की जानकारी दी.
- 1999 में कंधार प्लेन हाईजैक (IC-814) में मुख्य नेगोशिएटर बनकर आतंकियों से बातचीत की.
- 1988-1999 के बीच 15 से ज्यादा इंडियन एयरलाइंस हाईजैकिंग सॉल्व करने में मदद की.
- 2016 में उरी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक के मुख्य प्लानर रहे.
- 2019 में बालाकोट एयरस्ट्राइक में अहम भूमिका निभाई.
- 2017 में डोकलाम विवाद सॉल्व करने में मदद की.
- नॉर्थ-ईस्ट, जम्मू-कश्मीर और पंजाब में 33 साल तक उग्रवाद के खिलाफ ग्राउंड पर काम किया. कई आतंकियों को सरेंडर कराया और प्रो-इंडिया बनाया.
PM मोदी के सबसे भरोसेमंद अधिकारी हैं डोभाल
- डोभाल फोन और इंटरने का इस्तेमाल नहीं करते. सिर्फ खास मौके पर फोन यूज करते हैं. वे डिजिटल कम्युनिकेशन से दूर रहते हैं ताकि सिक्योरिटी बनी रहे.
- NSA बनने के बाद चुनौतियां बढ़ीं, लेकिन PM मोदी पर उनका बहुत भरोसा है. मोदी ने रिटायरमेंट के बाद उन्हें गुजरात बुलाया था.
- पूर्व IB चीफ जैसे लोग कहते हैं कि मोदी सरकार में उनका चुनाव सबसे अच्छा था. उनकी सलाह पर PM और मंत्रियों को पूरा भरोसा है.
- 11 जनवरी 2026 में 'विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग' में युवाओं को कहा- धैर्य रखो, ईमानदारी से बात करो, भारत की सभ्यता और इतिहास से सीखो. आजादी के लिए बहुत कीमत चुकानी पड़ी है.
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Source: IOCL



























