एक्सप्लोरर

कितने साल में कब्र में खत्म हो जाता है शव का वजूद, कब तक गल जाती हैं इंसान की हड्डियां?

मौत के बाद इंसानी शरीर धीरे-धीरे रासायनिक क्रियाओं के कारण धीरे-धीरे मिट्टी में बदलने लगता है. जहां हड्डियों को पूरी तरह गलकर धूल बनने में 100 साल से अधिक का समय लगता है.

मौत के बाद इंसानी शरीर धीरे-धीरे रासायनिक क्रियाओं के कारण धीरे-धीरे मिट्टी में बदलने लगता है. जहां हड्डियों को पूरी तरह गलकर धूल बनने में 100 साल से अधिक का समय लगता है.

मौत को भले ही जीवन का अंतिम पड़ाव माना जाता है, लेकिन वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो इसके बाद भी इंसानी शरीर के भीतर बदलावों का एक लंबा और पेचीदा सफर शुरू होता है. अरबों कोशिकाओं और सूक्ष्मजीवों से बना हमारा शरीर मिट्टी में दफन होने के बाद भी धीरे-धीरे प्रकृति के पंचतत्वों में विलीन होने लगता है. बहुत से लोगों के मन में सवाल उठता है कि कब्र में शव को पूरी तरह से मिट्टी बनने में आखिर कितना वक्त लगता है? चलिए जानें.

1/10
दिल की धड़कन रुकते ही शरीर में खून का दौरा थम जाता है, जिससे हर अंग तक ऑक्सीजन पहुंचना बंद हो जाती है. ऑक्सीजन न मिलने की वजह से सबसे पहले हमारा मस्तिष्क और ज्यादा ऊर्जा खपत करने वाले नाजुक हिस्से नष्ट होने लगते हैं.
दिल की धड़कन रुकते ही शरीर में खून का दौरा थम जाता है, जिससे हर अंग तक ऑक्सीजन पहुंचना बंद हो जाती है. ऑक्सीजन न मिलने की वजह से सबसे पहले हमारा मस्तिष्क और ज्यादा ऊर्जा खपत करने वाले नाजुक हिस्से नष्ट होने लगते हैं.
2/10
हमारी कोशिकाएं करीब 70 फीसदी पानी से बनी होती हैं, जो ऑक्सीजन के आभाव में खुद को संभाल नहीं पाती हैं और फटना शुरू कर देती हैं. जिसके बाद कोशिकाओं के अंदर का सारा तरल पदार्थ निकलकर ताबूत या कब्र की सतह पर फैलने लगता है और पहले दिन से ही यह प्रक्रिया शुरू हो जाती है.
हमारी कोशिकाएं करीब 70 फीसदी पानी से बनी होती हैं, जो ऑक्सीजन के आभाव में खुद को संभाल नहीं पाती हैं और फटना शुरू कर देती हैं. जिसके बाद कोशिकाओं के अंदर का सारा तरल पदार्थ निकलकर ताबूत या कब्र की सतह पर फैलने लगता है और पहले दिन से ही यह प्रक्रिया शुरू हो जाती है.
3/10
जीवित रहते वक्त जो बैक्टीरिया हमारी आंतों में भोजन पचाने का काम करते हैं, मौत के बाद शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली खत्म होते ही वे बेकाबू हो जाते हैं. ये सूक्ष्मजीव आंतों से निकलकर शरीर के अन्य हिस्सों, नसों और धमनियों की ओर बढ़ते हैं. कुछ ही घंटों में से लिवर और गॉलब्लैडर पर हमला कर देते हैं.
जीवित रहते वक्त जो बैक्टीरिया हमारी आंतों में भोजन पचाने का काम करते हैं, मौत के बाद शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली खत्म होते ही वे बेकाबू हो जाते हैं. ये सूक्ष्मजीव आंतों से निकलकर शरीर के अन्य हिस्सों, नसों और धमनियों की ओर बढ़ते हैं. कुछ ही घंटों में से लिवर और गॉलब्लैडर पर हमला कर देते हैं.
4/10
इस वजह से शव का रंग 2-3 दिन में ही पीला-हरा सा दिखने लगता है. कब्र के अंदर तेजी से बैक्टीरिया पनपते हैं और अमोनिया व हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी बेहद जहरीली गैसें बनाने लगते हैं. इन गैसों के दबाव की वजह से शव फूलने लगता है और उसमें तेज बदबू आने लगती है.
इस वजह से शव का रंग 2-3 दिन में ही पीला-हरा सा दिखने लगता है. कब्र के अंदर तेजी से बैक्टीरिया पनपते हैं और अमोनिया व हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी बेहद जहरीली गैसें बनाने लगते हैं. इन गैसों के दबाव की वजह से शव फूलने लगता है और उसमें तेज बदबू आने लगती है.
5/10
तीन-चार महीने बीतने पर शरीर की नसें पूरी तरह से खत्म हो जाती हैं, जिससे खून में मौजूद आयरन बाहर आ जाता है. ऑक्सीजन के संपर्क में आकर इसका ऑक्सीकरण होता है और शव का रंग भूरा-काला पड़ जाता है. इस दौरान शरीर के टिश्यू घुलकर पानी जैसे वेस्ट में बदल जाते हैं और एक साल में सूती कपड़े भी सड़ जाते हैं.
तीन-चार महीने बीतने पर शरीर की नसें पूरी तरह से खत्म हो जाती हैं, जिससे खून में मौजूद आयरन बाहर आ जाता है. ऑक्सीजन के संपर्क में आकर इसका ऑक्सीकरण होता है और शव का रंग भूरा-काला पड़ जाता है. इस दौरान शरीर के टिश्यू घुलकर पानी जैसे वेस्ट में बदल जाते हैं और एक साल में सूती कपड़े भी सड़ जाते हैं.
6/10
कब्र के अंदर के माहौल के आधार पर 10 साल के बाद शरीर में दो तरह से बदलाव आते हैं. अगर वहां नमी ज्यादा है और ऑक्सीजन कम है तो जांघों और कूल्हों की चर्बी एक रासायनिक क्रिया की वजह से साबुन जैसी मोम में बदल जाती है, जिसे ग्रेव वैक्स कहते हैं.
कब्र के अंदर के माहौल के आधार पर 10 साल के बाद शरीर में दो तरह से बदलाव आते हैं. अगर वहां नमी ज्यादा है और ऑक्सीजन कम है तो जांघों और कूल्हों की चर्बी एक रासायनिक क्रिया की वजह से साबुन जैसी मोम में बदल जाती है, जिसे ग्रेव वैक्स कहते हैं.
7/10
इसके विपरीत कब्र के अंदर का माहौल अगर पूरी तरह से सूखा है तो शरीर प्राकृतिक रूप से ममी में बदलने लगता है. इस दौरान कान, नाक और पलकों की पतली त्वचा का पानी धीरे-धीरे उड़ जाता है, जिससे वे सूखकर पूरी तरह से सख्त और काले पड़ जाते हैं.
इसके विपरीत कब्र के अंदर का माहौल अगर पूरी तरह से सूखा है तो शरीर प्राकृतिक रूप से ममी में बदलने लगता है. इस दौरान कान, नाक और पलकों की पतली त्वचा का पानी धीरे-धीरे उड़ जाता है, जिससे वे सूखकर पूरी तरह से सख्त और काले पड़ जाते हैं.
8/10
करीब 50 साल का लंबा वक्त बीत जाने के बाद शव के सारे कोमल हिस्से और तरल पदार्थ पूरी तरह से गायब हो जाते हैं. इस पड़ाव पर सिर्फ सूखी हुई नसें और ममीफाइड त्वचा के कुछ अंश बचते हैं, जो बाद में मिट्टी बन जाते हैं.
करीब 50 साल का लंबा वक्त बीत जाने के बाद शव के सारे कोमल हिस्से और तरल पदार्थ पूरी तरह से गायब हो जाते हैं. इस पड़ाव पर सिर्फ सूखी हुई नसें और ममीफाइड त्वचा के कुछ अंश बचते हैं, जो बाद में मिट्टी बन जाते हैं.
9/10
जब कब्र के अंदर लगभग 80 साल का वक्त पूरा हो जाता है तो हड्डियों के अंदर मौजूद नरम कोलेजन पूरी तरह से गल जाता है. कोलेजन खत्म होने से हड्डियों की मजबूती समाप्त हो जाती है और वे अंदर से खोखली होकर सूखी लकड़ियों की तरह से आपस में चटकने और टूटने लगती हैं.
जब कब्र के अंदर लगभग 80 साल का वक्त पूरा हो जाता है तो हड्डियों के अंदर मौजूद नरम कोलेजन पूरी तरह से गल जाता है. कोलेजन खत्म होने से हड्डियों की मजबूती समाप्त हो जाती है और वे अंदर से खोखली होकर सूखी लकड़ियों की तरह से आपस में चटकने और टूटने लगती हैं.
10/10
कब्र में एक पूरी सदी यानि 100 साल का वक्त बीतने के बाज बची हुई हड्डियां भी पूरी तरह से विघटित होकर धूल का रूप ले लेती हैं. यह बारीक धूल समय के साथ मिट्टी में मिलकर हवा के साथ कब्र के बाहर बिखर जाती है.
कब्र में एक पूरी सदी यानि 100 साल का वक्त बीतने के बाज बची हुई हड्डियां भी पूरी तरह से विघटित होकर धूल का रूप ले लेती हैं. यह बारीक धूल समय के साथ मिट्टी में मिलकर हवा के साथ कब्र के बाहर बिखर जाती है.

जनरल नॉलेज फोटो गैलरी

Sponsored Links by Taboola
Advertisement
Advertisement
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

Countries With No Trains: इन देशों में नहीं चलती हैं ट्रेनें, प्रतिबंध का कारण जानकर हो जाएंगे हैरान 
इन देशों में नहीं चलती हैं ट्रेनें, प्रतिबंध का कारण जानकर हो जाएंगे हैरान 
क्या निशिकांत दुबे के खिलाफ सच में FIR करवा सकते हैं अखिलेश यादव, किन धाराओं में दर्ज होगा केस?
क्या निशिकांत दुबे के खिलाफ सच में FIR करवा सकते हैं अखिलेश यादव, किन धाराओं में दर्ज होगा केस?
First Electricity Supply History: भारत में कहां आई थी सबसे पहले बिजली, तब कितना आता था बिजली का बिल?
भारत में कहां आई थी सबसे पहले बिजली, तब कितना आता था बिजली का बिल?
Islamic Banking: जब इस्लाम में हराम है ब्याज लेना तो मुस्लिम देशों में कैसे जिंदा रहता है बैंकिंग सिस्टम? यहां जानिए
जब इस्लाम में हराम है ब्याज लेना तो मुस्लिम देशों में कैसे जिंदा रहता है बैंकिंग सिस्टम? यहां जानिए
Advertisement

वीडियोज

क्या ₹15 लाख में यही सबसे Best SUV है? नई Hyundai Venue N Line full Review | #hyundai #autolive
DR. Aarambhi: Aarambhi की सूझबूझ के आगे हारी Avantika, खुद को बेइज्जत होने से बचाया #sbs
Bollywood News: पुरानी यादों की कसक, नए इश्क़ का जुनून! 'आवारापन 2' का पहला गाना 'वे जुनून' बन गया चर्चा का केंद्र (07.07.26)
Gold Silver Price: औंधे मुंह गिरा सोना-चांदी! खरीदने का इससे बेस्ट मौका नहीं मिलेगा? ABPLIVE
Shilpa Shinde और Sunita Ahuja की बहस ने मचाया बवाल

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
ट्रंप की धमकी का खामनेई के जनाजे पर असर, डर गए दुनिया के इन 13 देशों ने शामिल होने से किनारा
ट्रंप की धमकी का खामनेई के जनाजे पर असर, डर गए दुनिया के इन 13 देशों ने शामिल होने से किनारा
बांकीपुर से बीजेपी ने घोषित किया उम्मीदवार, नितिन नवीन वाली सीट से लड़ेंगे अभिषेक कुमार
बांकीपुर से बीजेपी ने घोषित किया उम्मीदवार, नितिन नवीन वाली सीट से लड़ेंगे अभिषेक कुमार
अगली टी20 सीरीज में गौतम गंभीर से छिनेगी कोचिंग की जिम्मेदारी! इस दिग्गज को मिलेगा कार्यभार
अगली टी20 सीरीज में गौतम गंभीर से छिनेगी कोचिंग की जिम्मेदारी! इस दिग्गज को मिलेगा कार्यभार
बेटी की शादी में इमोशनल हुए शैलेश लोढ़ा, 'तारक मेहता' की पगड़ी ठीक करते दिखे विक्की कौशल
बेटी की शादी में इमोशनल हुए शैलेश लोढ़ा, 'तारक मेहता' की पगड़ी ठीक करते दिखे विक्की कौशल
वायनाड में भूस्खलन से 3 की मौत, 7 लापता… रोंगटे खड़े कर देगा केरल में कुदरत की तबाही का Video
वायनाड में भूस्खलन से 3 की मौत, 7 लापता… रोंगटे खड़े कर देगा केरल में कुदरत की तबाही का Video
सीरिया दौरे पर हुए दो बम धमाकों के बीच इमैनुएल मैक्रों का आया पहला रिएक्शन, बोले - 'मेरी यात्रा...'
सीरिया दौरे पर हुए दो बम धमाकों के बीच इमैनुएल मैक्रों का आया पहला रिएक्शन, बोले - 'मेरी यात्रा...'
मानसून की एक गलती और बर्बाद हो जाएगा केंचुआ खाद का बिजनेस, ऐसे बचाएं अपनी लागत
मानसून की एक गलती और बर्बाद हो जाएगा केंचुआ खाद का बिजनेस, ऐसे बचाएं अपनी लागत
IIM नागपुर का बड़ा प्लान! पुणे में बनेगा नया कैंपस, दुनिया के टॉप 100 बिजनेस स्कूलों में शामिल होने का लक्ष्य
IIM नागपुर का बड़ा प्लान! पुणे में बनेगा नया कैंपस, दुनिया के टॉप 100 बिजनेस स्कूलों में शामिल होने का लक्ष्य
Embed widget