ट्रंप की धमकी का खामनेई के जनाजे पर असर, डर गए दुनिया के इन 13 देशों ने शामिल होने से किनारा
Khamenei Funeral: ईरान में खामेनेई के जनाजे को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच भारी कूटनीतिक खींचतान देखने को मिली. मार्को रुबियो ने जनाजे में शामिल होने को लेकर कई देशों को धमकी दी थी.

भारत के विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में भारत की ओर से श्रद्धांजलि दी. खामेनेई के ताबूत को तेहरान के प्रमुख मार्गों से ले जाया गया. इस बीच ईरान ने भारत को धन्यवाद कहा है. तेहरान ने भारत का शुक्रिया ऐसे समय में किया है जब ईरानी मीडिया से ये खबरें आ रही हैं कि अमेरिकी दवाब के कारण कई देश खामेनेई की अंतिम सलामी कार्यक्रम से पीछे हट गए.
यूएस के दवाब के आगे झूक गए 13 देश
ईरान की तस्नीम न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, दो खाड़ी देशों सहित कम से कम 13 देशों ने अमेरिका दबाव के बाद खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए. रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे लेकर खुद खाड़ी के पांच देशों से संपर्क किया था. उन्होंने उन देशों से अपील की थी कि वे तेहरान में होने वाले इस जनाजे में शामिल न हों. दूसरी तरफ सोमवार (6 जुलाई 2026) को भारत में मौजूद ईरानी दूतावास ने एक्स पर पोस्ट कर भारत सरकार और भारतीय लोगों का शुक्रिया कहा, जिन्होंने इस जनाजे के कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. ईरान ने कहा कि भारत की यह मौजूदगी दोनों देशों के पुराने और मजबूत रिश्तों को दर्शाती है.
ईरान ने भारत को थैंक्यू कहा
ईरानी दूतावास ने ट्वीट किया, 'ईरान भारत की मित्र सरकार और वहां के लोगों का दिल से आभार और शुक्रिया जताता है. विशेष रूप से उस सरकारी प्रतिनिधिमंडल का, जिसने भारत सरकार और जनता की तरफ से इस जनाजे के कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और ईरान के शहीद नेता, महामहिम आयतुल्लाह सैयद अली खामेनेई को अपनी श्रद्धांजलि दी.'
भारत के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ कई अन्य भारतीय गणमान्य व्यक्ति भी ईरान गए थे, जिनमें जम्मू और कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद और भारत में अलग-अलग धर्मों का प्रतिनिधित्व करने वाले धार्मिक नेता शामिल थे. ईरान ने कहा, 'हमारे लोग मित्रता, करुणा और सम्मान के भाव को कभी नहीं भूलेंगे. यह हमारे दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही मित्रता को और मजबूत करने के लिए एक मूल्यवान आधार के रूप में काम करेगा.
अमेरिका ने कई देशों को जनाजे में शामिल होने से रोका
तस्नीम न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान में खामेनेई के जनाजे को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच भारी कूटनीतिक खींचतान देखने को मिली. रिपोर्ट में दावा किया गया कि जनाजे से करीब एक हफ्ते पहले ही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और अलग-अलग देशों में मौजूद अमेरिकी राजदूतों ने एक सोची-समझी मुहिम शुरू कर दी थी, ताकि बाकी देशों की सरकारों को इस कार्यक्रम से दूर रखा जा सके. अमेरिकी दूतावासों ने कई सरकारों को साफ तौर पर चेतावनी दी थी कि खामेनेई के जनाजे में शामिल होने को अमेरिका के खिलाफ दुश्मनी माना जाएगा.
कुछ देशों को तो यह भी धमकी दी गई कि अगर वे जनाजे में गए, तो अमेरिका से मिलने वाली सहायता में कटौती की जा सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक दो अरब राजनयिकों के हवाले से बताया गया कि मार्को रुबियो ने खुद कम से कम पांच अरब देशों की सरकारों से संपर्क कर उन्हें तेहरान न जाने की सलाह दी थी. अमेरिकी दवाब का ये असर हुआ कि करीब 13 देशों ने या तो इस जनाजे से पूरी तरह दूरी बना ली या फिर वहां अपनी उपस्थिति बहुत कम रखी.
कई देश खामेनेई की अंतिम सलामी में नहीं हुए शामिल
इनमें पूर्वी यूरोप के तीन, अफ्रीका के पांच, फारस की खाड़ी के दो अरब देश और पूर्वी एशिया के दो बड़े देश शामिल थे, हालांकि रिपोर्ट में इनके नामों का खुलासा नहीं किया गया. फिलहाल इस मामले पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय या मार्को रुबियो की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. खाड़ी देशों के जानकारों का कहना है कि जहां एक तरफ सऊदी अरब, कतर और ओमान ने अमेरिकी दबाव के बावजूद अपने आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल खामेनेई के जनाजे में भेजे, वहीं दूसरी तरफ संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और बहरीन जैसे देश इस कार्यक्रम से पूरी तरह दूर रहे.






















