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Countries With No Trains: इन देशों में नहीं चलती हैं ट्रेनें, प्रतिबंध का कारण जानकर हो जाएंगे हैरान 

हैरानी की बात यह है कि दुनिया में कुछ ऐसे भी देश है, जहां आज तक राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क विकसित नहीं हो सका. इन देशों में लोगों की आवाजाही पूरी तरह सड़क, हवाई या समुद्री परिवहन पर निर्भर करती है.

Countries With No Trains: हमारे देश में ट्रेन आम लोगों की जिंदगी का बहुत बड़ा हिस्सा है. रोजाना करोड़ों यात्री रेल के जरिए एक जगह से दूसरी जगह पर सफर करते हैं और रेलवे को सबसे फायदे व सुविधाजनक परिवहन साधनों में गिना जाता है. दुनिया में रेल परिवहन का इतिहास 200 सालों से भी पुराना है और आज भी कई देश की अर्थव्यवस्था और यातायात का बड़ा आधार रेलवे ही है. लेकिन हैरानी की बात यह है कि दुनिया में कुछ ऐसे भी देश है, जहां आज तक राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क विकसित नहीं हो सका. इन देशों में लोगों की आवाजाही पूरी तरह सड़क, हवाई या समुद्री परिवहन पर निर्भर करती है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि किन देशों में ट्रेन नहीं चलती और यहां पर आप ट्रेन प्रतिबंध का कारण जानकर भी हैरान हो जाएंगे.

कुवैत और ओमान में नहीं चलती है कोई ट्रेन 

तेल उत्पादक के लिए मशहूर कुवैत में अभी तक कोई राष्ट्रीय रेलवे या लंबी दूरी की यात्री रेल सेवा संचालित नहीं होती है. देश के अंदर परिवहन का मुख्य आधार आधुनिक सड़क नेटवर्क है. यहां मेट्रो और रेलवे परियोजना पर काम शुरू करने की योजना बनी है, लेकिन कुछ परियोजना वित्तीय और प्रशासनिक कारणों से आगे नहीं बढ़ सकी. इसी तरह ओमान में भी राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क मौजूद नहीं है. यहां केवल एक पर्यटन स्थल पर छोटी ट्रेन सेवा संचालित होती है. ओमान ने वर्षों से सड़कों और हाईवे के विकास पर ज्यादा ध्यान दिया, हालांकि भविष्य में राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क विकसित करने की योजना पर यहां काम चल रहा है.

इन खाड़ी देशों में भी नहीं चलती लंबी दूरी की ट्रेन 

कुवैत के अलावा कतर, बहरीन और यमन जैसे देशों में भी अभी तक राष्ट्रीय लंबी दूरी की रेल यात्रा सेवा उपलब्ध नहीं है. इन देशों का क्षेत्रफल छोटा है और आबादी भी सीमित है. बेहतर एक्सप्रेस वे, चौड़ी सड़के और प्राइवेट वाहनों का ज्यादा उपयोग होने के कारण यहां सड़क परिवहन ही सबसे प्रमुख साधन बन गया है. हालांकि शहरी क्षेत्र में कुछ देशों ने मेट्रो नेटवर्क विकसित किया है, जिससे शहरों के अंदर आवागमन आसान हुआ है. 

भूटान में आज भी नहीं है रेलवे नेटवर्क

भारत का पड़ोसी देश भूटान उन देश में शामिल है, जहां अब तक कोई राष्ट्रीय रेलवे लाइन नहीं है. पहाड़ी भौगोलिक स्थिति, कम आबादी और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की वजह से यहां रेलवे बनाना आसान नहीं माना गया है. देश के अंदर लोग मुख्य रूप से सड़क मार्ग से यात्रा करते हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए सड़क और हवाई सेवाओं का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि भविष्य में दक्षिण भूटान को पश्चिम बंगाल के रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की योजना पर चर्चा होती रही है, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई रेल लाइन तैयार नहीं हुई है. 

अंडोरा में सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन दूसरे देश में 

यूरोप के छोटे देशों में शामिल अंडोरा का अपना कोई रेलवे नेटवर्क नहीं है. यहां तक पहुंचने के लिए यात्रियों को फ्रांस या स्पेन से सड़क मार्ग का सहारा लेना पड़ता है. यहां सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन फ्रांस की सीमा पर स्थित है. देश के अंदर एक व्यापक बस नेटवर्क मौजूद है, जो अलग-अलग शहरों को आपस में जोड़ने के साथ-साथ पड़ोसी देशों तक भी कनेक्टिविटी देता है. 

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आइसलैंड में कभी नहीं बन सका रेलवे नेटवर्क 

आइसलैंड में कुछ समय के लिए औद्योगिक परियोजनाओं के दौरान अस्थाई रेलवे लाइनों का इस्तेमाल किया गया था. लेकिन वहां कभी स्थाई रेलवे व्यवस्था विकसित नहीं हो सकी. ज्वालामुखीय भूभाग, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और कम आबादी इसकी प्रमुख वजह मानी जाती है. यहां लोग कार, बस, घरेलू उड़ान और फेरी सेवाओं के जरिए यात्रा करते हैं. 

मालदीव में भी नहीं है रेलवे लाइन 

हिंद महासागर में बसे मालदीव में हजार से ज्यादा छोटे बड़े द्वीप और 26 एटोल हैं. ऐसे में पूरे देश में रेलवे नेटवर्क तैयार करना व्यावहारिक नहीं माना गया. अलग-अलग द्वीपों के बीच आवाजाही के लिए फेरी, स्पीड बोट और सी प्लेन का इस्तेमाल होता है जबकि स्थानीय स्तर पर लोग साइकिल स्कूटर और गोल्फ कार्ट जैसे साधनों का उपयोग करते हैं.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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