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क्या मुस्लिम वाकई उल्टे तवे पर बनाते हैं रोटियां, आखिर क्या है इस रिवाज की वजह?
मुस्लिम घरों में उल्टे तवे पर रोटी बनाने के पीछे वैज्ञानिक और व्यावहारिक वजहें हैं. यह तरीका बड़ी रोटियों को कच्चा रहने से बचाने और कम ईंधन में अधिक गर्मी पैदा करने के लिए अपनाया गया था.
भारतीय रसोई में रोटियां बनाने के तरीके जितने विविध हैं, उतनी ही उनसे जुड़ी मान्यताएं भी हैं. अक्सर यह सवाल चर्चा का विषय बनता है कि क्या मुस्लिम परिवारों में रोटियां वाकई उल्टे तवे पर बनाई जाती हैं? कई लोग इसे किसी खास धार्मिक रीति-रिवाज या परंपरा से जोड़कर देखते हैं, जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. इस अनोखे तरीके के पीछे न तो कोई मजहबी मजबूरी है और न ही कोई रहस्यमयी परंपरा. दरअसल, यह पूरी तरह से रसोई के विज्ञान, रोटियों के आकार और उपलब्ध ईंधन के सही इस्तेमाल से जुड़ा एक व्यावहारिक समाधान है, जिसे समय के साथ गलत समझा गया.
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के मुस्लिम परिवारों में ऐतिहासिक रूप से इस तरह के तवे का इस्तेमाल काफी ज्यादा देखा गया है. इन क्षेत्रों की खान-पान संस्कृति में चावल के मुकाबले रोटियों को अधिक प्राथमिकता दी जाती है. यहां बनाई जाने वाली रोटियों का आकार आम रोटियों की तुलना में काफी बड़ा होता है.
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बड़े आकार की इन रोटियों को सामान्य छोटे और सीधे तवों पर सेंकना काफी मुश्किल काम होता है, क्योंकि आंच पूरी रोटी तक एक समान नहीं पहुंच पाती है. इसी समस्या के समाधान के रूप में एक खास बनावट वाले तवे का जन्म हुआ, जिसे आज लोग उल्टा तवा कहते हैं.
Published at : 24 Mar 2026 06:25 PM (IST)
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