देश के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी के तीनों बच्चे ईशा, आकाश और अनंत अबानी परफेक्ट भाई बहन के गोल सेट करते हैं. इन भाई बहन के बीच की बॉन्डिंग देखते ही बनती है. पब्लिक प्लेटफॉर्म पर भी ये एक दूसरे के साथ मजबूती के साथ खड़े नजर आते हैं. ये भाई-बहन के साथ अच्छे दोस्त भी हैं. आईए आपको उनके बचपन की अनदेखी तस्वीरें दिखाते हैं जिनमें तीनों की बॉन्डिंग देखते ही बन रही है. कई तस्वीरों में तो आप उन्हें पहचान भी नहीं पाएंगे.
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मुकेश अंबानी और उनकी पत्नी नीता अंबानी की गोद में खेल रहे ये दोनों बच्चे ईशा अंबानी और आकाश अंबानी हैं. ये दोनों जुड़वा भाई-बहन हैं. इसलिए बचपन में बिलकुल एक जैसे दिख रहे हैं. इनमें ये पहचानना मुश्किल हो जाएगा कि कौन ईशा है और कौन आकाश?
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दादा धीरूभाई अंबानी के साथ कुर्सी के पीछे खड़ी ये प्यारी सी बच्ची ईशा अंबानी हैं. जो बड़ी होकर बहुत खूबसूरत हो गईं हैं.
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ये मुकेश अंबानी के परिवार की एक परफेक्ट फोटो हैं जिसमें तीनों बच्चे दिखाई दे रहे हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि एक वक्त ऐसा भी आया था जब शादी के बाद उन्हें ये कह दिया गया था कि नीता कभी मां नहीं बन सकती. उनकी उम्र उस वक्त सिर्फ 23 साल की थी. ये वक्त उनकी जिन्दगी का सबसे बुरा दौर था.
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23 अक्टूबर 1991 को नीता अंबानी ने दो जुड़वा बच्चों को IVF तकनीक से जन्म दिया, जिनका नाम है ईशा अंबानी और आकाश अंबानी.
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1995 में मुकेश अंबानी और नीता अंबानी एक बार फिर से माता-पिता बने. अनंत अंबानी के जन्म के बाद उनकी फैमिली एक परफेक्ट फैमिली बन गई.
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नीता अबानी ने अपने परिवार को पूरा वक्त दिया और बच्चों की परवरिश पर ध्यान दिया. वो हमेशा मुकेश अंबानी से भी बच्चों को ज्यादा वक्त देने के लिए कहा करती थीं.
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ईशा और आकाश का जन्म मुकेश-नीता की शादी के सात साल बाद हुआ था. दोनों भाई-बहन हमेशा एक दूसरे के साथ पिलर की तरह खड़े दिखाई देते हैं.
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देश के सबसे अमीर घराने में जन्म लेने के बावजूद मां नीता अंबानी ने अपने तीनों बच्चों को बहुत अच्छे संस्कार दिए हैं. उन्हें रीति रिवाजों के साथ पैसे की अहमियत भी सिखाई है.
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अमीर घराने के साथ तीनों बच्चे अपने बिजनेस को भी अच्छे से संभालते हैं. बेतहाशा पैसा होने के बावजूद वो निजी जिन्दगी में काफी डाउन टू अर्थ हैं और इन सब बातों का क्रेडिट उनका मां नीता अंबानी को जाता है.
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एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वो अपने बच्चों को पॉकेट मनी के लिए सिर्फ 5 रुपए देती थी ताकि वो कैंटीन से कुछ खरीद सकें.