महिला आरक्षण बिल: लालू की बेटी रोहिणी आचार्य का छलका दर्द, 'मायके और ससुराल के…'
Women Reservation Bill: महिला आरक्षण बिल पर जारी बहस के बीच रोहिणी आचार्य ने प्रतिक्रिया दी है. महिलाओं को आज किन-किन समस्याओं से जूझना पड़ रहा है इसका जिक्र एक्स पोस्ट में किया है.

महिला आरक्षण बिल (Women Reservation Bill) पर जारी सियासत के बीच आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की बेटी रोहिणी आचार्य (Rohini Acharya) का दर्द छलका है. शुक्रवार (17 अप्रैल, 2026) को उन्होंने अपने एक्स हैंडल से लंबा पोस्ट किया. कहा कि आज मायके और ससुराल के भेदभाव की अग्निपरीक्षा देनी पड़ रही है, ऐसे महिला आरक्षण बिल का क्या औचित्य है?
रोहिणी ने कहा कि हमारे देश में महिलाओं की सुरक्षा, उनके वास्तविक सशक्तीकरण, उनको शिक्षित किए जाने, आत्मनिर्भर बनाए जाने की सार्थकता पर ही सवाल है. बड़ी गरीब आबादी वाले देश में गरीब महिलाओं को शिक्षा पाने से वंचित होना पड़ रहा है.
'महिलाएं चूल्हा-चौका करने को मजबूर'
अपने पोस्ट में रोहिणी आचार्य ने महिलाओं को आज किन-किन समस्याओं से जूझना पड़ रहा है इसका पूरा जिक्र किया है. वे कहती हैं कि महिलाओं के सामाजिक-सार्वजनिक व पेशेवर (प्रोफेशनल) प्रयासों में भी भेदभाव है. उनके आगे बढ़ने के अवसरों में तमाम अड़चनें हैं. महिलाओं की बड़ी आबादी पढ़ने-लिखने के बाद भी चूल्हा-चौका करने को ही मजबूर हैं.
रोहिणी ने कहा कि देश के लगभग हर राज्य में अभी भी पर्दा करने की प्रथा का प्रचलन है. शहर से लेकर गांव तक महिलाओं के द्वारा पहने जाने वाले कपड़ों पर ऐतराज है. निरंतर बलात्कार हो रहा है. दहेज के चलते महिलाएं यौन उत्पीड़न एवं यौन शोषण की शिकार हो रही हैं. न्याय से वंचित होना पड़ रहा है.
सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का किया जिक्र
आगे अपने पोस्ट में वे लिखती हैं, "आत्मसम्मान के लिए अपनी आवाज उठाने पर महिलाओं को आज के दौर में सोशल मीडिया ट्रोलिंग से जूझना पड़ रहा है. मायके और ससुराल के भेदभाव की अग्नि परीक्षा देनी पड़ रही है. पितृसत्तात्मक सोच के वर्चस्व के अधीन रहना पड़ रहा है."
उन्होंने कहा, "आजादी हासिल होने के लगभग आठ दशक के बाद भी हकीकत में बराबरी का दर्जा पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. समाज-परिवार के लिए किए गए उनके त्याग को सौदा बताकर महिलाओं के आत्मविश्वास को तोड़ा जा रहा है. माता-पिता की संपत्ति में बराबर का कानूनी हक हासिल होने के बावजूद महिलाओं-बेटियों को अपने हक से वंचित होना पड़ रहा है."
Source: IOCL



























