'लालू आज तक भुगत रहे, अखिलेश भी दूर रहें...' लोकसभा में नीतीश कुमार का जिक्र कर ललन सिंह का बड़ा बयान
Bihar Politics: केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने लोकसभा के विशेष सत्र के दौरान बिहार की सियासत का एक उदाहरण देते हुए अखिलेश यादव को नसीहत भी दी.

- ललन सिंह ने महिला आरक्षण पर बिहार के उदाहरण से की शुरुआत.
- संसद-विधानसभा में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक पर चर्चा हुई.
- परिसीमन आयोग 2026 से सीटों का होगा पुनर्निर्धारण.
- कांग्रेस पर महिला आरक्षण का समर्थन न करने का आरोप.
लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, संघ राज्यक्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 विधेयक पर चर्चा के दौरान जनता दल यूनाइटेड के नेता और पंचायती राज मंत्री ललन सिंह ने अपने संबोधन की शुरुआत बिहार की राजनीति के उदाहरण से की.
उन्होंने कहा कि 2005 में जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने, तो 2006 में उन्होंने पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का फैसला किया. ललन सिंह ने दावा किया कि उस समय लालू प्रसाद यादव ने इस फैसले का विरोध किया था, जिसका राजनीतिक असर लंबे समय तक देखने को मिला. उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी इस मुद्दे पर सावधान रहने की सलाह दी.
सदन में ललन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुरू से एक स्पष्ट विजन रहा है, जिसमें सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास शामिल है. उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण से जुड़े ये तीनों विधेयक इसी सोच को ध्यान में रखकर लाए गए हैं, ताकि देश की 50 प्रतिशत महिला आबादी को कानून बनाने की प्रक्रिया में पर्याप्त भागीदारी मिल सके.
उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर पहले से 33 प्रतिशत आरक्षण लागू था और कई राज्यों में इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया है. अब संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है. ललन सिंह ने कहा कि 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के जरिए सरकार ने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी थी और अब उसे लागू करने के लिए यह संविधान संशोधन विधेयक लाया गया है.
कांग्रेस बैठक में नहीं आई- ललन सिंह
ललन सिंह ने परिसीमन आयोग 2026 विधेयक का जिक्र करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर विधानसभा और लोकसभा सीटों का पुनर्निर्धारण करना है. उन्होंने कहा कि यदि विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ेगी, तो लोकसभा में भी सीटें बढ़ेंगी और इसके साथ ही महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना संभव होगा. उन्होंने इस प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों को खारिज करते हुए कहा कि इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए.
चर्चा के दौरान कांग्रेस पर निशाना साधते हुए ललन सिंह ने कहा कि विपक्षी दल सामाजिक परिवर्तन के ऐसे कदमों का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व विधेयक का समर्थन नहीं कर रहा है. उन्होंने कहा कि सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी, लेकिन कांग्रेस उसमें नहीं आई.
उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण को जल्दबाजी में लाया गया कदम बताना उचित नहीं है, क्योंकि 2023 से इसकी प्रक्रिया चल रही है और तीन वर्षों की तैयारी के बाद इसे सदन में पेश किया गया है. उन्होंने कहा कि यदि देश की आधी आबादी को संसद और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व दिया जाता है, तो इससे लोकतंत्र मजबूत होगा.
ललन सिंह ने दावा किया कि देश की महिलाएं इस पहल का समर्थन करेंगी और इसका विरोध करने वालों को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
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