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क्या दारू के साथ जरूरी है चखना, भारत में यह कब से बना शराब का साथी?
Chakna With Alcohol: शराब के साथ चखना सिर्फ जेब या स्वाद का खेल नहीं, बल्कि कई साल पुराने कानून, मजदूर संस्कृति और विज्ञान की कहानी है. और यह कहानी आज भी हर गिलास के साथ चुपचाप जारी है.
भारत में शराब का इतिहास जितना पुराना है, उससे कहीं पहले से लोगों में एक आदत जग चुकी थी, पीने के साथ कुछ खाने की. आज यह एक रिवाज जैसा लगता है, लेकिन इसकी शुरुआत अचानक नहीं हुई. इसमें विज्ञान, सामाजिक दबाव, सरकारी नियम, और कामकाजी लोगों की बदलती आदतों का पूरा मिला-जुला खेल है. आइए समझते हैं.
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सबसे पहले समझिए कि चखना क्यों इतना महत्वपूर्ण माना जाता है. शरीर अल्कोहल को सीधे पेट की दीवारों से तेजी से सोख लेता है. अगर पेट खाली हो तो शराब बिजली की तरह खून में फैलती है और नशा असंतुलित रूप से चढ़ जाता है.
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वैज्ञानिक रिसर्च कहती है कि खाना पेट में मौजूद हो तो अल्कोहल का अवशोषण 70-75% तक धीमा हो जाता है. यही वजह है कि दुनिया भर में डॉक्टर भी यही सलाह देते हैं कि पीना हो तो खाली पेट कभी नहीं पीना.
Published at : 02 Dec 2025 08:31 AM (IST)
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