एक्सप्लोरर

एक ट्रेन में क्यों लगाए जाते हैं दो-दो इंजन, कैसे किया जाता है इन्हें कंट्रोल?

Why Two Engines Fitted To A Train: आपने देखा होगा कि किसी ट्रेन के आगे-पीछे दो-दो इंजन लगे होते हैं, लेकिन क्या आपने सोचा है ऐसा क्यों? क्या एक इंजन काफी नहीं होता है. चलिए जानते हैं.

Why Two Engines Fitted To A Train: आपने देखा होगा कि किसी ट्रेन के आगे-पीछे दो-दो इंजन लगे होते हैं, लेकिन क्या आपने सोचा है ऐसा क्यों? क्या एक इंजन काफी नहीं होता है. चलिए जानते हैं.

जब आप किसी ट्रेन या मालगाड़ी को ट्रैक पर दो इंजनों के साथ गुजरते देखते हैं, तो अक्सर दिमाग में सवाल आता है कि आखिर दो इंजन की जरूरत क्यों पड़ती है? क्या एक इंजन पूरी ट्रेन को खींच नहीं सकता? इसका जवाब सीधा है, ट्रेन जितनी भारी और लंबी होती है, उसे खींचने के लिए उतनी ही ज्यादा ताकत की जरूरत होती है, और यही ताकत मिलती है डबल इंजन सिस्टम से. चलिए जानें कि इसे कैसे कंट्रोल किया जाता है.

1/7
भारतीय रेलवे में जब किसी ट्रेन में दो इंजन लगाए जाते हैं, तो इसे मल्टीपल यूनिट ऑपरेशन कहा जाता है. इसका इस्तेमाल खासकर उन ट्रेनों में किया जाता है जो बहुत लंबी दूरी तय करती हैं या जिनका वजन ज्यादा होता है, जैसे मालगाड़ियां, पहाड़ी रूट की ट्रेनें, या फिर लंबे सफर की सुपरफास्ट ट्रेनें.
भारतीय रेलवे में जब किसी ट्रेन में दो इंजन लगाए जाते हैं, तो इसे मल्टीपल यूनिट ऑपरेशन कहा जाता है. इसका इस्तेमाल खासकर उन ट्रेनों में किया जाता है जो बहुत लंबी दूरी तय करती हैं या जिनका वजन ज्यादा होता है, जैसे मालगाड़ियां, पहाड़ी रूट की ट्रेनें, या फिर लंबे सफर की सुपरफास्ट ट्रेनें.
2/7
अब सवाल यह उठता है कि अगर दो इंजन लगाए गए हैं, तो क्या दोनों को अलग-अलग ड्राइवर चलाते हैं? इसका जवाब है- नहीं. दोनों इंजन एक ही ड्राइवर के कंट्रोल में होते हैं.
अब सवाल यह उठता है कि अगर दो इंजन लगाए गए हैं, तो क्या दोनों को अलग-अलग ड्राइवर चलाते हैं? इसका जवाब है- नहीं. दोनों इंजन एक ही ड्राइवर के कंट्रोल में होते हैं.
3/7
इसमें पहले इंजन को लीड इंजन और दूसरे को ट्रेल इंजन कहा जाता है. ये दोनों आपस में MU Cable या मल्टीपल यूनिट केबल से जुड़े होते हैं, जिससे पहले इंजन की हर कमांड जैसे एक्सेलरेटर, ब्रेक या हॉर्न दूसरे इंजन तक भी एक साथ पहुंचती है.
इसमें पहले इंजन को लीड इंजन और दूसरे को ट्रेल इंजन कहा जाता है. ये दोनों आपस में MU Cable या मल्टीपल यूनिट केबल से जुड़े होते हैं, जिससे पहले इंजन की हर कमांड जैसे एक्सेलरेटर, ब्रेक या हॉर्न दूसरे इंजन तक भी एक साथ पहुंचती है.
4/7
रेलवे के इंजीनियर बताते हैं कि जब ट्रेन बहुत भारी होती है, जैसे कोयला, सीमेंट या तेल से भरी मालगाड़ियों में तो एक इंजन की खींचने की क्षमता सीमित होती है. ऐसे में डबल हेडिंग या पुश-पुल टेक्निक का इस्तेमाल किया जाता है.
रेलवे के इंजीनियर बताते हैं कि जब ट्रेन बहुत भारी होती है, जैसे कोयला, सीमेंट या तेल से भरी मालगाड़ियों में तो एक इंजन की खींचने की क्षमता सीमित होती है. ऐसे में डबल हेडिंग या पुश-पुल टेक्निक का इस्तेमाल किया जाता है.
5/7
इसमें एक इंजन आगे खींचता है और दूसरा पीछे से धक्का देता है, जिससे ट्रेन पर बराबर दबाव पड़ता है और स्पीड और बैलेंस दोनों कायम रहते हैं.
इसमें एक इंजन आगे खींचता है और दूसरा पीछे से धक्का देता है, जिससे ट्रेन पर बराबर दबाव पड़ता है और स्पीड और बैलेंस दोनों कायम रहते हैं.
6/7
पहाड़ी इलाकों जैसे दार्जिलिंग, कोंकण या हिमालयन रूट्स पर दो इंजन इसलिए लगाए जाते हैं ताकि ट्रेन को ऊंचाई पर चढ़ने में ज्यादा ताकत मिल सके. वहीं, डाउनहिल यानी नीचे उतरते समय ये इंजन ट्रेन को ब्रेकिंग पावर में मदद करते हैं ताकि ट्रेन नियंत्रण में रहे.
पहाड़ी इलाकों जैसे दार्जिलिंग, कोंकण या हिमालयन रूट्स पर दो इंजन इसलिए लगाए जाते हैं ताकि ट्रेन को ऊंचाई पर चढ़ने में ज्यादा ताकत मिल सके. वहीं, डाउनहिल यानी नीचे उतरते समय ये इंजन ट्रेन को ब्रेकिंग पावर में मदद करते हैं ताकि ट्रेन नियंत्रण में रहे.
7/7
दिलचस्प बात यह है कि पहले इस सिस्टम को मैन्युअल कंट्रोल से चलाया जाता था, लेकिन अब आधुनिक ट्रेनों में डिजिटल इंटरफेस और सैटेलाइट सिंक्रोनाइजेशन के जरिए दोनों इंजनों को एक साथ नियंत्रित किया जा सकता है. इससे न सिर्फ ट्रेन की गति स्थिर रहती है, बल्कि ईंधन की बचत और सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है.
दिलचस्प बात यह है कि पहले इस सिस्टम को मैन्युअल कंट्रोल से चलाया जाता था, लेकिन अब आधुनिक ट्रेनों में डिजिटल इंटरफेस और सैटेलाइट सिंक्रोनाइजेशन के जरिए दोनों इंजनों को एक साथ नियंत्रित किया जा सकता है. इससे न सिर्फ ट्रेन की गति स्थिर रहती है, बल्कि ईंधन की बचत और सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है.

जनरल नॉलेज फोटो गैलरी

Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

दुनिया में नास्तिकों की बढ़ रही है संख्या, जानें लोग क्यों छोड़ रहे धर्म?
दुनिया में नास्तिकों की बढ़ रही है संख्या, जानें लोग क्यों छोड़ रहे धर्म?
अगर डिटेन कर ले पुलिस तो किन बातों का रखें ख्याल?
अगर डिटेन कर ले पुलिस तो किन बातों का रखें ख्याल?
कहां चल रहा कैप्टन मच्छार का इलाज, कौन उठा रहा इसका खर्च?
कहां चल रहा कैप्टन मच्छार का इलाज, कौन उठा रहा इसका खर्च?
परमाणु हमले में भी क्यों नहीं मरते कॉकरोच, कैसे रहते हैं जिंदा?
परमाणु हमले में भी क्यों नहीं मरते कॉकरोच, कैसे रहते हैं जिंदा?

वीडियोज

CJP का 'चलो दिल्ली' मार्च...पूरी तरह फ्लॉप!
फसल तबाह...कौन देगा सहारा? महाराष्ट्र से राजस्थान...परेशान किसान
'वोट चोरी' पर सियासत...हल है हिरासत!
सख्ती का असर...'जंतर-मंतर 2.0' बेअसर!
SIR पर लड़ाई...मीर जाफर तक कैसे आई? बड़ा विश्लेषण

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
दिल्ली: गुरुद्वारे में नारेबाजी पर भड़के कपिल मिश्रा, कहा- केजरीवाल माफी मांगें
दिल्ली: गुरुद्वारे में नारेबाजी पर भड़के कपिल मिश्रा, कहा- केजरीवाल माफी मांगें
मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, 5 की मौत; 10 घर-20 दुकानों को किया आग के हवाले
मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, 5 की मौत; 10 घर-20 दुकानों को किया आग के हवाले
रणजी ट्रॉफी में कुल कितनी टीमें हिस्सा लेती हैं? इस बार क्या है नया; जानें A टू Z डिटेल्स
रणजी ट्रॉफी में कुल कितनी टीमें हिस्सा लेती हैं? इस बार क्या है नया; जानें A टू Z डिटेल्स
'एक बार तो जेल जाना है...', मुंबई प्रोटेस्ट में एक्टर इमरान खान हुए डिटेन, साथ में दिखीं गर्लफ्रेंड
'एक बार तो जेल जाना है...', मुंबई प्रोटेस्ट में एक्टर इमरान खान हुए डिटेन, साथ में दिखीं गर्लफ्रेंड
CJP का चौंकाने वाला दावा, '10 घंटे हो गए, कहां हैं अभिजीत दीपके?'
CJP का चौंकाने वाला दावा, '10 घंटे हो गए, कहां हैं अभिजीत दीपके?'
यूपी: SIR में कटे 85854 वोटरों के नाम? आयोग ने इस मामले पर दी सफाई
यूपी: SIR में कटे 85854 वोटरों के नाम? आयोग ने इस मामले पर दी सफाई
Soft Roti Making Tips: तवे पर नहीं फूलती रोटी? गुब्बारे जैसी फुलाने का जादुई हैक
तवे पर नहीं फूलती रोटी? गुब्बारे जैसी फुलाने का जादुई हैक
गन्ने का दाम बढ़कर 425 रुपये हुआ, किन किसानों को मिलेगा फायदा?
गन्ने का दाम बढ़कर 425 रुपये हुआ, किन किसानों को मिलेगा फायदा?
Embed widget