एक्सप्लोरर

कितना कीमती होता है ज्वालामुखी का लावा, जानें किन-किन चीजों में होता है इस्तेमाल?

ज्वालामुखी से निकलने वाला लावा भले ही विस्फोट के समय तबाही लाता है, लेकिन इसे ठंडा होने के बाद बनने वाली चट्टानें और मिट्टी बहुत उपयोगी और कीमती मानी जाती हैं.

ज्वालामुखी से निकलने वाला लावा भले ही विस्फोट के समय तबाही लाता है, लेकिन इसे ठंडा होने के बाद बनने वाली चट्टानें और मिट्टी बहुत उपयोगी और कीमती मानी जाती हैं.

ज्वालामुखी पृथ्वी की सतह पर बनी वे दरारें होती हैं, जिनसे गर्म लावा, गैस और राख बाहर निकलती है. यह पृथ्वी के अंदर मौजूद पिघली चट्टानों यानी मैग्मा को बाहर आने का रास्ता देती है. वहीं ज्यादातर ज्वालामुखी को हम तबाही से जोड़कर देखते हैं लेकिन सच यह है कि ज्वालामुखी प्रकृति और इंसानों दोनों के लिए कई कीमती चीज भी लेकर आती है. ज्वालामुखी से निकलने वाले लावा से बनी उपजाऊ मिट्टी, कीमती खनिज और ऊर्जा संसाधन इसके बड़े उदाहरण माने जाते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि ज्वालामुखी का लावा कितना कीमती होता है और इसे किन-किन चीजों में इस्तेमाल किया जाता है?

1/6
ज्वालामुखी में जब विस्फोट होता है, उस वक्त उससे निकलने वाला लावा भले ही तबाही लाता है, लेकिन ठंडा होने के बाद इससे बनने वाली चट्टानें और मिट्टी बहुत उपयोगी और कीमती मानी जाती है. लावा से बनने वाले पत्थर, खनिज और मिट्टी का इस्तेमाल खेती से लेकर निर्माण और ज्वेलरी तक में किया जाता है. इसी वजह से ज्वालामुखी का लावा दुनिया के कई देशों में आर्थिक रूप से भी बहुत अहम माना जाता है.
ज्वालामुखी में जब विस्फोट होता है, उस वक्त उससे निकलने वाला लावा भले ही तबाही लाता है, लेकिन ठंडा होने के बाद इससे बनने वाली चट्टानें और मिट्टी बहुत उपयोगी और कीमती मानी जाती है. लावा से बनने वाले पत्थर, खनिज और मिट्टी का इस्तेमाल खेती से लेकर निर्माण और ज्वेलरी तक में किया जाता है. इसी वजह से ज्वालामुखी का लावा दुनिया के कई देशों में आर्थिक रूप से भी बहुत अहम माना जाता है.
2/6
ठंडा होने पर लावा से बेसाल्ट, ऑब्सिडियन और प्यूमिस जैसे खास पत्थर बनते हैं. बेसाल्ट का उपयोग सड़कें, पुल और इमारतें बनाने में बड़े पैमाने पर किया जाता है, क्योंकि यह बहुत मजबूत होता है. वहीं ऑब्सिडियन अपने काले कांच जैसी चमक के कारण गहनों और सजावटी चीजों के लिए इस्तेमाल होता है. इसके अलावा प्यूमिस ब्यूटी प्रोडक्ट, स्क्रब और निर्माण सामग्री में काम आता है.
ठंडा होने पर लावा से बेसाल्ट, ऑब्सिडियन और प्यूमिस जैसे खास पत्थर बनते हैं. बेसाल्ट का उपयोग सड़कें, पुल और इमारतें बनाने में बड़े पैमाने पर किया जाता है, क्योंकि यह बहुत मजबूत होता है. वहीं ऑब्सिडियन अपने काले कांच जैसी चमक के कारण गहनों और सजावटी चीजों के लिए इस्तेमाल होता है. इसके अलावा प्यूमिस ब्यूटी प्रोडक्ट, स्क्रब और निर्माण सामग्री में काम आता है.
3/6
ज्वालामुखी विस्फोट के बाद बनने वाली मिट्टी में प्राकृतिक पोषक तत्व भरपूर रहते हैं. यह मिट्टी फैसले उगाने के लिए बहुत उपयुक्त मानी जाती है. इस मिट्टी की वजह से इटली, हवाई और जापान के कई क्षेत्रों में अंगूर, केला और कॉफी जैसी फसल बड़ी मात्रा में उगाई जाती है. भारत में भी काली मिट्टी वाले कई इलाके पुराने ज्वालामुखी क्षेत्र से बने हैं.
ज्वालामुखी विस्फोट के बाद बनने वाली मिट्टी में प्राकृतिक पोषक तत्व भरपूर रहते हैं. यह मिट्टी फैसले उगाने के लिए बहुत उपयुक्त मानी जाती है. इस मिट्टी की वजह से इटली, हवाई और जापान के कई क्षेत्रों में अंगूर, केला और कॉफी जैसी फसल बड़ी मात्रा में उगाई जाती है. भारत में भी काली मिट्टी वाले कई इलाके पुराने ज्वालामुखी क्षेत्र से बने हैं.
4/6
कुछ ज्वालामुखी का लावा अपने साथ पेरिडॉट, ऑब्सिडियन और कभी-कभी हीरे जैसे कीमती रत्न तक लेकर आते हैं. ये रत्न बाद में ज्वैलरी इंडस्ट्री में बड़ी कीमत पर बिकते हैं. खासकर ऑब्सिडियन और पेरिडॉट को दुनियाभर में खूब पसंद किया जाता है.
कुछ ज्वालामुखी का लावा अपने साथ पेरिडॉट, ऑब्सिडियन और कभी-कभी हीरे जैसे कीमती रत्न तक लेकर आते हैं. ये रत्न बाद में ज्वैलरी इंडस्ट्री में बड़ी कीमत पर बिकते हैं. खासकर ऑब्सिडियन और पेरिडॉट को दुनियाभर में खूब पसंद किया जाता है.
5/6
इसके अलावा ज्वालामुखी क्षेत्र में धरती के अंदर मौजूद गर्मी का इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए किया जाता है. कई देश इसी गर्मी से बिजली बनाते हैं, जिसे भू-तापीय ऊर्जा कहते हैं. यह ऊर्जा सस्ती और प्राकृतिक मानी जाती है.
इसके अलावा ज्वालामुखी क्षेत्र में धरती के अंदर मौजूद गर्मी का इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए किया जाता है. कई देश इसी गर्मी से बिजली बनाते हैं, जिसे भू-तापीय ऊर्जा कहते हैं. यह ऊर्जा सस्ती और प्राकृतिक मानी जाती है.
6/6
ज्वालामुखी के लावा से बने पहाड़, क्रेटर और गर्म झरने बड़ी संख्या में पर्यटकों को भी आकर्षित करते हैं. ऐसे इलाकों में पर्यटन स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय का साधन भी बन जाता है.
ज्वालामुखी के लावा से बने पहाड़, क्रेटर और गर्म झरने बड़ी संख्या में पर्यटकों को भी आकर्षित करते हैं. ऐसे इलाकों में पर्यटन स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय का साधन भी बन जाता है.

जनरल नॉलेज फोटो गैलरी

Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

भारत के किन मंदिरों में पहले से लागू है स्पेशल ड्रेस कोड, यहां देख लीजिए लिस्ट
भारत के किन मंदिरों में पहले से लागू है स्पेशल ड्रेस कोड, यहां देख लीजिए लिस्ट
राम मंदिर का नया 'नो-पॉकेट' ड्रेस कोड, जानिए क्या है ये नियम और किन पर होगा लागू
राम मंदिर का नया 'नो-पॉकेट' ड्रेस कोड, जानिए क्या है ये नियम और किन पर होगा लागू
Earthquake on The Moon:  क्या धरती की तरह चांद पर भी आता है भूकंप, वहां बने इंसानी उपग्रह को क्यों नहीं होता नुकसान?
क्या धरती की तरह चांद पर भी आता है भूकंप, वहां बने इंसानी उपग्रह को क्यों नहीं होता नुकसान?
 Packaged Food Safety: आप जो पैकेज्ड फूड खरीद रहे हैं, कहीं वह रीपैक्ड और एक्सपायर तो नहीं? जानें चेक करने के तरीके
आप जो पैकेज्ड फूड खरीद रहे हैं, कहीं वह रीपैक्ड और एक्सपायर तो नहीं? जानें चेक करने के तरीके

वीडियोज

DR. Aarambhi: 😱Dhruv-Aarambhi को समझ आया Avantika का गेम, क्या फेल होगा नया प्लान? #sbs
Bollywood News: 'धमाल 4' सेंसर बोर्ड से पास, मिला U/A 13+ सर्टिफिकेट, पर मेकर्स को करने पड़े ये बड़े बदलाव  (04-07-2026)
2025 New Yezdi Scrambler Review | पहले से कितनी बेहतर हुई? #scrambler #yezdi #autolive
Renault Duster vs Volkswagen Taigun -Which One Is More Fun to Drive? #duster  #taigun #autolive
Ketan Murder Case : मंगेतर Siya Goyal का सबसे बड़ा झूठ पकड़ा गया || Chetan Chaudhary | ABP Report

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
30 दिन जेल में रहे तो जाएगी PM-CM की कुर्सी! मोदी सरकार के इस बिल से संसद के मानसून सत्र में मचेगा गदर
30 दिन जेल में रहे तो जाएगी PM-CM की कुर्सी! केंद्र के इस बिल से संसद के मानसून सत्र में मचेगा गदर
धौलपुर में तेज रफ्तार का कहर, बस-ट्रक की टक्कर में 33 लोग घायल, 8 की हालत नाजुक
धौलपुर में तेज रफ्तार का कहर, बस-ट्रक की टक्कर में 33 लोग घायल, 8 की हालत नाजुक
Welcome To The Jungle BO Collection: 'वेलकम टू द जंगल' ने 100 करोड़ के क्लब में मारी एंट्री, इतना परसेंट वसूला बजट
बॉक्स ऑफिस: 'वेलकम टू द जंगल' ने 100 करोड़ के क्लब में मारी एंट्री, इतना परसेंट वसूला बजट
सबसे कम उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू करने वाले 7 खिलाड़ी, कितने नंबर पर हैं वैभव सूर्यवंशी
सबसे कम उम्र में इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू करने वाले 7 खिलाड़ी, कितने नंबर पर हैं वैभव सूर्यवंशी
'मैडम सो रही हैं', 1991 के प्लेन हाईजैक के बाद जब डिप्लोमैट ने PM बेनजीर भुट्टो को लगाया था फोन
'मैडम सो रही हैं', 1991 के प्लेन हाईजैक के बाद जब डिप्लोमैट ने PM बेनजीर भुट्टो को लगाया था फोन
'नई ऊंचाइयों पर जाएगी हमारी दोस्ती', अमेरिका की आजादी के 250 साल, PM मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को दी बधाई
'नई ऊंचाइयों पर जाएगी दोस्ती', अमेरिका की आजादी के 250 साल, PM मोदी ने ट्रंप को दी बधाई
अब पाम ऑयल से चलेगी डीजल गाड़ियां, इस देश का बड़ा एनर्जी प्लान हुआ तैयार
अब पाम ऑयल से चलेगी डीजल गाड़ियां, इस देश का बड़ा एनर्जी प्लान हुआ तैयार
Raw Rice vs Parboiled Rice Biryani : कच्चे चावल या पक्के चावल, जानिए किससे बनती है सबसे बेहतरीन बिरयानी
कच्चे चावल या पक्के चावल, जानिए किससे बनती है सबसे बेहतरीन बिरयानी
Embed widget