एक्सप्लोरर
कितने का आता है असली पश्मीना शॉल? इसकी ये खासियत उड़ा देगी आपके होश
वह पश्मीना शॉल है. कहते हैं, इसे हाथ में लेकर देखो तो बादल छूने जैसा एहसास होता है. इतनी मुलायम, इतनी हल्की और इतनी गरम कि विश्वास करना मुश्किल हो जाता है कि यह सिर्फ एक कपड़ा है.
सर्दियां शुरू होते ही बाजार रंग-बिरंगे शॉल और स्टोल से भर जाते हैं. कहीं कश्मीरी शॉल, कहीं ऊनी दुपट्टे, तो कहीं डिजाइनदार स्टोल. लेकिन इन सबके बीच एक नाम ऐसा है, जिसे देखते ही लोग ठहर जाते हैं. वह पश्मीना शॉल है. कहते हैं, इसे हाथ में लेकर देखो तो बादल छूने जैसा एहसास होता है. इतनी मुलायम, इतनी हल्की और इतनी गरम कि विश्वास करना मुश्किल हो जाता है कि यह सिर्फ एक कपड़ा है. ऐसे में आइए आज हम आपको बताते हैं कि आखिर असली पश्मीना शॉल कितने का आता है और इसकी क्या खासियत है.
1/6

पश्मीना असल में कोई सामान्य ऊन नहीं, बल्कि एक बेहद महीन और मुलायम फाइबर है. ये फाइबर चांगथांगी बकरी से मिलता है , जो लद्दाख और हिमालय के ऊंचे, कड़कड़ाती ठंड वाले इलाकों में पाई जाती है. इन इलाकों का तापमान सर्दियों में -30°C तक पहुंच जाता है, इसलिए बकरियों के शरीर पर एक खास तरह का मुलायम अंदरूनी ऊन बनता है. यही असली पश्मीना है.
2/6

पश्मीना बनाने का लगभग हर काम हाथ से होता है. जैसे ऊन को साफ करना, धागा कातनात, शॉल बुनना, रंगाई करना और कढ़ाई. एक अच्छी क्वालिटी की शॉल बनाने में 3–4 महीने तक लग जाते हैं. इसलिए इसकी कीमत सिर्फ ऊन की वजह से नहीं, बल्कि कारीगर की महीनों की मेहनत से बनती है.
Published at : 30 Nov 2025 06:59 PM (IST)
और देखें
Advertisement
Advertisement
Advertisement
टॉप हेडलाइंस
इंडिया
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड
इंडिया
स्पोर्ट्स




























