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Space Lightning: क्या अंतरिक्ष में भी कड़कती है बिजली, जानें धरती से कैसे अलग होती है यह घटना?

Space Lightning: अंतरिक्ष में ना तो बदल होते हैं और ना ही हवा. तो क्या वहां पर बिजली कड़कती है या फिर नहीं. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

Space Lightning: अंतरिक्ष में ना तो बदल होते हैं और ना ही हवा. तो क्या वहां पर बिजली कड़कती है या फिर नहीं. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

Space Lightning: जब भी हम बिजली के बारे में सोचते हैं तो आमतौर पर काले बादल, गरज और आसमान में चमकती हुई तेज रोशनी हमें याद आती है. लेकिन अंतरिक्ष में ना तो बादल होते हैं, ना ही हवा और ना ही मौसम. तो फिर वहां पर बिजली कड़कती है या फिर नहीं. आइए जानते हैं.

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बिजली के लिए धरती पर हवा की जरूरत होती है. इसी के साथ अंतरिक्ष में प्लाज्मा की. बिजली तब बनती है जब बादलों के बीच घर्षण से वातावरण में इलेक्ट्रिक चार्ज का असंतुलन पैदा होता है. अंतरिक्ष में हवा नहीं होती इस वजह से पारंपरिक बिजली नहीं हो सकती. इसीलिए अंतरिक्ष में इलेक्ट्रिक डिसचार्ज प्लाज्मा के जरिए होता है.
बिजली के लिए धरती पर हवा की जरूरत होती है. इसी के साथ अंतरिक्ष में प्लाज्मा की. बिजली तब बनती है जब बादलों के बीच घर्षण से वातावरण में इलेक्ट्रिक चार्ज का असंतुलन पैदा होता है. अंतरिक्ष में हवा नहीं होती इस वजह से पारंपरिक बिजली नहीं हो सकती. इसीलिए अंतरिक्ष में इलेक्ट्रिक डिसचार्ज प्लाज्मा के जरिए होता है.
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धरती पर बिजली का एक झटका एक अरब जूल तक ऊर्जा छोड़ सकता है. यह इंसानी हिसाब से काफी ज्यादा होती है. अंतरिक्ष में पल्सर या ब्लैक होल जैसी चीजों के पास होने वाली बिजली की घटनाएं अरबों गुना ज्यादा ऊर्जा छोड़ती हैं.  इस वजह से उन्हें ब्रह्मांडीय बिजली या फिर मेगा डिस्चार्ज का नाम मिला है.
धरती पर बिजली का एक झटका एक अरब जूल तक ऊर्जा छोड़ सकता है. यह इंसानी हिसाब से काफी ज्यादा होती है. अंतरिक्ष में पल्सर या ब्लैक होल जैसी चीजों के पास होने वाली बिजली की घटनाएं अरबों गुना ज्यादा ऊर्जा छोड़ती हैं. इस वजह से उन्हें ब्रह्मांडीय बिजली या फिर मेगा डिस्चार्ज का नाम मिला है.
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हालांकि खुले अंतरिक्ष में बदल नहीं होते लेकिन कई ग्रहों पर बिजली होती है. बृहस्पति और शनि जैसे गैस वाले ग्रहों पर काफी ज्यादा शक्तिशाली बिजली के तूफान आते हैं. नासा के जूनो मिशन के डेटा से पता चलता है कि बृहस्पति की बिजली धरती की बिजली से काफी ज्यादा शक्तिशाली हो सकती है.
हालांकि खुले अंतरिक्ष में बदल नहीं होते लेकिन कई ग्रहों पर बिजली होती है. बृहस्पति और शनि जैसे गैस वाले ग्रहों पर काफी ज्यादा शक्तिशाली बिजली के तूफान आते हैं. नासा के जूनो मिशन के डेटा से पता चलता है कि बृहस्पति की बिजली धरती की बिजली से काफी ज्यादा शक्तिशाली हो सकती है.
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धरती पर बिजली आसमान में तेज टेढ़ी-मेढ़ी लकीरों के रूप में दिखाई देती है. अंतरिक्ष में इलेक्ट्रिक डिसचार्ज अक्सर चमकते हुए आर्क, रेडिएशन के फटने या फिर अचानक चुंबकीय ऊर्जा निकलने से बने रोशनी के बड़े गोलों के रूप में दिखाई देते हैं.
धरती पर बिजली आसमान में तेज टेढ़ी-मेढ़ी लकीरों के रूप में दिखाई देती है. अंतरिक्ष में इलेक्ट्रिक डिसचार्ज अक्सर चमकते हुए आर्क, रेडिएशन के फटने या फिर अचानक चुंबकीय ऊर्जा निकलने से बने रोशनी के बड़े गोलों के रूप में दिखाई देते हैं.
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धरती की बिजली मुख्य रूप से बादलों में इलेक्ट्रिक चार्ज जमा होने से होती है. अंतरिक्ष में जब मुड़ी हुई या फिर तनाव वाली चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं अचानक टूट जाती हैं या फिर फिर से जुड़ती हैं तो वह काफी ज्यादा मात्रा में ऊर्जा छोड़ती हैं. इससे बिजली जैसा प्रभाव पैदा होता है.
धरती की बिजली मुख्य रूप से बादलों में इलेक्ट्रिक चार्ज जमा होने से होती है. अंतरिक्ष में जब मुड़ी हुई या फिर तनाव वाली चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं अचानक टूट जाती हैं या फिर फिर से जुड़ती हैं तो वह काफी ज्यादा मात्रा में ऊर्जा छोड़ती हैं. इससे बिजली जैसा प्रभाव पैदा होता है.
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अब क्योंकि आवाज को यात्रा करने के लिए हवा की जरूरत होती है इस वजह से अंतरिक्ष की बिजली में कोई भी आवाज नहीं होती. यह डिस्चार्ज गरज और शॉक वेव के बजाय रेडिएशन, रोशनी और चार्ज वाले कणों के रूप में ऊर्जा छोड़ते हैं.
अब क्योंकि आवाज को यात्रा करने के लिए हवा की जरूरत होती है इस वजह से अंतरिक्ष की बिजली में कोई भी आवाज नहीं होती. यह डिस्चार्ज गरज और शॉक वेव के बजाय रेडिएशन, रोशनी और चार्ज वाले कणों के रूप में ऊर्जा छोड़ते हैं.

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