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धरती पर कहां से आए कॉकरोच, युग बदले-महाप्रलय आई डायनासोर मर गए लेकिन ये जिंदा कैसे रह गए?

Cockroach Janta Party Protest: कॉकरोच जनता पार्टी आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रही है. इसी बीच आइए जानते हैं कि आखिरी कॉकरोच धरती पर कैसे आए थे.

Cockroach Janta Party Protest: कॉकरोच जनता पार्टी आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रही है. इसी बीच आइए जानते हैं कि आखिरी कॉकरोच धरती पर कैसे आए थे.

Cockroach Janta Party Protest: कॉकरोच जनता पार्टी दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपना पहला विरोध प्रदर्शन कर रही है. वे NEET-UG पेपर लीक और CBSE, CUET और SSC-GD जैसी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही की मांग कर रहे हैं. पार्टी के नाम ने लोगों में उत्सुकता तो जगाई है साथ ही एक दिलचस्प सवाल भी खड़ा कर दिया है. आखिर कॉकरोच धरती पर कहां से आए थे और महाप्रलय के दौरान जब डायनासोर मर गए तब कॉकरोच कैसे जिंदा रह पाए? आइए जानते हैं क्या है इन सवालों के जवाब.

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कॉकरोच धरती पर सबसे पहले लगभग 30 करोड़ साल पहले कार्बोनिफेरस काल के दौरान आए थे. इसका मतलब है कि पहले डायनासोर के आने से लगभग 12 करोड़ साल पहले ही ये फल फूल रहे थे. जीवाश्मों से यह पता चलता है कि इनके पूर्वज प्राचीन महाद्वीप पेंजिया के घने और नमी वाले जंगलों में रहते थे.
कॉकरोच धरती पर सबसे पहले लगभग 30 करोड़ साल पहले कार्बोनिफेरस काल के दौरान आए थे. इसका मतलब है कि पहले डायनासोर के आने से लगभग 12 करोड़ साल पहले ही ये फल फूल रहे थे. जीवाश्मों से यह पता चलता है कि इनके पूर्वज प्राचीन महाद्वीप पेंजिया के घने और नमी वाले जंगलों में रहते थे.
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इनके जिंदा रहने का एक बड़ा कारण इनके शरीर की बनावट है. कॉकरोच का शरीर कुदरती तौर पर चपटा और लचीला होता है. जिस वजह से वे छोटी-छोटी दरार, जमीन के नीचे की जगह और पत्थरों के नीचे की खाली जगह में घुस सकते हैं. एस्टेरॉइड की टक्कर, जंगल की आग या फिर काफी खराब मौसम जैसी बड़ी आपदाओं के दौरान छिपाने की ये जगहें उन्हें गर्मी, शॉकवेव और पर्यावरण के दूसरे जानलेवा खतरों से बचाती थी.
इनके जिंदा रहने का एक बड़ा कारण इनके शरीर की बनावट है. कॉकरोच का शरीर कुदरती तौर पर चपटा और लचीला होता है. जिस वजह से वे छोटी-छोटी दरार, जमीन के नीचे की जगह और पत्थरों के नीचे की खाली जगह में घुस सकते हैं. एस्टेरॉइड की टक्कर, जंगल की आग या फिर काफी खराब मौसम जैसी बड़ी आपदाओं के दौरान छिपाने की ये जगहें उन्हें गर्मी, शॉकवेव और पर्यावरण के दूसरे जानलेवा खतरों से बचाती थी.
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डायनासोर के उलट जो खास पौधों या फिर शिकार पर निर्भर थे कॉकरोच सब कुछ खाने वाले होते हैं. यह मरे हुए जीवों, सड़ते हुए पेड़ पौधों, कागज, कार्डबोर्ड, बाल, गोंद और यहां तक की सड़ती हुई लकड़ी भी खा सकते हैं.
डायनासोर के उलट जो खास पौधों या फिर शिकार पर निर्भर थे कॉकरोच सब कुछ खाने वाले होते हैं. यह मरे हुए जीवों, सड़ते हुए पेड़ पौधों, कागज, कार्डबोर्ड, बाल, गोंद और यहां तक की सड़ती हुई लकड़ी भी खा सकते हैं.
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कॉकरोच के अंडे एक मजबूत सुरक्षा कवच के अंदर रखे होते हैं. इसे ऊथेका कहा जाता है. यह कवच अंदर पल रहे भ्रूण को गर्मी, ठंड, सूखेपन और पर्यावरण में होने वाले बदलावों से बचाता है. अगर मुश्किल हालात में व्यस्क कॉकरोच मर भी जाएं तो भी उनके अंडे सुरक्षित रह सकते हैं.
कॉकरोच के अंडे एक मजबूत सुरक्षा कवच के अंदर रखे होते हैं. इसे ऊथेका कहा जाता है. यह कवच अंदर पल रहे भ्रूण को गर्मी, ठंड, सूखेपन और पर्यावरण में होने वाले बदलावों से बचाता है. अगर मुश्किल हालात में व्यस्क कॉकरोच मर भी जाएं तो भी उनके अंडे सुरक्षित रह सकते हैं.
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कोल्ड ब्लडेड कीड़े होने की वजह से कॉकरोच को काफी कम एनर्जी की जरूरत होती है. वे बिना खाने के 1 महीने से ज्यादा और बिना पानी के कई हफ्तों तक जिंदा रह सकते हैं. यह अद्भुत सहनशक्ति अकाल और पर्यावरण के बिगड़ने के समय उनके लिए काफी फायदेमंद साबित हुई.
कोल्ड ब्लडेड कीड़े होने की वजह से कॉकरोच को काफी कम एनर्जी की जरूरत होती है. वे बिना खाने के 1 महीने से ज्यादा और बिना पानी के कई हफ्तों तक जिंदा रह सकते हैं. यह अद्भुत सहनशक्ति अकाल और पर्यावरण के बिगड़ने के समय उनके लिए काफी फायदेमंद साबित हुई.
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कॉकरोच रेडिएशन के ऐसे लेवल को भी झेलने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं जिन्हें इंसान नहीं झेल सकते. उनकी कोशिकाएं कई दूसरे जीवों की तुलना में धीरे-धीरे विभाजित होती हैं. इस वजह से उन पर रेडिएशन से होने वाले नुकसान का असर कम होता है.
कॉकरोच रेडिएशन के ऐसे लेवल को भी झेलने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं जिन्हें इंसान नहीं झेल सकते. उनकी कोशिकाएं कई दूसरे जीवों की तुलना में धीरे-धीरे विभाजित होती हैं. इस वजह से उन पर रेडिएशन से होने वाले नुकसान का असर कम होता है.

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