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क्या पूरे देश में होगा प्लास्टिक नोटों का ट्रायल, कैसे चुने जाते हैं शहर?

Polymer Notes India: भारत में पॉलीमर नोट लाने की तैयारी चल रही है. इसी बीच आइए जानते हैं कि आखिर इन नोटों का ट्रायल कैसे किया जाता है और शहरों को कैसे चुना जाता है.

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  • केंद्र सरकार ने प्लास्टिक करेंसी लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
  • आरबीआई ₹10, ₹20 के 200 करोड़ पॉलीमर नोटों का परीक्षण करेगा।
  • चुनिंदा शहरों में अलग-अलग मौसम, उपयोग में नोटों की मज़बूती जाँची जाएगी।
  • ये नोट कागजी नोटों के साथ चलेंगे, जो अधिक टिकाऊ होंगे।

Polymer Notes India: केंद्र सरकार ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के प्लास्टिक करेंसी नोट लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. लेकिन इन्हें तुरंत पूरे देश में लागू नहीं किया जाएगा. इसके बजाय आरबीआई पहले चुनिंदा इलाकों में ₹10 और ₹20 के 200 करोड़ पॉलीमर नोटों का फील्ड ट्रायल करेगा. इस पायलट प्रोजेक्ट का मकसद पूरे देश में इन्हें लागू करने पर विचार करने से पहले अलग-अलग मौसम और इस्तेमाल की स्थिति में पॉलीमर नोटों की मजबूती और परफॉर्मेंस को परखना है. आइए जानते हैं कि आरबीआई ट्रायल के लिए किन शहरों को चुनता है और यह कैसे तय होता है.

आरबीआई के पायलट प्रोजेक्ट में सिर्फ चुनिंदा शहर ही शामिल होंगे 

आरबीआई नई करेंसी नोटों की टेस्टिंग के लिए शहरों को रैंडम तरीके से नहीं चुनता. इसके बजाय आरबीआई कुछ ऐसी जगह को चुनता है जो भारत की अलग-अलग भौगोलिक प्रमोशन की स्थिति को दर्शाती हैं. ऐसा इसलिए ताकि नोटों को अलग-अलग मौसम के हालात में परखा जा सके. पहले के पायलट प्लान में जयपुर, शिमला, भुवनेश्वर, मैसूर और कोच्चि जैसे शहरों को चुना गया था. अलग-अलग माहौल में नोटों की टेस्टिंग से आरबीआई को यह समझने में मदद मिलती है कि पॉलीमर करेंसी देश भर में अलग-अलग स्थितियों में कैसे काम करती है.

अलग-अलग मौसम की स्थिति जरूरी 

पायलट प्रोजेक्ट का एक मुख्य मकसद यह देखना होता है कि क्या पॉलीमर नोट पारंपरिक कागजी करेंसी की तुलना में भारत की अलग-अलग पर्यावरणीय और जलवायु स्थिति का बेहतर तरीके से सामना कर सकते हैं या नहीं. ट्रायल के दौरान आरबीआई इस बात को देखेगा कि ज्यादा तापमान, काफी ज्यादा नमी, भारी बारिश, उमस, धूल, रगड़ और लोगों द्वारा इसके लगातार इस्तेमाल किए जाने पर नोट कैसे काम करता है. पूरे देश में इन्हें लागू करने का फैसला लेने से पहले नोटों की मजबूती और उनकी उम्र पर बारीकी से नजर रखी जाएगी. 


क्या पूरे देश में होगा प्लास्टिक नोटों का ट्रायल, कैसे चुने जाते हैं शहर?

₹10 और ₹20 के 200 करोड़ नोट शामिल 

सरकार ने संसद को बताया कि फील्ड ट्रायल में कुल 200 करोड़ पॉलीमर नोट शामिल किए जाएंगे. इनमें ₹10 के 100 करोड़ नोट और ₹20 के 100 करोड़ नोट होंगे. आरबीआई के सेंट्रल बोर्ड की सिफारिश के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट 1934 की धारा 25 के तहत इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है. इन नोटों की छपाई भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड करेगी. यह आरबीआई की पूरी तरह से अपनी सब्सिडियरी कंपनी है. 

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₹10 के और ₹20 के नोट ही क्यों चुने गए?

आरबीआई ने जान-बूझकर ₹10 और ₹20 के नोट चुने हैं क्योंकि रोजाना के लेन-देन में इनका ही सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है. यह नोट हर दिन कई बार हाथों-हाथ बदलते हैं. इस वजह से मुड़ने, पसीने, गंदगी और नमी की वजह से इनका जल्दी खराब होने का डर रहता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक आरबीआई हर साल लगभग 2000 से 2400 करोड़ खराब हो चुके नोट नष्ट करता है. इनमें कम कीमत वाले नोटों का बड़ा हिस्सा होता है. 

पॉलीमर नोट के साथ कागजी नोट भी चलते रहेंगे 

पॉलीमर करेंसी लाने का मतलब यह नहीं है कि अभी चल रहे कागजी नोट चलन से बाहर हो जाएंगे. आरबीआई ने यह साफ किया है कि कागज और प्लास्टिक दोनों तरह के नोट कानूनी तौर पर मान्य रहेंगे और एक साथ चलन में रहेंगे. इस पायलट प्रोजेक्ट का मकसद इस बात को देखना है कि क्या पॉलीमर नोट बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए सही हैं. ऐसा इसलिए ताकि बाद में इन्हें चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने पर विचार किया जा सके.


क्या पूरे देश में होगा प्लास्टिक नोटों का ट्रायल, कैसे चुने जाते हैं शहर?

पॉलीमर नोट के फायदे और चुनौती 

हालांकि पॉलीमर नोट आमतौर पर कागजी नोट की तुलना में ढाई से चार गुना ज्यादा समय तक चलते हैं लेकिन उनके साथ कुछ चुनौतियां भी हैं. इनकी शुरुआती छपाई का खर्च कॉटन बेस्ड कागज ने नोट की तुलना में 30% से 60% ज्यादा होने का अनुमान है. पूरे देश में इन्हें लागू करने के लिए एटीएम, बैंक की कैश सॉर्टिंग मशीन और वेंडिंग मशीनों को भी री-कैलिब्रेट करना होगा. इससे खर्चे और बढ़ेगा. 

भारत आंशिक रूप से आयातित बायएक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन पर काफी ज्यादा निर्भर है. यह पॉलीमर नोट बनाने में इस्तेमाल होने वाला मुख्य पदार्थ है. कागजी नोट के उलट जो बायोडिग्रेडेबल होते हैं पॉलीमर नोट के जीवन चक्र के अंत में खास इंडस्ट्रियल रीसाइकलिंग सुविधा की जरूरत होती है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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