एक्सप्लोरर

कितने पढ़े-लिखे हैं प्रेमानंद महाराज को चुनौती देने वाले रामभद्राचार्य, जानें उन्हें कितनी भाषाओं का ज्ञान?

रामभद्राचार्य ने कठिन आर्थिक हालात में भी संस्कृत व्याकरण में पीएचडी और डीलिट की उपाधि हासिल की. उन्होंने उच्च पदों को ठुकराकर अपना जीवन धर्म, समाज और दिव्यांग जनों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया.

रामभद्राचार्य ने कठिन आर्थिक हालात में भी संस्कृत व्याकरण में पीएचडी और डीलिट की उपाधि हासिल की. उन्होंने उच्च पदों को ठुकराकर अपना जीवन धर्म, समाज और दिव्यांग जनों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया.

रामभद्राचार्य का नाम हाल ही में खूब चर्चा में है. वजह है उनका प्रेमानंद महाराज को दी गई चुनौती. धार्मिक मंचों पर अक्सर संतों और आचार्यों के विचारों को लेकर बहस होती रहती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर रामभद्राचार्य कौन हैं, उनकी पढ़ाई-लिखाई कैसी है और उन्हें कितनी भाषाओं का ज्ञान है.

1/7
रामभद्राचार्य का जन्म उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में हुआ था. बचपन से ही उनका रुझान धर्म और शास्त्रों की ओर था. दृष्टिहीन होने के बावजूद उन्होंने अपनी लगन और मेहनत से वो हासिल किया जो आम इंसान सोच भी नहीं सकता. उनकी गिनती आज देश के विद्वान संतों में होती है.
रामभद्राचार्य का जन्म उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में हुआ था. बचपन से ही उनका रुझान धर्म और शास्त्रों की ओर था. दृष्टिहीन होने के बावजूद उन्होंने अपनी लगन और मेहनत से वो हासिल किया जो आम इंसान सोच भी नहीं सकता. उनकी गिनती आज देश के विद्वान संतों में होती है.
2/7
रामभद्राचार्य ने पढ़ाई-लिखाई के क्षेत्र में मिसाल कायम की. उन्होंने संस्कृत, वेद, उपनिषद, पुराण और रामायण जैसे ग्रंथों का गहरा अध्ययन किया. उन्हें वेदांताचार्य, कवि और वक्ता के रूप में भी जाना जाता है.
रामभद्राचार्य ने पढ़ाई-लिखाई के क्षेत्र में मिसाल कायम की. उन्होंने संस्कृत, वेद, उपनिषद, पुराण और रामायण जैसे ग्रंथों का गहरा अध्ययन किया. उन्हें वेदांताचार्य, कवि और वक्ता के रूप में भी जाना जाता है.
3/7
रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से पढ़ाई की है.  1974 में शास्त्री (बीए) की अंतिम परीक्षा में उन्होंने टॉप किया और इसके बाद आचार्य (एमए) की पढ़ाई भी इसी विश्वविद्यालय से शुरू कर दी. मास्टर्स के बाद उन्होंने पीएचडी भी की.
रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से पढ़ाई की है. 1974 में शास्त्री (बीए) की अंतिम परीक्षा में उन्होंने टॉप किया और इसके बाद आचार्य (एमए) की पढ़ाई भी इसी विश्वविद्यालय से शुरू कर दी. मास्टर्स के बाद उन्होंने पीएचडी भी की.
4/7
डॉक्टरेट पूरी होने के बाद उन्हें संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में व्याकरण विभाग का अध्यक्ष बनने का ऑफर मिला, लेकिन उन्होंने यह जिम्मेदारी ठुकरा दी.
डॉक्टरेट पूरी होने के बाद उन्हें संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में व्याकरण विभाग का अध्यक्ष बनने का ऑफर मिला, लेकिन उन्होंने यह जिम्मेदारी ठुकरा दी.
5/7
रामभद्राचार्य की विद्वता का एक और बड़ा उदाहरण 9 मई 1997 को सामने आया, जब उन्हें संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से वाचस्पति (डी.लिट.) की उपाधि दी गई.
रामभद्राचार्य की विद्वता का एक और बड़ा उदाहरण 9 मई 1997 को सामने आया, जब उन्हें संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से वाचस्पति (डी.लिट.) की उपाधि दी गई.
6/7
रामभद्राचार्य न सिर्फ एक धार्मिक विद्वान हैं बल्कि एक भाषाविद भी हैं. उन्हें हिंदी और संस्कृत के अलावा कई अन्य भाषाओं का गहरा ज्ञान है. बताया जाता है कि वे करीब 22 भाषाओं को जानते हैं. इनमें हिंदी, संस्कृत, उर्दू, अवधी, ब्रजभाषा, मैथिली, अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाएं शामिल हैं.
रामभद्राचार्य न सिर्फ एक धार्मिक विद्वान हैं बल्कि एक भाषाविद भी हैं. उन्हें हिंदी और संस्कृत के अलावा कई अन्य भाषाओं का गहरा ज्ञान है. बताया जाता है कि वे करीब 22 भाषाओं को जानते हैं. इनमें हिंदी, संस्कृत, उर्दू, अवधी, ब्रजभाषा, मैथिली, अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाएं शामिल हैं.
7/7
रामभद्राचार्य ने अब तक कई किताबें और लेख लिखे हैं. उन्होंने रामायण और गीता पर विस्तृत टीकाएं लिखकर विद्वानों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई. उनके लेखन में गहराई और सरलता दोनों का संतुलन देखने को मिलता है.
रामभद्राचार्य ने अब तक कई किताबें और लेख लिखे हैं. उन्होंने रामायण और गीता पर विस्तृत टीकाएं लिखकर विद्वानों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई. उनके लेखन में गहराई और सरलता दोनों का संतुलन देखने को मिलता है.

शिक्षा फोटो गैलरी

Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

UP युवा कल्याण विभाग में 412 पदों पर भर्ती, 16 अक्टूबर तक भरें फॉर्म
UP युवा कल्याण विभाग में 412 पदों पर भर्ती, 16 अक्टूबर तक भरें फॉर्म
राजस्थान 10वीं बोर्ड में हुआ बड़ा बदलाव, अब साल में 2 बार होगी परीक्षा
राजस्थान 10वीं बोर्ड में हुआ बड़ा बदलाव, अब साल में 2 बार होगी परीक्षा
स्पोर्ट्स कोटा से CRPF में 521 पदों पर भर्ती, जानें कौन है एलिजिबल
स्पोर्ट्स कोटा से CRPF में 521 पदों पर भर्ती, जानें कौन है एलिजिबल
विदेश में MBBS करने वालों के लिए राहत, NMC ने फिर शुरू किया EC आवेदन
विदेश में MBBS करने वालों के लिए राहत, NMC ने फिर शुरू किया EC आवेदन

वीडियोज

Sandeep Chaudhary: वोट चोरी पर बवाल...आयुक्तों के बाद जजों के सवाल! | EC | SIR | Gyanesh Kumar
Gyanesh Kumar | Supreme Court on CEC: ज्ञानेश कुमार को छोड़नी पड़ेगी कुर्सी? | BJP | Congress | ABP
Supreme Court on Gyanesh Kumar: विपक्ष Vs ज्ञानेश, अंतिम फैसला अभी है शेष! | BJP | Congress | ABP
Supreme Court Hearing on CEC Gyanesh: ज्ञानेश कुमार पर SC ने क्या कहा? | Congress | BJP | ABP News
Sansani | UP News: दगाबाज सनम...बेवफा बवाल ! | Meerut

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
INDIA गठबंधन के मार्च से AAP की दूरी, क्या करेंगे एमके स्टालिन? कांग्रेस ने दिया अपडेट
INDIA गठबंधन के मार्च से AAP की दूरी, क्या करेंगे एमके स्टालिन? कांग्रेस ने दिया अपडेट
पूरे बिहार में DJ पर रोक, हुड़दंगियों की खैर नहीं, दुर्गा पूजा पर गाइडलाइन जारी
पूरे बिहार में DJ पर रोक, हुड़दंगियों की खैर नहीं, दुर्गा पूजा पर गाइडलाइन जारी
नेटफ्लिक्स पर अक्टूबर में एंटरटेनमेंट का महा-डोज, रिलीज होंगी 9 धमाकेदार फिल्में-सीरीज
नेटफ्लिक्स पर अक्टूबर में एंटरटेनमेंट का महा-डोज, रिलीज होंगी 9 धमाकेदार फिल्में-सीरीज
‘काला सागर हो या खाड़ी, हमें...’, नाविकों पर हमले पर जयशंकर की दो टूक
‘काला सागर हो या खाड़ी, हमें...’, नाविकों पर हमले पर जयशंकर की दो टूक
वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 में कैसा है टीम इंडिया का रिकॉर्ड? एक क्लिक में जानें
वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 में कैसा है टीम इंडिया का रिकॉर्ड? एक क्लिक में जानें
सुप्रीम कोर्ट को मिले 3 नए जज, महिला जजों की संख्या बढ़कर हुई तीन
सुप्रीम कोर्ट को मिले 3 नए जज, महिला जजों की संख्या बढ़कर हुई तीन
SC के नोटिस पर BJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस, पात्रा बोले- 'तानाशाही-डर का माहौल...'
SC के नोटिस पर BJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस, पात्रा बोले- 'तानाशाही-डर का माहौल...'
केले के साथ क्यों नहीं रखने चाहिए दूसरे फल, जान लीजिए काम की बात?
केले के साथ क्यों नहीं रखने चाहिए दूसरे फल, जान लीजिए काम की बात?
Embed widget