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Car Door Slamming Rule: इस देश में जोर से गाड़ी का दरवाजा बंद करना गैर कानूनी, पकड़े जाने पर मिलती है कड़ी सजा

Car Door Slamming Rule: दुनिया में एक ऐसा देश भी है जहां पर जोर से गाड़ी का दरवाजा बंद करने पर जुर्माना लग सकता है. आइए जानते हैं कौन सा है वह देश.

Car Door Slamming Rule: सोचिए कि आप एक ऐसे देश में हैं जहां जोर से कार का दरवाजा बंद करने पर भी आपको जुर्माना देना पड़ सकता है. स्विट्जरलैंड में ऐसा हकीकत में हो सकता है. यह देश अपने सख्त नियमों के लिए जाना जाता है. इन नियमों का मकसद रिहायशी इलाकों में शांति बनाए रखना है और गाड़ी का दरवाजा जोर से बंद करने जैसी आम बात को भी कानून का उल्लंघन माना जा सकता है.

स्विट्जरलैंड का राइट टू साइलेंस नियम 

स्विस समाज शांति और पब्लिक ऑर्डर को काफी ज्यादा जोर देता है. इस वजह से अधिकारी लोगों को गड़बड़ी से बचाने के लिए शोर के बड़े नियम लागू करते हैं. ये नियम राइट टू साइलेंस नाम के कॉन्सेप्ट के तहत आते हैं. इससे यह पक्का होता है कि लोग बिना फालतू शोर के आराम कर सकें.

स्विट्जरलैंड एक सख्त नियम का पालन करता है जिसे नैचट्रूहे कहा जाता है. इसका मतलब है रात की शांति. इस नियम के तहत कुछ घंटों के दौरान ऐसी आवाज या फिर एक्टिविटी पर रोक लगा दी जाती है जो लोगों को परेशान करती है. आम तौर पर यह घंटे रात 10 बजे से शुरू होते हैं और इलाके के हिसाब से सुबह 6 या फिर 7 बजे तक चलते हैं. इस दौरान लोगों से यह उम्मीद की जाती है कि वह ऐसा फालतू शोर ना करें जिससे पड़ोसियों को परेशानी हो सकती है. 

कार का दरवाजा जोर से बंद करने पर रोक 

इस नियम का मुख्य मकसद रहने वालों की नींद और शांति की रक्षा करना है. खासकर अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स और शांत इलाकों में. स्विस अधिकारियों का ऐसा मानना है कि ऐसा शोर कम से कम किया जाना चाहिए जिससे बचा जा सके. क्योंकि कार के दरवाजे जोर से बंद करने पर तेज आवाज आ सकती है, इसलिए ड्राइवरों से उम्मीद की जाती है कि वह उन्हें धीरे से बंद करें.

नियम का कानूनी आधार 

यह रोक स्विट्जरलैंड के ट्रैफिक और पब्लिक ऑर्डर नियमों से आई है. इसमें कहा गया है कि ड्राइवरों को किसी भी गैर जरूरी शोर से बचना चाहिए. इन कानूनों के तहत शांत घंटों में कार के दरवाजे, ट्रंक या फिर हुड जोर से बंद करने जैसी हरकतों को पब्लिक शांति में खलल माना जा सकता है. अगर अधिकारियों को शिकायतें मिलती हैं तो जिम्मेदार व्यक्ति को चेतावनी दी जा सकती है या फिर जुर्माना भी लगाया जा सकता है. 

उल्लंघन के लिए जुर्माना 

 शोर से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने पर पैसे का जुर्माना लग सकता है. कई मामलों में अगर गड़बड़ी छोटी है तो अधिकारी पहले चेतावनी दे सकते हैं. हालांकि बार-बार या फिर गंभीर उल्लंघन करने पर जुर्माना लग सकता है. यह जुर्माना हालात और लोकल कैंटन के नियमों के आधार पर लगभग 100 सीएचएफ या उससे भी ज्यादा हो सकता है. भारतीय मुद्रा में यह रकम ₹9000 के लगभग होगी.

शोर का पता लगाने के लिए नई टेक्नोलॉजी 

स्विस शहर भी काफी ज्यादा शोर पर नजर रखने के लिए एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के साथ एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं. जिनेवा और बेसल जैसे कुछ शहरों ने नॉइज रडार सिस्टम की टेस्टिंग शुरू कर दी है. ये डिवाइस स्पीड कैमरों की तरह काम करते हैं लेकिन इसके बजाय उन गाड़ियों का पता लगाते हैं जो एक तय डेसिबल लिमिट से ज्यादा शोर करती हैं. आमतौर पर लगभग 82 डेसिबल.

यह भी पढ़ें: क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जानें कैसे मिला था इसे इसका यह नाम?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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