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यूपीएससी क्लियर करने वाले कैंडिडेट्स का कैसे तय होता है कैडर, क्या है इसका प्रोसेस?
आमतौर पर कैडर तय करते समय तीन मुख्य बातों को ध्यान में रखा जाता है. जिसमें पहली उम्मीदवार की यूपीएससी रैंक, दूसरी उम्मीदवार की ओर से दी गई राज्य की पसंद और तीसरी राज्यों में उपलब्ध वैकेंसी होती है.
यूपीएससी ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया है. इस साल कुल 958 उम्मीदवारों को चयनित किया गया है जो आगे चलकर आईएएस, आईपीएस, आईएफएस समेत कई केंद्रीय सेवाओं में नियुक्त किए जाएंगे. वहीं यूपीएससी 2025 में राजस्थान के रहने वाले अनुज अग्निहोत्री ने टॉप किया है. अनुज के बाद राजेश्वरी दूसरे नंबर पर और एकांश धूल तीसरे नंबर पर रहे. वहीं रिजल्ट जारी होने के साथ ही उम्मीदवारों और आम लोगों के बीच एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में आ गया है कि आखिर यूपीएससी पास करने के बाद अधिकारियों का कैडर कैसे तय होता है और किस राज्य में उनको पोस्टिंग मिलती है.
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सिविल सेवा परीक्षा पास करना किसी भी उम्मीदवार के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होती है. लेकिन इसके बाद एक अहम प्रक्रिया शुरू होती है जिसे केडर एलोकेशन कहा जाता है. इसी के जरिए तय होता है कि चुने गए अधिकारी को किस राज्य या संयुक्त कैडर में अपनी सेवा देनी होगी और उनके करियर का बड़ा हिस्सा किस राज्य में बीतेगा.
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आमतौर पर कैडर तय करते समय तीन मुख्य बातों को ध्यान में रखा जाता है. जिसमें पहली उम्मीदवार की यूपीएससी रैंक, दूसरी उम्मीदवार की ओर से दी गई राज्यों की पसंद और तीसरी अलग-अलग राज्यों में उपलब्ध वैकेंसी होती है. इन सभी के आधार पर केंद्र सरकार अधिकारी को किसी राज्य या संयुक्त कैडर में नियुक्त करती है.
Published at : 07 Mar 2026 02:55 PM (IST)
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