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24 जुलाई से शुरू हुआ ग्रहों का बड़ा फेरबदल, नौकरी-धन और रिश्तों पर पड़ेगा सीधा प्रभाव

Planet Transit 2026: जुलाई और अगस्त 2026 में शनि वक्री, उच्च गुरु और 12 अगस्त को सूर्यग्रहण का आप पर बड़ा प्रभाव पड़ने जा रहा है, जानिए करियर, धन और 12 राशियों का सटीक ज्योतिषीय विश्लेषण.

Planet Transit July-August 2026: जुलाई और अगस्त 2026 में सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र और शनि की चाल में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन होंगे. कर्क राशि में उच्च के गुरु, मीन में वक्री शनि और राहु-केतु की स्थायी स्थिति के बीच आपके करियर, धन, रिश्तों और बड़े फैसलों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है, कैसे? आइए जानते हैं विस्तृत ज्योतिषीय विश्लेषण.

जुलाई और अगस्त 2026 का समय ज्योतिषीय दृष्टि से केवल राशि परिवर्तन का सामान्य सिलसिला नहीं है. इन दो महीनों में एक ओर देवगुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में रहेंगे, वहीं दूसरी ओर शनि मीन राशि में वक्री होकर बीते फैसलों और अधूरे दायित्वों की समीक्षा कराएंगे.

बुध की वक्री चाल समाप्त होगी, लेकिन संचार और निर्णयों में स्थिरता धीरे-धीरे लौटेगी. अगस्त में मंगल मिथुन राशि में पहुंचकर सूचना, मीडिया, राजनीति और व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा को तेज करेगा.

इसी बीच 12 अगस्त को पूर्ण सूर्यग्रहण भी लगेगा. यह भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक मान्य नहीं होगा, लेकिन खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से यह अगस्त की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल रहेगा.

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यह पूरा दौर एक सीधा संकेत देता है, तेजी से बदलती परिस्थितियों में वही लोग आगे निकलेंगे, जो प्रतिक्रिया देने से पहले तथ्य जांचेंगे और बड़े फैसलों में धैर्य रखेंगे.

जुलाई-अगस्त 2026 के प्रमुख ग्रह परिवर्तन

  • 4 जुलाई: शुक्र का सिंह राशि में प्रवेश
  • 15 जुलाई: गुरु तारा अस्त  
  • 16 जुलाई: सूर्य का कर्क राशि में गोचर 
  • 24 जुलाई: बुध का मार्गी होना
  • 27 जुलाई: शनि का मीन राशि में वक्री होना
  • 29 जुलाई: कर्क राशि में सूर्य और गुरु की युति
  • 1 अगस्त: शुक्र का कन्या राशि में प्रवेश
  • 2 अगस्त: मंगल का मिथुन राशि में गोचर
  • 5 अगस्त: बुध का कर्क राशि में पुनः प्रवेश
  • 12 अगस्त: पूर्ण सूर्यग्रहण और गुरु तारा उदय
  • 15 अगस्त: बुध और गुरु की कर्क राशि में युति
  • 17 अगस्त: सूर्य का सिंह राशि में प्रवेश
  • 22 अगस्त: बुध का सिंह राशि में प्रवेश
  • 27 अगस्त: सिंह राशि में सूर्य-बुध की युति

कर्क राशि में उच्च के गुरु: अवसर बड़े होंगे, लेकिन परिणाम तुरंत नहीं मिलेंगे

बृहस्पति 2 जून 2026 से कर्क राशि में हैं. वैदिक ज्योतिष में कर्क गुरु की उच्च राशि मानी जाती है. गुरु ज्ञान, शिक्षा, संतान, न्याय, धर्म, आर्थिक विस्तार और दीर्घकालीन नीतियों के कारक हैं. इसलिए उनका कर्क में रहना शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, आवास, जनकल्याण, खाद्य सुरक्षा और पारिवारिक विषयों को प्रमुखता दे सकता है.

लेकिन 15 जुलाई से 12 अगस्त तक गुरु तारा अस्त रहेंगे. गुरु अस्त 15 जुलाई की शाम से शुरू होकर 12 अगस्त की सुबह समाप्त होगा. इस दौरान गुरु उच्च राशि में तो रहेंगे, लेकिन उनकी शुभता का सहज प्रभाव कुछ दबा हुआ माना जाएगा.

इसका अर्थ यह नहीं कि सभी शुभ परिणाम रुक जाएंगे. संकेत यह है कि ज्ञान और अवसर मौजूद होंगे, लेकिन सही सलाह मिलने, स्वीकृति आने या परिणाम सामने आने में समय लग सकता है. विवाह, गृहप्रवेश और बड़े मांगलिक कार्यों में स्थानीय पंचांग तथा परंपरा के अनुसार मुहूर्त देखना उचित रहेगा.

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16 जुलाई को सूर्य का कर्क में प्रवेश: सत्ता से अधिक संवेदनशीलता की परीक्षा

सूर्य 16 जुलाई की रात कर्क राशि में प्रवेश करेंगे. कर्क जल तत्व की राशि है और सूर्य अग्नि तत्व के ग्रह हैं. यह मेल प्रशासन, नेतृत्व और अधिकार से जुड़े लोगों को केवल आदेश देने के बजाय जनभावनाओं को समझने के लिए बाध्य कर सकता है.

सरकारी नीतियों, शिक्षा, आवास, जल प्रबंधन, कृषि और जनकल्याण के विषय चर्चा में आ सकते हैं. व्यक्तिगत स्तर पर माता-पिता, घर, संपत्ति और काम के बीच संतुलन साधने की आवश्यकता बढ़ेगी.

29 जुलाई को कर्क राशि में सूर्य और गुरु की निकट युति बनेगी. उच्च के गुरु के साथ सूर्य का आना प्रभावशाली फैसलों और प्रतिष्ठा का संकेत दे सकता है, लेकिन गुरु अस्त होने के कारण अतिआत्मविश्वास से बचना होगा. पद बड़ा होने का अर्थ यह नहीं कि हर फैसला सही ही होगा.

24 जुलाई को बुध मार्गी: उलझे संवाद सुलझेंगे, लेकिन जल्दबाजी अभी भी नुकसान करेगी

बुध 29 जून से वक्री थे और 24 जुलाई को मार्गी होंगे. के अनुसार बुध 24 जुलाई की सुबह सीधी चाल शुरू करेंगे. इस बदलाव के बाद अटके दस्तावेज, भुगतान, इंटरव्यू, तकनीकी कार्य, अनुबंध और बातचीत आगे बढ़ सकती है.

पुरानी गलतफहमियां भी स्पष्ट होने लगेंगी. हालांकि बुध के मार्गी होते ही उसी दिन सब कुछ सामान्य हो जाए, ऐसा मानना ठीक नहीं होगा. जुलाई के अंतिम सप्ताह में भेजे जाने वाले महत्वपूर्ण ईमेल, कानूनी कागजात और आर्थिक समझौते दोबारा जांचना बेहतर रहेगा.

पत्रकारिता, डिजिटल मीडिया, शिक्षा और तकनीक से जुड़े लोगों के लिए यह रुके हुए कामों को दोबारा व्यवस्थित करने का समय होगा.

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27 जुलाई से शनि वक्री: अधूरे दायित्व फिर सामने आएंगे

शनि 27 जुलाई को मीन राशि में वक्री होंगे और 11 दिसंबर तक इसी चाल में रहेंगे. शनि की वक्री अवधि कुल 138 दिनों की होगी.

मीन राशि कल्पना, करुणा, अध्यात्म, समुद्र, अस्पताल, संस्थागत व्यवस्था और अदृश्य तंत्रों से जुड़ी मानी जाती है. यहां वक्री शनि उन व्यवस्थाओं की परीक्षा ले सकते हैं, जिनकी कमियां लंबे समय से छिपी हुई थीं.

व्यक्तिगत जीवन में यह गोचर पुराने कर्ज, अधूरे काम, स्वास्थ्य-अनुशासन और पारिवारिक जिम्मेदारियों की याद दिलाएगा. जिस समस्या को केवल टालकर आगे बढ़ा दिया गया था, वह फिर सामने आ सकती है. शनि का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि कमजोर नींव को उजागर करना है.

अगस्त की शुरुआत में शुक्र और मंगल बदलेंगे माहौल

1 अगस्त को शुक्र कन्या राशि में प्रवेश करेंगे. कन्या शुक्र की नीच राशि मानी जाती है. यह स्थिति प्रेम और संबंधों में भावनाओं से अधिक कमियों पर ध्यान दिला सकती है. अपेक्षाएं बढ़ेंगी और छोटी बातों पर आलोचना संबंधों में दूरी पैदा कर सकती है.

आर्थिक मामलों में यह गोचर दिखावे के खर्च कम करने और बजट को व्यवस्थित करने के लिए उपयोगी रहेगा. फैशन, मनोरंजन, सौंदर्य और लग्जरी उद्योगों में आकर्षक प्रचार के बावजूद उपभोक्ता अधिक व्यावहारिक रुख अपना सकते हैं.

2 अगस्त की रात मंगल मिथुन राशि में पहुंचेंगे. यह गोचर संवाद में तेजी, बहस में आक्रामकता और एक साथ कई काम शुरू करने की प्रवृत्ति बढ़ा सकता है. मीडिया, इंटरनेट, परिवहन, बिक्री, मार्केटिंग और चुनावी संचार में प्रतिस्पर्धा तेज होने की संभावना रहेगी.

मंगल मिथुन में शब्दों को हथियार बना सकता है. इसलिए अगस्त में बिना जांचे जानकारी साझा करना, गुस्से में संदेश भेजना या सोशल मीडिया पर त्वरित प्रतिक्रिया देना नुकसानदेह हो सकता है.

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12 अगस्त का सूर्यग्रहण: भारत में सूतक नहीं, लेकिन घटना महत्वपूर्ण

12 अगस्त 2026 को पूर्ण सूर्यग्रहण लगेगा. पूर्णता का मार्ग ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, अटलांटिक महासागर और स्पेन से होकर गुजरेगा. भारत इस ग्रहण के दृश्य क्षेत्र में नहीं होगा, इसलिए यहां धार्मिक मान्यता के अनुसार सूतक लागू नहीं माना जाएगा.

ज्योतिष में सूर्यग्रहण को सत्ता, नेतृत्व, प्रतिष्ठा और सामूहिक दिशा में परिवर्तन से जोड़ा जाता है. चूंकि ग्रहण कर्क राशि के क्षेत्र में होगा, इसलिए जल, आवास, सीमाओं, परिवार-नीति और जनभावनाओं से जुड़े मुद्दे चर्चा में आ सकते हैं.

इसी दिन गुरु तारा उदय भी होगा. इसलिए अगस्त का मध्य भ्रम से स्पष्टता की ओर बढ़ने वाला मोड़ बन सकता है. जुलाई से लंबित शिक्षा, विवाह, सलाह, निवेश या संस्थागत निर्णयों में इसके बाद कुछ गति दिखाई दे सकती है.

अगस्त का दूसरा पखवाड़ा: नेतृत्व, प्रतिष्ठा और संवाद पर जोर

15 अगस्त को कर्क राशि में बुध और गुरु की निकट युति बनेगी. यह शिक्षा, लेखन, रणनीति, परामर्श और नीतिगत चर्चा के लिए महत्वपूर्ण समय हो सकता है. विचार बड़े होंगे, लेकिन भावनात्मक पक्षपात से बचना जरूरी रहेगा.

17 अगस्त को सूर्य अपनी राशि सिंह में प्रवेश करेंगे. इससे नेतृत्व, प्रशासन, प्रतिष्ठा, रचनात्मकता और आत्मविश्वास के विषय अधिक मुखर होंगे. 22 अगस्त को बुध भी सिंह राशि में आ जाएंगे और 27 अगस्त को सूर्य-बुध की युति बनेगी. यह समय बड़े वक्तव्य, घोषणाओं और प्रभावशाली प्रस्तुतियों का हो सकता है.

लेकिन सिंह में केतु की उपस्थिति यह भी बताएगी कि केवल पद और प्रचार लंबे समय तक प्रभाव नहीं बचा सकते. नेतृत्व को परिणाम और विश्वसनीयता से अपनी बात साबित करनी होगी.

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राहु-कुंभ और केतु-सिंह का लगातार प्रभाव

जुलाई और अगस्त में राहु कुंभ तथा केतु सिंह राशि में बने रहेंगे. राहु का कुंभ में होना तकनीक, डिजिटल नेटवर्क, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सोशल मीडिया और भीड़ की मनोवृत्ति को मजबूत करता है. कोई विचार बहुत तेजी से लोकप्रिय हो सकता है, लेकिन लोकप्रियता उसकी सत्यता का प्रमाण नहीं होगी.

केतु सिंह में नेतृत्व, प्रसिद्धि और व्यक्तिगत छवि के मोह पर चोट करते हैं. जिन लोगों या संस्थाओं का पूरा प्रभाव केवल चेहरे, प्रचार अथवा पद पर टिका है, उन्हें विश्वसनीयता की परीक्षा से गुजरना पड़ सकता है.

जुलाई-अगस्त में किन क्षेत्रों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा?

करियर और नौकरी

बुध मार्गी होने से जुलाई के अंतिम सप्ताह के बाद इंटरव्यू, प्रोजेक्ट और लंबित बातचीत में गति आएगी. शनि वक्री होने के बाद पुराने प्रदर्शन, अधूरे लक्ष्य और जवाबदेही का सवाल उठ सकता है. नई भूमिका स्वीकार करने से पहले अधिकार, लक्ष्य और रिपोर्टिंग व्यवस्था साफ कर लें.

धन और निवेश

उच्च के गुरु दीर्घकालीन आर्थिक सोच को समर्थन देते हैं, लेकिन गुरु अस्त और शुक्र के कन्या में आने के कारण आकर्षक ऑफर की बारीक शर्तें पढ़ना जरूरी होगा. बिना विशेषज्ञ सलाह के बड़े निवेश या कर्ज का निर्णय न लें.

रिश्ते और परिवार

जुलाई में परिवार और घरेलू जिम्मेदारियां केंद्र में रहेंगी. अगस्त में शुक्र कन्या में होने से आलोचना बढ़ सकती है. रिश्तों में यह पूछना अधिक उपयोगी होगा कि समस्या कैसे सुलझेगी, बजाय इसके कि गलती किसकी थी.

स्वास्थ्य

शनि की वक्री चाल पुराने स्वास्थ्य विषयों को दोबारा ध्यान में ला सकती है. नींद, पाचन, तनाव और अनियमित दिनचर्या को नजरअंदाज न करें. ज्योतिषीय संकेत चिकित्सकीय जांच या उपचार का विकल्प नहीं हैं.

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12 राशियों के लिए कैसा रहेगा, जानें राशिफल

  • मेष: घर, संपत्ति और परिवार से जुड़े अवसर बन सकते हैं, लेकिन खर्च और नींद पर ध्यान दें. सामाजिक संपर्क लाभ देंगे.
  • वृषभ: करियर में दृश्यता बढ़ेगी. मेहनत का लाभ मिल सकता है, पर घर और कार्यस्थल के बीच संतुलन जरूरी होगा.
  • मिथुन: आय और परिवार के विषय महत्वपूर्ण रहेंगे. अगस्त में मंगल आपकी राशि में आकर ऊर्जा बढ़ाएंगे, लेकिन क्रोध और जल्दबाजी से बचें.
  • कर्क: उच्च के गुरु आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं. अचानक खर्च, स्वास्थ्य और पारिवारिक संवाद में सावधानी रखें.
  • सिंह: अगस्त का दूसरा पखवाड़ा प्रभाव बढ़ाएगा, लेकिन संबंधों में अहंकार से बचें. विदेश, यात्रा या आध्यात्मिक विषयों पर खर्च हो सकता है.
  • कन्या: आय और संपर्कों से लाभ संभव है. अगस्त में शुक्र आपकी राशि में रहेंगे; संबंधों में जरूरत से ज्यादा आलोचना न करें.
  • तुला: करियर में विस्तार की संभावना है. कार्यभार बढ़ेगा, लेकिन अनुशासन से विरोधियों और बाधाओं पर नियंत्रण पाया जा सकता है.
  • वृश्चिक: शिक्षा, यात्रा और भाग्य का सहयोग मिलेगा. घर और करियर के बीच खींचतान हो सकती है.
  • धनु: संयुक्त धन, कर्ज और साझेदारी के मामले सावधानी से संभालें. अगस्त में वैवाहिक या व्यावसायिक संबंधों में बहस से बचें.
  • मकर: गुरु साझेदारी और सहयोग के अवसर देंगे. वाणी, बचत और पारिवारिक मामलों में राहु जल्दबाजी करा सकते हैं.
  • कुंभ: काम, स्वास्थ्य और जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं. अपनी छवि और संबंधों से जुड़े फैसले आवेग में न लें.
  • मीन: गुरु शिक्षा, संतान और रचनात्मक कार्यों में सहयोग देंगे. शनि आपकी राशि में वक्री होकर अनुशासन, स्वास्थ्य और आत्ममूल्यांकन पर जोर देंगे.

इन दो महीनों में क्या करें?

जुलाई के अंतिम सप्ताह तक महत्वपूर्ण दस्तावेज और संवाद दोबारा जांचें. 27 जुलाई के बाद पुराने कर्ज, अधूरे काम और कानूनी या प्रशासनिक जिम्मेदारियों की सूची बनाएं. अगस्त में सोशल मीडिया, ईमेल और सार्वजनिक बयान भेजने से पहले तथ्य सत्यापित करें.

नए अवसरों से पीछे हटने की जरूरत नहीं है, लेकिन बिना तैयारी के छलांग लगाना भी उचित नहीं होगा. जुलाई-अगस्त 2026 का ग्रह-संदेश स्पष्ट है, यह समय चमत्कार की प्रतीक्षा करने का नहीं, बल्कि अधूरे काम समेटकर मजबूत निर्णय लेने का है.

डिस्क्लेमर: यह लेख वैदिक ज्योतिष की पारंपरिक मान्यताओं और निरयण ग्रह-गणना पर आधारित है. इसका उद्देश्य सामान्य जानकारी देना है. वित्त, स्वास्थ्य, कानून या करियर से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह से ही लें.

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FAQ

1. जुलाई 2026 में बुध कब मार्गी होंगे?
बुध 24 जुलाई 2026 को मिथुन राशि में मार्गी चाल शुरू करेंगे.

2. शनि 2026 में कब वक्री होंगे?
शनि 27 जुलाई 2026 को मीन राशि में वक्री होंगे और 11 दिसंबर 2026 तक वक्री अवस्था में रहेंगे.

3. मंगल अगस्त 2026 में किस राशि में गोचर करेंगे?
मंगल 2 अगस्त 2026 की रात मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे.

4. अगस्त 2026 का सूर्यग्रहण कब लगेगा?
पूर्ण सूर्यग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगेगा. यह भारत में दिखाई नहीं देगा.

5. सूर्य अगस्त 2026 में सिंह राशि में कब जाएंगे?
सूर्य 17 अगस्त 2026 को अपनी राशि सिंह में प्रवेश करेंगे.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader

"ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है."

हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.

वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता और IIMT University Meerut से ज्योतिष शास्त्र व वास्तु शास्त्र की पढ़ाई की है और Astrosage व Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम किया है. मीडिया, ऑडियंस बिहेवियर, डिजिटल पब्लिशिंग और कंटेंट रणनीति की समझ ने उनके काम को अलग पहचान दी है.

हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है. वर्तमान में CJP आंदोलन को लेकर उनकी भविष्यवाणियां सत्य साबित हुईं हैं, उनके विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, मेदिनी ज्योतिष और समाज की बदलती मानसिकता की समझ पर आधारित होते हैं.

वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.

डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.

उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.

श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.

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