एक्सप्लोरर

घर में कबूतर का आना और घोंसला बनाना: शुभ या अशुभ? जानिए नारद संहिता और वास्तु का सच

क्या आपके घर में भी कबूतर (kabootar) घोंसला बना रहा है? जानें नारद संहिता और वास्तु शास्त्र के अनुसार इसके शुभ-अशुभ संकेत, बुध-राहु दोष और बचाव के आसान उपाय.

Vastu Tips: सुबह की शुरुआत हो और बालकनी की मुंडेर पर कबूतरों की गुटरगूं सुनाई न दे, ऐसा आजकल कम ही होता है. कंक्रीट के जंगलों में तब्दील होते शहरों में कबूतर हमारे दैनिक जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं.

कभी वे खिड़की के कोने में सुस्ताते दिखते हैं, तो कभी एसी के पीछे तिनके बटोरकर अपना आशियाना बनाते नजर आते हैं. हममें से कई लोग बेहद प्यार से उन्हें रोज दाना-पानी देते हैं, तो कई बार उनकी फैलाई गंदगी से परेशान होकर उन्हें भगाने के जतन भी करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ज्योतिष, वास्तु और हमारे प्राचीन शास्त्रों में कबूतर के इस तरह घर आने और वास करने को लेकर क्या कहा गया है?

सनातन परंपरा में पक्षियों की हर गतिविधि का सीधा संबंध घर की ऊर्जा और सदस्यों के भाग्य से जोड़ा गया है. विशेष रूप से प्रसिद्ध ग्रंथ 'नारद संहिता' के शकुन विचार अध्याय में कपोत यानी कबूतर के आगमन, उसकी ध्वनियों और उसके घोंसला बनाने के परिणामों का बहुत ही गहराई से वर्णन किया गया है.

आज के समय में जब लोग वास्तु दोषों को लेकर काफी सतर्क रहते हैं, तब यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि शास्त्रों के अनुसार कबूतर का आगमन कब शुभ फल देता है और कब यह चिंता का विषय बन सकता है.

नारद संहिता के अनुसार कबूतर का आगमन: लक्ष्मी और शांति का संकेत

नारद संहिता के अनुसार, कपोत मूल रूप से सुख, शांति और देवी लक्ष्मी की कृपा का प्रतिनिधि पक्षी माना गया है. यदि कोई कबूतर आपके घर के प्रांगण, छत या बालकनी में आकर शांत भाव से बैठता है या वहां बिखरा दाना चुगता है, तो शकुन शास्त्र इसे एक अत्यंत शुभ संकेत मानता है. इसे घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश और 'लक्ष्मी आगमन' की पूर्व सूचना माना जाता है.

शास्त्रों में यह भी उल्लेख मिलता है कि यदि सुबह के प्रथम प्रहर में आपको घर के आसपास कबूतर की धीमी और स्पष्ट गुटरगूं सुनाई देती है, तो यह इस बात का संकेत है कि आपके जीवन में चल रही आर्थिक तंगी जल्द दूर होने वाली है.

यह ध्वनि आपके रुके हुए कार्यों के गति पकड़ने और व्यापार में अचानक लाभ होने का पूर्व आभास कराती है. प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, जिस घर में पक्षियों का नियमित और सहज आना-जाना बना रहता है, उस घर का वातावरण नकारात्मक शक्तियों से मुक्त रहता है.

यह भी पढ़ें- Evening Rules: शाम के समय घर में भूलकर भी न करें ये 5 काम, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी हो सकती हैं नाराज

घर में घोंसला बनाना: जब वास्तु शास्त्र देता है चेतावनी

कबूतर का घर में आकर दाना चुगना जितना सुखद माना जाता है, घर के भीतर उसका स्थायी ठिकाना बना लेना वास्तु शास्त्र और नारद संहिता दोनों की दृष्टि से विचारणीय विषय है. नारद संहिता के शकुन प्रकरण में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यदि कपोत किसी गृहस्थ के भवन के अंदरूनी हिस्से जैसे अलमारी के ऊपर, खिड़की के कांच के पीछे या बालकनी के शेड में अपना नीड़ (घोंसला) बनाकर अंडे देता है, तो वहां दरिद्रता और मानसिक अशांति पनपने लगती है.

इसके पीछे का व्यावहारिक और वास्तु संबंधी कारण बेहद सीधा है. कबूतर अपने घोंसले के लिए सूखे तिनके, जाले और गंदगी इकट्ठा करता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के किसी कोने में तिनकों और गंदगी का संचय होना राहु और शनि के नकारात्मक प्रभाव को न्योता देता है.

जब घर में राहु का प्रभाव बढ़ता है, तो घर के सदस्यों की निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होने लगती है. बनते हुए काम अंतिम क्षणों में बिगड़ने लगते हैं, और घर में अकारण ही बेफिजूल के खर्चे बढ़ने लगते हैं. इसी वजह से प्राचीन ग्रंथों में घर के भीतर कबूतर के घोंसले को आर्थिक अस्थिरता का सूचक माना गया है.

ज्योतिषीय दृष्टिकोण: बुध और राहु का अनोखा खेल

ज्योतिष शास्त्र में कबूतर का सीधा संबंध हमारी कुंडली के बुध ग्रह से माना गया है. बुध को बुद्धि, व्यापार, वाणी और वित्तीय प्रबंधन का कारक माना जाता है. नारद संहिता में वर्णित सिद्धांतों के आधार पर देखें तो जब आप अपने घर से बाहर किसी खुले स्थान, पार्क या छत पर कबूतरों को बाजरा, ज्वार या गेहूं डालते हैं, तो आपकी कुंडली में पीड़ित या कमजोर बुध ग्रह बलवान होने लगता है. इसके शुभ प्रभाव से व्यक्ति की बुद्धि तेज होती है, व्यापारिक फैसलों में सटीकता आती है और वाणी में मिठास बढ़ती है.

लेकिन वहीं दूसरी ओर, यदि कबूतर घर की बालकनी या खिड़कियों के अंदर अत्यधिक गंदगी फैलाते हैं और उस स्थान की समय पर सफाई नहीं की जाती, तो यही शुभ फल देने वाला बुध ग्रह राहु के दूषित प्रभाव में आ जाता है.

जब बुध और राहु का ऐसा नकारात्मक मेल घर के वातावरण में बनता है, तो परिवार के सदस्यों में बेवजह का मानसिक तनाव, गृह-क्लेश और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं.

बेजुबान से प्रेम और घर की स्वच्छता: कैसे बनाएं संतुलन?

शास्त्रों में जीव दया को सबसे बड़ा धर्म बताया गया है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि कबूतरों के प्रति करुणा भी बनी रहे और घर का वास्तु भी न बिगड़े, इसके लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए?

सबसे पहला नियम यह है कि कबूतरों को दाना हमेशा घर के मुख्य दायरे से बाहर या छत के बिल्कुल खुले हिस्से में ही दें. कभी भी घर के अंदरूनी हिस्सों या बालकनी की ग्रिल के ठीक पास दाना न डालें, क्योंकि इससे पक्षी घर के अंदर ही अपना आशियाना बनाने के लिए प्रोत्साहित होते हैं. इसके अलावा, जिस स्थान पर पक्षी आकर बैठते हों, उस जगह की रोजाना पानी से धुलाई करें ताकि गंदगी से पैदा होने वाला वास्तु दोष दूर रहे.

यदि आपके घर के किसी कोने में कबूतर ने घोंसला बना भी लिया है, तो उसे हटाते समय विशेष संवेदनशीलता बरतें. यह सुनिश्चित करें कि घोंसले में कोई अंडा या छोटा बच्चा न हो. यदि अंडे या बच्चे मौजूद हों, तो उनके बड़े होने और उड़ जाने तक का धैर्य रखें. किसी भी जीव को कष्ट पहुंचाकर या उसके अंडे तोड़कर किया गया वास्तु उपाय कभी शुभ फल नहीं दे सकता.

वास्तु और आस्था का सही मेल

सरल शब्दों में कहें तो कबूतर का आपके घर के आसपास आना, दाना चुगना और मधुर गुटरगूं करना आपकी खुशहाली और बेहतर भविष्य का ही संकेत है. नारद संहिता और वास्तु शास्त्र हमें बस यह सिखाते हैं कि बेजुबान पक्षियों के प्रति हमारा प्रेम घर की व्यवस्था और स्वच्छता की कीमत पर नहीं होना चाहिए.

यदि आप घर को साफ-सुथरा रखते हैं और पक्षियों को खुले स्थान पर दाना-पानी देते हैं, तो आप वास्तु दोषों से बचे रहकर कबूतर के आगमन के सभी शुभ और सकारात्मक फल आसानी से प्राप्त कर सकते हैं.

घर में कबूतर के आगमन से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. क्या घर में कबूतर का आना शुभ होता है?
उत्तर: हां, शकुन शास्त्र और नारद संहिता के अनुसार कबूतर का घर की छत या बालकनी में आकर बैठना और दाना चुगना बेहद शुभ माना जाता है. यह घर में सकारात्मक ऊर्जा और लक्ष्मी के आगमन का संकेत होता है.

Q2. नारद संहिता के अनुसार घर के अंदर कबूतर का घोंसला बनना क्या संकेत देता है?
उत्तर: नारद संहिता के शकुन प्रकरण के अनुसार, घर के अंदरूनी हिस्सों में कबूतर का घोंसला बनाना और अंडे देना अच्छा नहीं माना जाता. यह घर में दरिद्रता, मानसिक तनाव और आर्थिक अस्थिरता का संकेत देता है.

Q3. कबूतर का घोंसला बनने से कौन सा वास्तु दोष लगता है?
उत्तर: कबूतर द्वारा घोंसले के लिए जमा किए गए तिनके और गंदगी से घर में राहु और शनि के नकारात्मक प्रभाव बढ़ते हैं. इससे बनते काम अंतिम समय में अटक सकते हैं और बेवजह के खर्चे बढ़ जाते हैं.

Q4. कबूतर को दाना खिलाने से किस ग्रह का दोष दूर होता है?
उत्तर: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कबूतर का संबंध बुध ग्रह से होता है. खुले स्थान पर कबूतरों को बाजरा या ज्वार डालने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होता है, जिससे बुद्धि, व्यापार और वाणी में सुधार आता है.

Q5. घर से कबूतर का घोंसला हटाते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए?
उत्तर: घोंसला हटाते समय यह सुनिश्चित करें कि उसमें कोई अंडा या छोटा बच्चा न हो. यदि अंडे या बच्चे हों, तो उनके उड़ जाने तक प्रतीक्षा करें. किसी भी बेजुबान जीव को नुकसान पहुंचाए बिना ही सफाई करनी चाहिए.

Q6. कबूतरों को दाना कहां डालना सही माना जाता है?
उत्तर: कबूतरों को दाना हमेशा घर के मुख्य दायरे से बाहर, पार्क में या छत के खुले स्थान पर ही डालना चाहिए. बालकनी या घर के अंदर दाना डालने से बचें, ताकि वे अंदर घोंसला न बनाएं.

यह भी पढ़ें- Sawan 2026: सावन में 23 साल बाद महासंयोग, 17 अगस्त का दिन क्यों होगा खास जानें

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हृदेश कुमार सिंह । Hirdesh Kumar Singh 

Senior Vedic Astrologer । Head – Religion & Astrology, ABP Live । Lead – ABP Dharma LIVE

हृदेश कुमार सिंह वरिष्ठ वैदिक ज्योतिषाचार्य और मीडिया पेशेवर हैं. उन्हें ज्योतिष, धर्म और मीडिया के क्षेत्र में 17 साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे ABP Live में Religion & Astrology वर्टिकल का नेतृत्व करते हैं. साथ ही ABP Dharma LIVE की कंटेंट और डिजिटल रणनीति की जिम्मेदारी संभालते हैं.

उनके काम में ज्योतिषीय लेखन, संपादन, वेबसाइट और वीडियो के लिए विषय चयन तथा संपादकीय योजना शामिल है. वे Search, Google Discover और सोशल मीडिया पर पाठकों की रुचि को ध्यान में रखकर धर्म और ज्योतिष की कवरेज तय करते हैं.

पंचांग, राशिफल, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार और धार्मिक परंपराएं उनके लेखन के प्रमुख विषय हैं. वे करियर, विवाह, शिक्षा और व्यापार से जुड़े सवालों पर भी लिखते हैं. राजनीति और सामाजिक घटनाओं पर उनके ज्योतिषीय विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर और मेदिनी ज्योतिष पर आधारित होते हैं. इनमें ग्रह स्थितियों को संभावित संकेतों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), नई दिल्ली से पत्रकारिता और IIMT University, मेरठ से ज्योतिष शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र की शिक्षा ग्रहण की है. वे AstroSage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म के साथ भी काम कर चुके हैं. उन्होंने Semrush Academy से 'Content Marketing Essentials for SEO and AI Search with Semrush' सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है.

नई पीढ़ी के पाठकों के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे प्रारूप पर काम किया है. इसमें पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और रोजमर्रा के फैसलों से जुड़े सवालों को राशिफल में जगह दी गई है. उनके लेख धार्मिक परंपराओं से जुड़े उन प्रश्नों पर भी केंद्रित होते हैं, जो बदलती जीवनशैली में सामने आते हैं.

वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु उनके अध्ययन एवं लेखन के विषय हैं. उनका मानना है, 'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

MLC Election Result LIVE: नागपुर में कांग्रेस प्रत्याशी ने ली बढ़त, यूपी की 10 तो बिहार की 7 सीटों के नतीजे घोषित
LIVE: नागपुर में कांग्रेस प्रत्याशी ने ली बढ़त, यूपी की 10 तो बिहार की 7 सीटों के नतीजे घोषित
वाराणसी MLC रिजल्ट: अखिलेश का BJP पर तंज, 'लखनऊ वाले दिल्ली वालों का फोन नहीं उठा रहे'
वाराणसी MLC रिजल्ट: अखिलेश का BJP पर तंज, 'लखनऊ वाले दिल्ली वालों का फोन नहीं उठा रहे'
‘नेतृत्व शून्य, नीति शून्य और परिणाम भी’, MLC चुनाव में कांग्रेस के 'जीरो' पर फायर हुई बीजेपी
‘नेतृत्व शून्य, नीति शून्य और परिणाम भी’, MLC चुनाव में कांग्रेस के 'जीरो' पर फायर हुई बीजेपी
अजय देवगन की 'दृश्यम 3' का 26वें दिन भी भौकाल, जानें- 400 करोड़ से रह गई कितनी दूर
'दृश्यम 3' की नहीं थम रही रफ्तार, 26वें दिन भी दमदार हुई कमाई

वीडियोज

Sansani: बैंक का 'गोलमाल'... ग्राहक 'कंगाल' !
Ballot Paper पर जीरो, अब क्या करेगी Congress?
Form-6 पर Supreme Court में क्या बहस हुई? सटीक विश्लेषण
MLC का नतीजा UP में 2027 का करेगा फैसला? सटीक विश्लेषण
YRKKH:🫨Badi Dadi ने मेहमानों के सामने Abhira को दिए ताने, बवाल के बीच Maira-Kabir का हुआ सामना #sbs

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
MLC Election Result LIVE: नागपुर में कांग्रेस प्रत्याशी ने ली बढ़त, यूपी की 10 तो बिहार की 7 सीटों के नतीजे घोषित
LIVE: नागपुर में कांग्रेस प्रत्याशी ने ली बढ़त, यूपी की 10 तो बिहार की 7 सीटों के नतीजे घोषित
वाराणसी MLC रिजल्ट: अखिलेश का BJP पर तंज, 'लखनऊ वाले दिल्ली वालों का फोन नहीं उठा रहे'
वाराणसी MLC रिजल्ट: अखिलेश का BJP पर तंज, 'लखनऊ वाले दिल्ली वालों का फोन नहीं उठा रहे'
‘नेतृत्व शून्य, नीति शून्य और परिणाम भी’, MLC चुनाव में कांग्रेस के 'जीरो' पर फायर हुई बीजेपी
‘नेतृत्व शून्य, नीति शून्य और परिणाम भी’, MLC चुनाव में कांग्रेस के 'जीरो' पर फायर हुई बीजेपी
अजय देवगन की 'दृश्यम 3' का 26वें दिन भी भौकाल, जानें- 400 करोड़ से रह गई कितनी दूर
'दृश्यम 3' की नहीं थम रही रफ्तार, 26वें दिन भी दमदार हुई कमाई
WPL 2027 के लिए सभी 5 टीमें, ऑक्शन में किसने किसे खरीदा? जानें A टू Z डिटेल
WPL 2027 के लिए सभी 5 टीमें, ऑक्शन में किसने किसे खरीदा? जानें A टू Z डिटेल
इंडिया गठबंधन की 1 नवंबर की रैली को CJP सपोर्ट करेगी या नहीं? अभिजीत दीपके ने कर दिया ऐलान
इंडिया गठबंधन की 1 नवंबर की रैली को CJP सपोर्ट करेगी या नहीं? अभिजीत दीपके ने कर दिया ऐलान
Viral Video: बाजार की मिठाई खाने वालों देख लो...वीडियो देख आ जाएगी घिन्न
बाजार की मिठाई खाने वालों देख लो...वीडियो देख आ जाएगी घिन्न
What Is CC: क्या ज्यादा CC का मतलब है ज्यादा पावर, या कुछ और है स्पीड की गणित?
क्या ज्यादा CC का मतलब है ज्यादा पावर, या कुछ और है स्पीड की गणित?
Embed widget