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क्या वांगचुक का अनशन धीरे-धीरे सरकार के लिए संकट बन रहा है? जानिए जंतर-मंतर के इस धरने का ज्योतिषीय भविष्य

Jantar Mantar Andolan: जंतर-मंतर पर CJP का शांतिपूर्ण आंदोलन 27वें दिन भी जारी है. जानिए सोनम वांगचुक के अनशन और ग्रहों के गोचर से क्या कुछ बदलाव हो सकता है.

18वीं सदी में तैयार किया गया दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर देश की राजनीतिक सुर्खियों में है. ग्रहों की गणना करने और खगोलीय पिंडों की गति के आधार पर समय का सटीक आकलन करने के लिए बनाई गई यह वेधशाला आज एक जन-आंदोलन का गवाह बन रही है. 

इस ऐतिहासिक स्थान पर अभिजीत दिपके के नेतृत्व वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का शांतिपूर्ण आंदोलन अब 27वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जिसमें नीट (NEET) पेपर लीक परीक्षा विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही है. जमीन पर माहौल बेहद संवेदनशील और गंभीर हो चुका है, जहां शिक्षा सुधार और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आमरण अनशन का आज 19वां दिन है. 

लगातार भूख हड़ताल के कारण उनका वजन 9 किलोग्राम से अधिक घटकर 56.90 किलोग्राम रह गया है, जिसके चलते वे 24 घंटे डॉक्टरों की निगरानी में हैं. वांगचुक के अलावा अन्य लोग भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं.

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इस बीच, सीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने घोषणा की है कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो 20 जुलाई को देश भर से जुटे लोग 'संसद चलो' मार्च करेंगे. इस आंदोलन को विपक्ष और कई सामाजिक हस्तियों का भी समर्थन मिल चुका है.

ज्योतिषीय सिद्धांतों और ताजिक नियमों के अनुसार, जब खगोलीय गणनाओं के लिए तैयार की गई इस भूमि पर ऐसा प्रचंड आंदोलन खड़ा होता है, तो ग्रहों का गोचर सीधे तौर पर सिस्टम को प्रभावित करता है. जुलाई 2026 के अंतिम सप्ताह में बनने वाली ग्रहों की स्थिति स्पष्ट रूप से संकेत कर रही है कि यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में देश के शिक्षा विभाग में एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल की नींव रखेगा.

जुलाई 2026 के तीन महागोचर

इस आंदोलन के लिए आज 16 जुलाई 2026 का दिन विशेष था. क्योंकि सूर्य का कर्क राशि में गोचर हुआ है. ज्योतिषीय सिद्धांतों के अनुसार सूर्य को सत्ता, शासन और प्रशासनिक प्रमुख का कारक माना गया है. जब सूर्य जल तत्व की राशि कर्क में गोचर करता है, तो शासन व्यवस्था पर जनता और तात्कालिक परिस्थितियों का नैतिक दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है.

इसके बाद 24 जुलाई 2026 को मिथुन राशि में बुध मार्गी हो जाएगा. बुध को ज्योतिष में संवाद, मीडिया, साक्ष्यों और कानूनी विमर्श का कारक माना गया है. बुध के मार्गी होते ही सूचनाओं और तथ्यों का प्रवाह तीव्र होगा, जिससे आंदोलनकारियों की बात मीडिया के माध्यम से पूरी तरह मुखर होकर सामने आएगी. 

सबसे महत्वपूर्ण कड़ी 27 जुलाई 2026 को बनेगी, जब जनता और न्याय के कारक शनि देव मीन राशि में वक्री होंगे. ज्योतिष के प्रामाणिक ग्रंथ 'फलदीपिका' के अनुसार, वक्री होने पर ग्रहों को पूर्ण चेष्टा बल प्राप्त होता है, जो यह दर्शाता है कि जनता की मांगों के आगे शासन को नीतिगत स्तर पर झुकना पड़ सकता है.

भारत की कुंडली का कड़वा सच

यदि स्वतंत्र भारत की मूल जन्म कुंडली का अध्ययन करें, तो महर्षि पाराशर के बृहत् पाराशर होराशास्त्र के भाव बल सिद्धांतों के अनुसार, भारत की कुंडली में सत्ता और सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले दसवें भाव (मकर राशि) का कुल बल इसे तकनीकी रूप से कमजोर बनाता है. 

इसके विपरीत जनता की आवाज, जन भावना और आंदोलन का जो तीसरा भाव (कर्क राशि) है, उसका कुल भाव बल सरकार के भाव से दोगुना शक्तिशाली है. इसके अतिरिक्त पूरी नीति और शिक्षा व्यवस्था का नैसर्गिक कारक ग्रह गुरु (बृहस्पति) षड्बल में सबसे कमजोर बल के साथ कुंडली के छठे यानी विवाद के घर में बैठा है, जो यह प्रमाणित करता है कि शिक्षा विभाग के निर्णयों की गंभीर कमियां इस अवधि में उजागर होंगी. 

वर्तमान में भारत की कुंडली में मारक और व्ययेश मंगल की महादशा चल रही है, जो कैबिनेट और मंत्रियों के परिषद वाले दूसरे भाव में बैठा है. इसी मारक प्रभाव के कारण सरकार शुरुआत से ही इस आंदोलन पर अपनी नजर बनाए रहेगी और इस कतई हल्के में नहीं लेगी.

CJP की कुंडली क्या कहती है?

दूसरी तरफ आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की कुंडली इस समय एक अत्यंत निर्णायक मोड़ पर खड़ी है. CJP की मकर लग्न की कुंडली में वाणी और अभिव्यक्ति के दूसरे घर में राहु स्थित है, जो रणनीतिक और तीखी भाषा की ताकत देता है. 

सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी बिंदु यह है कि इस समय पार्टी की कुंडली में अष्टमेश सूर्य की महादशा में राहु की अंतर्दशा प्रभावी है. उत्तर कालामृत ग्रंथ के मारक और दशा नियमों के अनुसार आठवें घर (आकस्मिक घटनाक्रम और गुप्त रहस्यों) के मालिक की दशा में राहु का अंतर्संबंध यह प्रमाणित करता है कि यह पार्टी शासन की किसी बड़ी विफलता या नीतिगत विसंगति को साक्ष्यों के साथ उजागर करेगी. 

जब 27 जुलाई को CJP का लग्नेश शनि इनके पराक्रम और धरने के तीसरे घर में वक्री होकर पूर्ण चेष्टा बल हासिल करेगा, तब आंदोलनकारियों के प्रयास अत्यधिक आक्रामक और दृढ़ हो सकते हैं.

तात्कालिक फल किस तरफ रहेगा, इसका सबसे बड़ा प्रमाण ताजिक ज्योतिष पद्धति की 'मुन्था' से मिलता है. CJP का यह संगठनात्मक रूप से पहला वर्ष है, इसलिए ताजिक नियमों के अनुसार इनकी मुन्था मकर राशि यानी पहले घर (लग्न) में ही बैठी है.

आंदोलन जनसमर्थन प्राप्त करने में कितना सफल रहेगा?

ताजिक नीलकंठी का प्रामाणिक सूत्र कहता है कि लग्न की मुन्था किसी भी जातक या संस्था को कार्यसिद्धि और व्यापक जनसमर्थन प्रदान करती है. इसके विपरीत भारत के 79वें वर्षफल के गणित के हिसाब से देश की मुन्था वृश्चिक राशि यानी सातवें घर में गोचर कर रही है, जिसे ताजिक ज्योतिष में 'बाधकता' और 'तीव्र जन-आक्रोश' का केंद्र माना गया है. सातवें घर की मुन्था सीधे तौर पर सरकार के लिए जनता और विपक्ष के साथ एक गंभीर राजनीतिक गतिरोध को प्रमाणित करती है.

क्या धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होना तय है?

ग्रहों का यह पूरा जोड़-घटाव और वेध चक्र यह साफ-साफ प्रमाणित करता है कि शासन व्यवस्था इस चौतरफा राजनीतिक दबाव के आगे ज्यादा दिनों तक गतिरोध बनाए रखने में असमर्थ होगी. 16 जुलाई को सूर्य का गोचर भारत की कुंडली के मूल कर्मेश शनि के ऊपर होगा, कैबिनेट के भीतर आंतरिक मतभेद और नीतिगत दबाव खुलकर सामने आ जाएंगे. 24 जुलाई को बुध के मार्गी होते ही आंदोलनकारियों का पलड़ा तार्किक और कानूनी रूप से भारी पड़ सकता है.

27 जुलाई को शनि के वक्री होकर पूर्ण चेष्टा बल प्राप्त करते ही, भारी राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक जवाबदेही के कारण जुलाई के अंतिम सप्ताह या अगस्त के पहले सप्ताह के भीतर सरकार कोई बदलाव या बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर हो सकती है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader

"ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है."

हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.

वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता और IIMT University Meerut से ज्योतिष शास्त्र व वास्तु शास्त्र की पढ़ाई की है और Astrosage व Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम किया है. मीडिया, ऑडियंस बिहेवियर, डिजिटल पब्लिशिंग और कंटेंट रणनीति की समझ ने उनके काम को अलग पहचान दी है.

हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है. उनके विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, मेदिनी ज्योतिष और समाज की बदलती मानसिकता की समझ पर आधारित होते हैं.

वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.

डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.

उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.

श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.

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