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क्या है Context Bombing? जानिए कैसे ये टेक्नोलॉजी हैकर्स के लिए बन रही मुसीबत

Context Bombing: साइबर सुरक्षा कंपनी Tracebit के वैज्ञानिकों ने Prompt Injection से बचने के लिए एक नया तरीका खोज निकाला है जिसे Context Bombing कहते हैं.

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  • एआई संदिग्ध कार्यों को अस्वीकार कर सिस्टम को सुरक्षित रखता है।

Context Bombing: आर्टफिशियल इंटेलिजेंस आज के समय में लोगों के बहुत काम आ रहा है. ये लोगों के काम करने के तरीकों को भी बदल रहा है. हालांकि, अब इस नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल साइबर अपराध में भी किया जा रहा है. अब हैकर्स एआई की मदद से भी लोगों को ठगने का काम कर रहे हैं. इसी को देखते हुए अब एक नई टेक्नोलॉजी आ चुकी है जो हैकर्स के लिए मुसीबत बन चुकी है. दरअसल, ये एक नया तरीका है जिसे कॉन्टेक्स्ट बॉम्बिंग (Context Bombing) कहा जाता है. आइए जानते हैं क्या है ये सिस्टम.

क्या होती है Context Bombing?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, साइबर सुरक्षा कंपनी Tracebit के वैज्ञानिकों ने Prompt Injection से बचने के लिए एक नया तरीका खोज निकाला है जिसे Context Bombing कहते हैं. इस टेक्नोलॉजी में पासवर्ड, सिक्योरिटी की या दूसरी जरूरी जानकारी के साथ स्पेशल टाइप के कमांड पहले से ही जोड़ दिए जाते हैं. जब कोई AI एजेंट इन डेटा तक पहुंचता है तो उसे ऐसे कमांड दिखाई देते हैं जो उसकी Guardrails को एक्टिव कर देते हैं. ऐसे में होता ये है कि AI किसी भी संदिग्ध या गलत काम को करने से साफ इनकार कर देता है जिससे हैकर आपके सिस्टम को अपने कंट्रोल में नहीं ले पाएगा.

कैसे काम करता है ये सिस्टम

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि Context Bombing का मकसद AI के अंदर मौजूद Refusal Mechanism को एक्टिव करना है. जैसे ही मॉडल किसी गलत कमांड वाले कॉन्टेक्स्ट से टकराता है, वह आगे की एक्टिविटी को ऐक्सेप्ट नहीं करता.

Tracebit के अनुसार, एक बार AI इस सुरक्षा मोड में पहुंच जाए तो उसे दोबारा गलत कमांड के जरिए प्रभावित करना काफी मुश्किल हो जाता है. वैज्ञानिकों ने इस टेक्नोलॉजी का टेस्ट कई फेमश AI मॉडल्स पर किया है जिसमें Opus 4.8, Gemini 3.1 Pro, GLM 5.2, DeepSeek 4 Pro जैसे मॉडल्स शामिल हैं.

क्या होती है Prompt Injection?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, AI बेस्ड चैटबॉट और बड़े लैंगवेज मॉडल (LLM) को निर्देश देकर काम कराया जाता है. हैकर्स इसी प्रोसेस का फायदा उठाने के लिए Prompt Injection टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं.

इसमें वे ईमेल, डॉक्यूमेंट्स, कैलेंडर इनवाइट या दूसरी जरूरी फाइलों में ऐसे छिपे हुए कमांड जोड़ देते हैं जिन्हें AI असली कमांड समझ लेता है. अगर AI इन कमांड्स को मान ले तो वह संवेदनशील जानकारी लीक कर सकता है, गलत फैसले ले सकता है या आपको किसी बड़ी मुसीबत में भी फसा सकता है.

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स्मार्टफोन, गैजेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और इंटरनेट टेक्नोलॉजी की दुनिया में मेरा इंटरेस्ट काफी ज्यादा है. मैं यानी हिमांशु तिवारी, ABP LIVE में टेक और डिजिटल सेक्शन का हिस्सा हूं. मैं नई टेक्नोलॉजी को आसान और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाने का काम करता हूं. स्मार्टफोन लॉन्च, वायरल टेक ट्रेंड्स, AI अपडेट्स, सोशल मीडिया फीचर्स और साइबर फ्रॉड जैसे विषयों पर मेरी पकड़ मजबूत है.

टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों को सिर्फ जानकारी तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें आम लोगों की जरूरत और रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर पेश करता हूं. खासतौर पर ऐसी खबरों पर काम करना पसंद करता हूं, जो लोगों के डिजिटल एक्सपीरियंस को सीधे प्रभावित करती हैं.

इसके अलावा मुझे नई टेक्नोलॉजी एक्सप्लोर करना, स्मार्टफोन फीचर्स को समझना और डिजिटल ट्रेंड्स पर रिसर्च करना पसंद है. मैं आसान भाषा और आकर्षक अंदाज में लिखने के लिए जाना जाता हूं, जिससे कठिन टेक्निकल बातें भी पाठकों के लिए समझना आसान हो जाती हैं. मैंने परास्नातक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की है.

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