अशोक गहलोत ने BJP-RSS को घेरा, 'इनका वंदे मातरम से क्या संबंध?'
Vande Mataram Controversy: अपने पोस्ट में गहलोत ने लिखा, 'कल चित्तौड़गढ़ में अमित शाह ने वंदे मातरम पर ज्ञान बांटा. यह सुनकर इतिहास के जानकारों को हंसी आई. भाजपा-RSS का वंदे मातरम से क्या संबंध है?

वंदे मातरम जारी सियासी बयानबाजी के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस के पक्ष का बचाव किया है. उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बीजेपी पर अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट के जरिए गंभीर आरोप लगाए हैं.
अपने पोस्ट में संघ और बीजेपी को घेरते हुए उन्होंने दावा किया कि RSS का कभी वंदे मातरम से कोई लेना देना नहीं रहा है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के लग रहे आरोपों के बीच अशोक गहलोत का ये पोस्ट सामने आया है.
कल चित्तौड़गढ़ में श्री @AmitShah ने वंदे मातरम पर ज्ञान बांटा। यह सुनकर इतिहास के जानकारों को हंसी आई। भाजपा-आरएसएस का वंदे मातरम से क्या संबंध है? यह वही आरएसएस और उनकी विचारधारा है जिसका वंदे मातरम से कभी कोई नाता ही नहीं रहा। आज इतिहास पर प्रवचन दे रहे हैं, यह इनका अपराध बोध…
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) August 17, 2026
अमित शाह को गहलोत ने घेरा
अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'कल चित्तौड़गढ़ में अमित शाह ने वंदे मातरम पर ज्ञान बांटा. यह सुनकर इतिहास के जानकारों को हंसी आई. भाजपा-RSS का वंदे मातरम से क्या संबंध है? यह वही RSS और उनकी विचारधारा है जिसका वंदे मातरम से कभी कोई नाता ही नहीं रहा. आज इतिहास पर प्रवचन दे रहे हैं, यह इनका अपराध बोध है, कुछ और नहीं. इसलिए ये संसद में अब वंदे मातरम को लेकर कानून बना रहे हैं.' बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के राजस्थान दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने वंदे मातरम के विवाद को उठाया था.
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'वंदे मातरम से कांग्रेस का पुराना कनेक्शन'
गहलोत ने आगे लिखा, 'साल 1896 में कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार वंदे मातरम गूंजा. 1905 से यह हर कांग्रेस अधिवेशन की परंपरा बन गया. कांग्रेस के नेता वंदे मातरम का उद्घोष करते हुए अंग्रेजों से सीधी टक्कर लेते थे. अंग्रेजों ने प्रतिबंध लगाया, जुर्माने लगाए, जेल भेजा, लाठियां बरसाईं तब भी कांग्रेसजन और जोश से वंदे मातरम गाते रहे. 1937 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर इसका समावेशी स्वरूप अपनाया गया ताकि यह हर भारतीय का साझा गीत बने.'
'RSS का वंदे मातरम से कोई लेना-देना नहीं'
अशोक गहलोत ने दावा किया कि RSS का कभी वंदे मातरम से कोई लेना देना नहीं रहा है. साल 1925 में RSS के गठन से लेकर 1947 की आजादी तक RSS ने कभी वंदे मातरम को अपना गीत नहीं बनाया. जिस गीत के लिए हजारों देशभक्त फांसी चढ़े, जेल गए, लाठियां खाईं, अंग्रेजों के डर से उसे गाने की हिम्मत RSS में नहीं थी.
इसके बजाय 1939 में जब पूरा देश वंदे मातरम गाकर अंग्रेजों से लोहा ले रहा था, तब RSS ने एक अलग प्रार्थना 'नमस्ते सदा वत्सले' गढ़ ली, जिससे अंग्रेजी सरकार RSS से नाराज न हो जाए. जब 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में देश का बच्चा-बच्चा, बूढ़ा-जवान सड़कों पर अंग्रेजों के खिलाफ उतर पड़ा था तब RSS उस आंदोलन से दूर रहकर अंग्रेजों की खुशामद में लगा रहा.
गहलोत ने अंत में लिखा कि RSS चूंकि अंग्रेजों की खुशामद में लगा रहा इसलिए आजादी के बाद देश की जनता ने दशकों तक इन्हें सत्ता से दूर रखा. अब सत्ता में आकर यह अपने इतिहास के पन्ने बदलना चाहते हैं, ताकि अपने दागों को धो सकें. पर याद रखिए, भाषणों से इतिहास नहीं बदलता. देश की जनता सब जानती है, इनके यह पाप ऐसे धुलने वाले नहीं हैं.'
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